कई लोग अपनी कार के क्लच पर तब ध्यान देते हैं, जब दिक्कतें साफ दिखने लगती हैं. जैसे क्लच स्लिप होना, अजीब आवाजें आना या फिर क्लच पैडल का जरूरत से ज्यादा भारी महसूस होना. ज्यादातर मामलों में क्लच जल्दी खराब होने की वजह कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की ड्राइविंग आदतें ही होती हैं. ऐसे में जरूरी है कि उन छोटी-छोटी गलतियों को समझा जाए, जो धीरे-धीरे क्लच की लाइफ कम कर देती हैं.
क्लच पर पैर टिकाना
कार चलाते समय लोग अक्सर क्लच पैडल पर हल्का-सा पैर टिकाकर रखते हैं. देखने में ये मामूली आदत लगती है, लेकिन इससे क्लच पूरी तरह जुड़ा नहीं रहता और अंदर लगातार घर्षण और गर्मी पैदा होती रहती है. नतीजा यह होता है कि क्लच प्लेट धीरे-धीरे जल्दी घिसने लगती है.
इसी तरह, ढलान पर गाड़ी रोकने के लिए ब्रेक की जगह क्लच कंट्रोल का इस्तेमाल करना भी क्लच पर काफी लोड डालता है. इससे क्लच प्लेट जरूरत से ज्यादा गर्म होती है और समय के साथ उसकी लाइफ कम होने लगती है.
क्लच को आधा दबाकर चलाना
अगर आप मैनुअल कार चलाते हैं, तो एक आदत जो सबसे ज्यादा क्लच को नुकसान पहुंचाती है, वो है लो-स्पीड में क्लच को आधा दबाकर गाड़ी चलाना. इससे क्लच प्लेट लगातार रगड़ खाती रहती है और उसकी लाइनिंग नॉर्मल से कहीं ज्यादा तेजी से घिसने लगती है.
इसके अलावा अचानक तेज एक्सेलरेशन देना, झटके से गियर बदलना या रेस लगाकर गाड़ी भगाना भी क्लच पर एक्स्ट्रा लोड डालता है. ऐसी ड्राइविंग से काफी ज्यादा हीट पैदा होती है, जो धीरे-धीरे क्लच सिस्टम को कमजोर करने लगती है.
सिग्नल पर क्लच दबाए रखना
एक और आम गलती लोग ट्रैफिक सिग्नल पर करते हैं. गाड़ी रोककर क्लच दबाए रखना. जबकि सही तरीका है गियर को न्यूट्रल में डालना. लंबे समय तक क्लच दबाकर रखने से रिलीज बेयरिंग जैसे पार्ट्स पर बेवजह लोड पड़ता है, जिससे उनकी लाइफ कम हो जाती है.
कार को ओवरलोड कर लेना
अगर आप अपनी गाड़ी में जरूरत से ज्यादा लोग या भारी सामान लेकर चलते हैं, तो इसका असर सीधे क्लच पर पड़ता है. खासकर छोटी कारों में, जहां ड्राइवट्रेन पहले से ही शहर के ट्रैफिक में ज्यादा मेहनत कर रही होती है. ऐसे में ओवरलोडिंग क्लच की लाइफ को तेजी से कम कर सकती है.
मेंटेनेंस को इग्नोर करना
सिर्फ ड्राइविंग ही नहीं, मेंटेनेंस की अनदेखी भी क्लच को नुकसान पहुंचाती है. कई लोग शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जैसे गियर लगने में देरी होना, कंपन महसूस होना या क्लच पेडल का जरूरत से ज्यादा सख्त हो जाना. शुरुआत में ये छोटी दिक्कतें लगती हैं, लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर यही बड़े और महंगे रिपेयर का कारण बन सकती हैं.
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