Ather Konarc vs TVS iQube: कीमत, रेंज, बैटरी और फीचर्स के मामले में कौन-सा इलेक्ट्रिक स्कूटर बेहतर?

एथर कोनार्क इलेक्ट्रिक स्कूटर ₹99,999 में लॉन्च हो चुका है, जो TVS iQube को टक्कर दे रहा है. जानें कीमत, रेंज, स्पीड और ब्रेकिंग सिस्टम में कौन-सा स्कूटर आपके लिए बेहतर है.

एथर कोनार्क (Ather Konarc) इलेक्ट्रिक स्कूटर भारत में 99,999 रुपये (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर लॉन्च हुआ है. यह कीमत टीवीएस आईक्यूब (TVS iQube) के सबसे सस्ते 2.3kWh वेरिएंट (1.16 लाख रुपये, एक्स-शोरूम) से काफी कम है. शुरुआती मॉडल पर दोनों के बीच 16,000 रुपये से ज्यादा का अंतर है. दोनों कंपनियां ग्राहकों के लिए अलग-अलग बैटरी का ऑप्शन देती हैं, इसलिए सही कंपैरिजन के लिए सिर्फ शुरुआती कीमत ही नहीं बल्कि फीचर्स और बाकी मॉडल्स को देखना जरूरी है. आइए दोनों की तुलना करते हैं. 

Ather Konarc vs TVS iQube: कीमत और रेंज

आईक्यूब का 2.3kWh वेरिएंट 1.16 लाख रुपये में 114 किमी की IDC रेंज देता है. वहीं, एथर का सबसे सस्ता कोनार्क S वेरिएंट 99,999 रुपये में 100 किमी की रेंज का दावा करता है. यानी एथर सस्ता है, लेकिन रेंज थोडी कम देता है.

वहीं, आईक्यूब का 3.5kWh वेरिएंट 145 किमी की रेंज का दावा करता है, जो कोनार्क S के 125 किमी वेरिएंट (1.22 लाख रुपये) से महंगा है. सबसे आगे टीवीएस का ST 5.3kWh वेरिएंट है, जो 212 KM की लंबी रेंज देता है, जो कोनार्क S के 161 किमी वेरिएंट (1.45 लाख रुपये) से काफी ज्यादा है. हालांकि, एथर के 200 किमी वाले S वेरिएंट की कीमत का ऐलान होना बाकी है, जो आने पर इस दूरी को कम कर सकता है. यह सभी कीमतें एक्स-शोरूम के हिसाब से हैं.

Ather Konarc vs TVS iQube: टॉप स्पीड, चार्जिंग और ब्रेक्स

आईक्यूब की टॉप-स्पीड वेरिएंट के हिसाब से अलग है. इसका बेस 2.3kWh मॉडल 68 किमी प्रति घंटे की स्पीड पकड़ता है, जबकि बाकी सभी वेरिएंट्स 82 किमी प्रति घंटे की स्पीड तक जाते हैं. एथर के कोनार्क S लाइन की स्पीड सभी रेंज में 70 किमी प्रति घंटे तक सीमित है, जबकि इसका पावरफुल Z-लाइन 80 किमी प्रति घंटे की स्पीड देता है. इसका मतलब है कि कागजों पर टीवीएस के मिड-रेंज और महंगे वेरिएंट्स ज्यादा तेज हैं.

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ब्रेकिंग सिस्टम की बात करें, तो एथर ने कोनार्क में नया AeBS सिस्टम दिया है, जो सामान्य कंबाइंड ब्रेकिंग से 20 परसेंट ज्यादा मजबूत ब्रेकिंग का दावा करता है. टीवीएस आईक्यूब में सामान्य CBS सेटअप ही मिलता है. दोनों स्कूटर्स में पोर्टेबल चार्जर दिए गए हैं, लेकिन एथर के चार्जर को अलग से सामान जोडकर 900W तक बढाया जा सकता है, जबकि टीवीएस आईक्यूब में 950W का स्टैंडर्ड पोर्टेबल चार्जर मिलता है.

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आपके लिए कौन-सा स्कूटर सही है?

कम बजट वाले खरीदारों के लिए एथर कोनार्क बेस मॉडल में टीवीएस आईक्यूब से काफी सस्ता है. लेकिन, ज्यादा कीमत देने पर टीवीएस रेंज के मामले में आगे निकल जाता है और इसकी 82 किमी प्रति घंटे की स्पीड एथर S-लाइन से बेहतर है. वहीं, एथर कोनार्क में नई ब्रेकिंग तकनीक और मैजिक-की (MagicKey) बिना चाबी की एंट्री जैसे फीचर्स मिलते हैं जो टीवीएस में नहीं हैं. एथर के Z-लाइन और 200 किमी वाले वेरिएंट की कीमतें सामने आने के बाद यह मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है.


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By शिवांश शेखर

शॉर्ट बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.

विस्तृत बायो 

शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं. 

उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई  

बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया. 

काम का सफर 

पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.

विजन 

शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.

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