विधानसभा चुनाव आते ही दिल्ली-जयपुर के बीच बनेगा ई-हाइवे! जानें हकीकत

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सबसे करीबी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व अध्यक्ष और फिलहाल केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भारत में 'गड्डों में सड़क' वाली परिकल्पना से कहीं ऊपर उठकर इलेक्ट्रिक हाईवे (ई-हाईवे) के सपने को साकार करने में जुटे हुए हैं.

नई दिल्ली : एक वक्त था, जब भारत की सड़कों की जर्जर स्थिति को देखकर पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने पूर्ववती सरकारों पर तंज कसते हुए कहा था, ‘सड़कों पर गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क?’ जब अटलजी भारत के प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने सबसे पहले देश के बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान देना शुरू कर दिया. इसी का नतीजा है कि आज भारत में तारकोल वाली सड़कों की बात कौन करे, स्वीडन की तर्ज पर ई-हाईवे की बात हो रही है.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सबसे करीबी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व अध्यक्ष और फिलहाल केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भारत में ‘गड्डों में सड़क’ वाली परिकल्पना से कहीं ऊपर उठकर इलेक्ट्रिक हाईवे (ई-हाईवे) के सपने को साकार करने में जुटे हुए हैं. अब जबकि भारत के राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव आसन्न है, तो केंद्र सरकार दिल्ली-जयपुर मार्ग पर ई-हाईवे बनाने का ऐलान कर रही है. बात समझने वाली यह है कि राजस्थान के अन्य जिलों में गड्ढे में पड़ी सड़कों को भी इलेक्ट्रिक-वे बनाया जाएगा क्या?

समाचार एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार 13 सितंबर 2023 को कहा कि आर्थिक रूप से व्यावहारिक होने के कारण सरकार इलेक्ट्रिक हाईवे को विकसित करने पर काम कर रही है. उन्होंने इससे पहले कहा था कि दिल्ली और जयपुर के बीच भारत का पहला इलेक्ट्रिक राजमार्ग बनाना उनका सपना है.

केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली वाहन कलपुर्जा विनिर्माता संघ (एक्मा) के वार्षिक सम्मेलन में कहा कि इलेक्ट्रिक राजमार्ग के बारे में मेरा विचार है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) मार्ग अधिकार देगा. आज मेरी बिजली मंत्रालय से बात हुई है. मैं कोशिश कर रहा हूं कि 3.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिले, नहीं तो वाणिज्यिक बिजली दर 11 रुपये प्रति यूनिट है. उन्होंने कहा कि बिजली मंत्रालय के लिए किसी सरकारी कंपनी को सस्ती दर पर बिजली देना आसान है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक राजमार्ग आर्थिक रूप से बहुत व्यवहारिक है. मैं निजी क्षेत्र के उन निवेशकों को सभी अधिकार दूंगा, जो (इलेक्ट्रिक हाईवे परियोजना में) निवेश करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक केबल निर्माण का कार्य निजी निवेशक करेंगे और एनएचएआई टोल की तरह ही विद्युत शुल्क वसूल करेगा.

इलेक्ट्रिक हाईवे वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन को उसी तरह से पूरा करते हैं जैसे रेलवे के लिए किया जाता है. यह स्वीडन और नॉर्वे जैसे बड़ी संख्या में देशों में प्रचलित तकनीक पर आधारित है. इसमें बिजली केबल का प्रावधान शामिल है, जिसका उपयोग ऐसे वाहन द्वारा किया जा सकता है, जो इस प्रकार की प्रौद्योगिकी से युक्त है. वाहन चलने के लिए इस केबल से मिलने वाली बिजली का उपयोग करेगा. फिलहाल मंत्रालय विभिन्न तकनीकों का मूल्यांकन कर रहा है. उन्होंने कहा कि हम नागपुर में प्रायोगिक आधार पर पहली इलेक्ट्रिक राजमार्ग परियोजना बना रहे हैं.

मंत्री ने कहा कि भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है और वाहन उद्योग देश का गर्व है. उन्होंने कहा कि वाहन उद्योग इस समय 12.50 लाख करोड़ रुपये का है, जो 2014 के 4.15 लाख करोड़ रुपये कहीं ज्यादा है. उन्होंने 2014 में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री का पद संभाला था. गडकरी ने कहा कि कच्चे तेल का आयात लगातार बढ़ रहा है. देश को इस संकट का समाधान निकालने की जरूरत है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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