Suzuki e-Access खरीदने का है प्लान? शोरूम जाने से पहले जान लें 2 फायदे और 2 नुकसान

सुजुकी का पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर e-Access खास फीचर्स के बजाय लंबी उम्र और भरोसे पर ज़ोर देता है. जानिए इस स्कूटर को खरीदने के फायदे और नुकसान, और क्या यह आपके लिए सही है.

सुजुकी e-Access भारत के लिए ब्रांड का पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर है और यह बिल्कुल नए सिरे से तैयार किया गया प्रोडक्ट है, जो नाम के अलावा पेट्रोल एक्सेस से बहुत कम मेल खाता है. एक नए प्लेटफॉर्म पर बना यह स्कूटर शानदार परफॉर्मेंस या फीचर्स के बजाय अपनी लंबी उम्र और भरोसे के दम पर अपनी पहचान बनाता है. यहां कुछ बातें बताई गई है जो इसके फेवर में काम करती है और कुछ वजहें जिनकी वजह से यह हर किसी के लिए सही नही हो सकता है.

Suzuki e-Access खरीदने की वजहें

राइडिंग में आरामदायक और भरोसे की गारंटी

e-Access चलाने में एक काफी आरामदायक स्कूटर है. इसकी बैठने की पोजीशन बिल्कुल सही है, सीट चौडी और समतल है, और सस्पेंशन भी काफी अच्छे से ट्यून किया गया है – जो बिना ज्यादा झटके दिए गाड़ी को मजबूती देता है. इसके अलावा, बिल्ड क्वालिटी के मामले में भी इसे काफी मजबूती से बनाया गया है, जैसा कि सुजुकी के टू-व्हीलर्स में हमेशा देखने को मिलता है. इसमें इस्तेमाल की गई LFP बैटरी तकनीक दूसरी गाड़ियों के NMC पैक के मुकाबले ज्यादा लंबी लाइफ और आग लगने का कम रिस्क देती है, जिससे लंबे समय तक चलाने में भरोसा मिलता है.

सटीक और भरोसेमंद रेंज इंडिकेटर

एक बात जिसमें e-Access सबसे अलग दिखता है, वह है इसके रेंज इंडिकेटर का सटीक होना. जब सिस्टम आपकी राइडिंग स्टाइल को समझ लेता है, तो डिस्प्ले पर दिखने वाली बची हुई दूरी का आंकडा बिल्कुल सही साबित होता है. इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में यह बात आमतौर पर देखने को नही मिलती, जहां ज्यादातर स्कूटर्स का रेंज इंडिकेटर गलत दिखाता है और लोड़ पड़ते ही तेजी से गिर जाता है. हमारे टेस्ट में 'Ride A' मोड के साथ, हमने एक चार्ज में 88 किमी से ज्यादा की दूरी तय की – जो 95 किमी की दावा की गई IDC रेंज से थोड़ी कम है, लेकिन फिर भी सही मानी जा सकती है.

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Suzuki e-Access न खरीदने की वजहें

कीमत के हिसाब से परफॉर्मेंस और रेंज कम

इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट के हिसाब से e-Access थोडा धीमा है. हमारे टेस्ट में, इसे 0 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकडने में लगभग 12 सेकंड का समय लगा, जो न केवल इसी कीमत वाले दूसरे स्कूटर्स से धीमा है बल्कि पेट्रोल एक्सेस 125 से भी काफी धीमा है. 88 किमी की असल रेंज वैसे तो ठीक है, लेकिन इतनी ही बैटरी वाले बाकी स्कूटर्स आसानी से 100 किमी से ज्यादा की रेंज दे देते है. इसके अलावा, इसका पावरसिस्टम बाजार में मौजूद दूसरे नामी इलेक्ट्रिक स्कूटर्स के मुकाबले आवाज भी ज्यादा करता है.

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कम है बूट स्पेस

सीट के नीचे मिलने वाला 17 लीटर का बूट स्पेस e-Access की सबसे बडी कमी है. आज के समय में जब ज्यादातर इलेक्ट्रिक स्कूटर्स 30 से 35 लीटर का स्टोरेज दे रहे है – और कुछ, जैसे Simple Wave लगभग 70 लीटर दे रहे है – ऐसे में e-Access का बूट स्पेस रोज के इस्तेमाल के लिए काफी कम लगता है. साथ में मिलने वाला चार्जर भी केबल मोड़कर मुश्किल से ही इसके अंदर आ पाता है, जिससे कोई दूसरी चीज रखने की जगह ही नही बचती. ऐसा इसलिए है क्योंकि सुजुकी ने बैटरी पैक को सीट के नीचे खड़ा करके लगाया है, और सबसे बड़ी बात यह है कि लेटेस्ट पेट्रोल एक्सेस 125 में भी इस इलेक्ट्रिक मॉडल से ज्यादा बूट स्पेस मिलता है.

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By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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