BRICS Summit 2026: भारत के Auto Sector को क्या फायदा? EV से Car Export तक बदल सकती है तस्वीर

भारत की मेजबानी में BRICS समिट 2026 ऑटो सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है. इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर कार एक्सपोर्ट तक, भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे. जानिए कैसे यह समिट देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा देगा.

भारत की अध्यक्षता में 18वां BRICS Summit 2026 नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12-13 सितंबर के बीच आयोजित हो रहा है. दुनिया के प्रमुख उभरते देशों के प्रतिनिधि और कारोबारी इस बड़े मंच पर जुटे हैं. ऐसे में भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ा नजर आ रहा है. इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) से लेकर कार एक्सपोर्ट तक, भारतीय ऑटो कंपनियों के लिए ग्लोबल लेवल पर व्यापार के नए रास्ते खुल रहे हैं.

कार एक्सपोर्ट को मिलेगा नया बाजार

BRICS के विस्तार के बाद अब इसमें ब्राजील, रूस और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया जैसे देश भी शामिल हैं. ये सभी देश भारत निर्मित गाड़ियों के लिए एक बड़ा बाजार पेश करते हैं. भारत की किफायती और मजबूत कारों की मांग इन देशों में तेजी से बढ़ रही है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और आपसी व्यापारिक नियमों में ढील मिलने से टाटा, महिंद्रा और मारुति जैसी कंपनियों का एक्सपोर्ट काफी बढ़ सकता है.

इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में बड़ा फायदा

BRICS सम्मेलन में क्लीन एनर्जी और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. EV क्रांति के लिए सबसे जरूरी चीज लिथियम और आधुनिक बैटरी कंपोनेंट्स हैं. BRICS के प्रमुख साझेदार देशों के साथ बेहतर आर्थिक तालमेल से भारत को जरूरी कच्चे माल की सीधी और सीमलेस सप्लाई मिल सकेगी. इससे देश में EV बैटरी की मैन्युफैक्चरिंग लागत घटेगी और स्थानीय बाजार में इलेक्ट्रिक गाड़ियां और सस्ती होंगी.

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स्थानीय कंपनियों को नई पार्टनरशिप का मौका

BRICS समिट के जरिए भारतीय ऑटो कंपनियों को विदेशी ऑटो मेकर्स और टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ नए जॉइंट वेंचर बनाने का बेहतरीन अवसर मिल रहा है. इससे रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के क्षेत्र में बड़ा निवेश आएगा. भारतीय कंपोनेंट निर्माताओं को इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के पार्ट्स बनाने की आधुनिक तकनीक मिलेगी, जिससे डोमेस्टिक ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री का स्तर काफी ऊंचा होगा.

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रोजगार के नए अवसर और अर्थव्यवस्था को मजबूती

एक्सपोर्ट बढ़ने और नए EV प्लांट्स लगने से देश के मैन्युफैक्चरिंग हब्स में लाखों नए रोजगार पैदा होंगे. विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) बढ़ने से भारत की जीडीपी को सीधी मजबूती मिलेगी. कुल मिलाकर, यह सम्मेलन भारत को दुनिया के प्रमुख ऑटो एक्सपोर्टर और EV मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है.

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लेखक के बारे में

By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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