अगर आपकी कार तेज रफ्तार में चलाते समय हिलने लगती है, तो ये सिर्फ टेंशन वाली बात नहीं है. ये आपकी गाड़ी की तरफ से एक गंभीर चेतावनी होती है. भारत में जो लोग अक्सर हाईवे या एक्सप्रेसवे पर ड्राइव करते हैं, उनके साथ ये समस्या काफी नॉर्मल है, लेकिन ज्यादातर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं जब तक कि ये बड़ा और महंगा प्रॉब्लम न बन जाए. इसके पीछे वजहें साफ होती हैं और उनका हल भी मौजूद होता है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं तेज रफ्तार में कार हिलने के 5 सबसे आम कारण.
असंतुलित कार के टायर
अगर आपकी कार तेज स्पीड पर जाकर हिलने लगती है, तो इसकी एक बहुत आम वजह अनबैलेंस्ड टायर्स होती हैं. जब टायरों में वजन सही तरीके से बराबर नहीं बंटा होता, तो जैसे-जैसे स्पीड बढ़ती है, ये असंतुलन और ज्यादा महसूस होने लगता है और गाड़ी में वाइब्रेशन आने लगती है. अच्छी बात ये है कि इसका समाधान बहुत आसान है. बस नजदीकी सर्विस सेंटर में जाकर व्हील बैलेंसिंग करवाइए.
गलत तरीके से सेट किए गए पहिए
अगर आपकी कार तेज स्पीड पर वाइब्रेट करने लगती है, तो इसकी एक बड़ी वजह व्हील्स का सही तरीके से अलाइन न होना हो सकता है. जब पहिए ठीक से अलाइन नहीं होते, तो टायर सड़क पर बराबर तरीके से नहीं टिक पाते और इसी वजह से गाड़ी में हल्की अस्थिरता आने लगती है. शहर की धीमी ट्रैफिक में ये दिक्कत शायद उतनी महसूस न हो, लेकिन जैसे ही आप हाईवे पर तेज स्पीड पकड़ते हैं, तब गाड़ी हल्की-हल्की खिंचने लगती है और वाइब्रेशन साफ महसूस होता है. अच्छी बात ये है कि ये एक फिक्स होने वाली समस्या है. बस हर 10,000 km पर व्हील अलाइनमेंट जरूर चेक करवा लें.
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सस्पेंशन के घिसे हुए पार्ट्स
आपकी कार का सस्पेंशन सिस्टम रास्ते के झटकों को सोखकर गाड़ी को स्टेबल और स्मूद चलाने में मदद करता है. लेकिन अगर इसके अहम पार्ट्स जैसे शॉक एब्जॉर्बर या स्ट्रट्स घिस जाएं, तो गाड़ी अस्थिर और हिलती हुई महसूस होने लगती है. भारत की खराब सड़कें इस घिसावट को और तेज कर देती हैं. ऐसे में खराब या डैमेज सस्पेंशन की वजह से हाई स्पीड पर स्टीयरिंग व्हील भी कांप सकता है और गाड़ी की वाइब्रेशन और ज्यादा बढ़ जाती है. इसलिए इसे हल्के में न लें. हर 20,000 किलोमीटर के बाद सस्पेंशन की जांच जरूर करवाएं.
मुड़े हुए ब्रेक रोटर
इसके पीछे ‘warped brake rotors’ यानी खराब/टेढ़े ब्रेक डिस्क भी एक वजह हो सकते हैं. जब रोटर की सतह टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती है, तो ब्रेक पैड सही तरीके से ग्रिप नहीं कर पाते. इसी वजह से स्टीयरिंग या ब्रेक पेडल में झटके महसूस होते हैं. ऐसी हालत को हल्के में बिल्कुल न लें, क्योंकि ब्रेक लगाते समय कार का इस तरह कांपना सीधे आपकी रुकने की दूरी और कंट्रोल पर असर डालता है. समय रहते रोटर को बदलवाना ही सेफ ड्राइविंग के लिए सही कदम है.
एक खराब एक्सल या CV जॉइंट
अगर आपकी गाड़ी तेज रफ्तार पर नहीं बल्कि खासकर अक्सेलरेशन करते समय या किसी RPM पर हिलने लगती है, तो ये सिर्फ हल्की परेशानी नहीं है. अक्सर इसके पीछे ड्राइवशाफ्ट में संतुलन बिगड़ना, घिसे हुए CV जॉइंट्स या इंजन-गियरबॉक्स के खराब माउंट्स जैसी दिक्कतें होती हैं. अगर CV जॉइंट का बूट फट जाए, तो मामला और गंभीर हो जाता है. उस हालत में पानी और गंदगी अंदर जाकर ग्रीस को धो देते हैं, जिससे एक्सेल के अंदर धातु से धातु का घर्षण शुरू हो जाता है. शुरू में ये हल्की वाइब्रेशन देता है, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो हाईवे पर चलते-चलते पूरा एक्सेल भी फेल हो सकता है.
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