Honda SP 125 vs TVS iQube S: रोज 30 से 50 किलोमीटर चलने के लिए कौन सबसे बेहतर?

रोजाना 30-50 किलोमीटर की यात्रा के लिए Honda SP 125 और TVS iQube S में से बेहतर कौन है? यह आर्टिकल दोनों की परफॉरमेंस, रनिंग कॉस्ट और कीमत का कंपैरिजन कर आपकी पसंद को आसान बनाएगा.

Honda SP 125 और TVS iQube S दोनों ही भारतीय बाजार में डेली कम्यूट के लिए पसंदीदा ऑप्शन हैं. रोजाना 30 से 50 किलोमीटर सफर करने वाले राइडर्स के लिए पेट्रोल और इलेक्ट्रिक का यह मुकाबला काफी दिलचस्प है. Honda SP 125 अपने रिफाइंड इंजन और बेहतरीन माइलेज के लिए जानी जाती है. TVS iQube S आधुनिक फीचर्स और जीरो एमिशन के साथ शानदार इलेक्ट्रिक ऑप्शन है. इन दोनों वाहनों की एक्स शोरूम कीमत, रनिंग कॉस्ट और डेली कम्फर्ट का पूरा एनालिसिस करके सही ऑप्शन चुनना बेहद आसान हो जाता है.

Honda SP 125 vs TVS iQube S: परफॉर्मेंस और डेली राइड कम्फर्ट

Honda SP 125 में 123.94 cc का BS6 पेट्रोल इंजन मिलता है. यह बाइक 10.87 PS की पावर और 10.9 Nm का टॉर्क देती है. हाईवे और शहर दोनों जगह इसे 70 से 80 km/h की रफ्तार पर चलाना बेहद आसान है. 5 स्पीड गियरबॉक्स के साथ लंबी दूरी के सफर में यह राइडर को थकान महसूस नहीं होने देती.

TVS iQube S एक इलेक्ट्रिक स्कूटर है जिसमें 4.7 kW की BLDC हब मोटर लगी है. यह स्कूटर 82 km/h की टॉप स्पीड देता है. शहर के ट्रैफिक में क्लच या गियर बदलने का कोई झंझट नहीं रहता. 32 लीटर का बड़ा अंडरसीट स्टोरेज और 7 इंच का TFT डिस्प्ले इसे रोजमर्रा के काम के लिए काफी प्रैक्टिकल बनाते हैं. 

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Honda SP 125 vs TVS iQube S: रनिंग कॉस्ट और माइलेज तुलना

रोज 30 से 50 किलोमीटर चलने वालों के लिए सबसे बड़ा पैमाना रनिंग कॉस्ट होता है.

Honda SP 125 का ARAI-Certified माइलेज 63kmpl तक मिल जाता है. अगर आप रोज 40 किलोमीटर चलते हैं तो हर महीने लगभग 20 से 22 लीटर पेट्रोल खर्च होगा. इसका मतलब है कि पेट्रोल का मंथली खर्च करीब 2000 रुपये से 2200 रुपये के आसपास आएगा.

TVS iQube S (4.7 kWh) एक बार फुल चार्ज करने पर 175 किलोमीटर की IDC रेंज देता है. इसे चार्ज करने में बेहद कम बिजली खर्च होती है. यदि आप रोज 40 किलोमीटर चलते हैं तो महीने का बिजली बिल 250 से 300 रुपये ही आएगा. यानी इलेक्ट्रिक स्कूटर से सीधे 80 प्रतिशत तक बचत संभव है.

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Honda SP 125 vs TVS iQube S: कीमत और वैल्यू फॉर मनी

Honda SP 125 की शुरुआती एक्स शोरूम कीमत लगभग 89,748 रुपये है और टॉप वेरिएंट Rs 97,335 तक जाता है. कम शुरुआती बजट वालों के लिए यह एक वैल्यू फॉर मनी बाइक है.

TVS iQube S की एक्स शोरूम कीमत लगभग 1,65,340 रुपये से शुरू होती है. यह Honda SP 125 से महंगी है, लेकिन इसकी कम रनिंग कॉस्ट 2 से 3 सालों में इस कीमत के अंतर को आसानी से रिकवर कर देती है.

Honda SP 125 vs TVS iQube S: कौन सबसे बेहतर?

अगर आपका बजट सीमित है और आप बिना चार्जिंग की चिंता किए बिना कहीं भी तुरंत निकलना चाहते हैं, तो Honda SP 125 आपके लिए सही ऑप्शन है.

वहीं, अगर आपका डेली रूट 30 से 50 किलोमीटर तय है और आपके पास घर पर चार्जिंग की अच्छी सुविधा है, तो TVS iQube S आपके लिए सबसे बेहतर फैसला रहेगा. यह न सिर्फ आपके फ्यूल का पैसा बचाएगा बल्कि राइडिंग को स्मूथ और मॉडर्न बनाएगा.

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लेखक के बारे में

By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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