बिहार में देवउठनी एकादशी व्रत कर भक्तों ने की सुख-समृद्धि की कामना

बिहार में देवउठनी एकादशी व्रत कर भक्तों ने की सुख-समृद्धि की कामना

सृष्टि के पालनहार श्रीहरि भगवान विष्णु देवउठनी एकादशी पर चार महीने की अपनी योगनिद्रा से जाग गए.

सनातन के सबसे बड़े व्रतों में यह व्रत भक्तों ने पूरी निष्ठा के साथ उनकी आराधना करने के साथ व्रत किया.

स्नान के साथ ब्राह्मणों व भिक्षुकों में चावल, दाल सहित अन्य चीजों का दान किया.

देवउठनी की शाम मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर द्वार पर ही खड़े होकर मन ही मन कनकधारा स्त्रोत का पाठ किया.

कनकधारा स्त्रोत के पठन और श्रवण दोनों से दरिद्रता दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि की कामना की.

भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप संग तुलसी विवाह विधि-विधान के साथ किया गया.