ये सर्विस चालू करो, नहीं तो ₹100 का फाइन भरो , PhonePe का नया नियम

PhonePe Wallet Charges : देश के सबसे बड़े यूपीआई (UPI) प्लेटफॉर्म PhonePe ने अपने करोड़ों यूजर्स के लिए एक चौंकाने वाला नियम लागू किया है. अगर आपका PhonePe वॉलेट पिछले 12 महीनों से इनएक्टिव यानी बंद पड़ा है, तो कंपनी आपसे हर तीन महीने में ₹100 का चार्ज वसूलेगी. कई यूजर्स को इसके मैसेज मिलने भी शुरू हो गए हैं. आइए जानते हैं कि इस अतिरिक्त चार्ज से आप अपने पैसे कैसे बचा सकते हैं.

PhonePe Wallet Charges : क्या आप भी अपने दैनिक लेन-देन के लिए PhonePe ऐप का इस्तेमाल करते हैं? अगर हां, तो यह खबर सीधे आपकी जेब पर असर डालने वाली है. देश के यूपीआई मार्केट में लगभग 46.5 फीसदी की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वाला PhonePe अब अपने यूजर्स से एक नया चार्ज वसूलने की तैयारी में है.

कंपनी की तरफ से कई यूजर्स को मोबाइल पर मैसेज भेजे जा रहे हैं, जिसमें चेतावनी दी गई है कि यदि उनका PhonePe वॉलेट पिछले 12 महीनों (1 साल) से इनएक्टिव पड़ा हुआ है, तो उसे तुरंत एक्टिव कर लें. ऐसा न करने पर हर तीन महीने में 100 रुपये की पेनल्टी (फीस) देनी होगी. आम तौर पर लोग सीधे बैंक अकाउंट से यूपीआई (UPI) पेमेंट करते हैं और वॉलेट का इस्तेमाल न के बराबर होता है, ऐसे में यह नियम करोड़ों यूजर्स को झटका देने वाला है.

क्या होता है PhonePe वॉलेट और इसका काम क्या है?

जब आप पहली बार अपने मोबाइल में PhonePe ऐप डाउनलोड करते हैं, तो वॉलेट की सर्विस इसके साथ ही इन-बिल्ट (नत्थी होकर) आती है. यूजर इस वॉलेट को अपने बैंक खाते से रीचार्ज करके इसमें पैसे रख सकते हैं. वॉलेट का एकमात्र बड़ा फायदा यह है कि यह ऑफलाइन या कम नेटवर्क में भी काम कर जाता है.

अगर कभी आपके बैंक का सर्वर डाउन है और आप सीधे अकाउंट से पैसे नहीं भेज पा रहे हैं, तो वॉलेट में मौजूद पैसों से तुरंत भुगतान किया जा सकता है. आज के समय में शायद ही कोई वॉलेट में पैसे रखता है. अगर एक ऐप का यूपीआई काम नहीं करता, तो लोग तुरंत गूगल पे (Google Pay) या पेटीएम (Paytm) जैसे दूसरे ऐप का इस्तेमाल कर लेते हैं. इसलिए आम जनता के लिए यह वॉलेट लगभग बेकार ही पड़ा रहता है.

क्या PhonePe का ऐसा चार्ज वसूलना कानूनी है?

कई यूजर्स के मन में यह सवाल है कि बिना इस्तेमाल किए पैसे काटना क्या बेईमानी नहीं है? लेकिन तकनीकी और कानूनी रूप से कंपनी ऐसा कर सकती है. जब हम पहली बार ऐप पर साइन-अप या लॉगिन करते हैं, तो हम बिना पढ़े ‘नियम और शर्तों’ (Terms and Conditions) को स्वीकार (Accept) कर लेते हैं. कंपनी इसी कानूनी दांवपेच का फायदा उठा रही है. हालांकि, आम उपभोक्ताओं के नजरिए से देखा जाए तो इसे एक तरह की ‘जबरदस्ती’ ही कहा जाएगा.

वॉलेट चार्ज से अपने ₹100 कैसे बचाएं ?

अगर आप इस गैर-जरूरी चार्ज से बचना चाहते हैं, तो आपके पास दो आसान रास्ते हैं.

अपने PhonePe वॉलेट में ₹10 या ₹50 डालकर उसे दोबारा एक्टिवेट कर लें और कभी-कभी उससे कोई छोटा-मोटा भुगतान कर दें. इससे आपका वॉलेट इनएक्टिव लिस्ट से बाहर हो जाएगा.

यदि आप इस वॉलेट झंझट को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं, तो ऐप के भीतर जाकर अपने वॉलेट की फुल केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करें. इसके बाद आप वॉलेट को पूरी तरह बंद या हमेशा के लिए इनएक्टिवेट करने का विकल्प चुन सकते हैं.

ध्यान रहे कि इस वॉलेट चार्ज का आपकी सामान्य यूपीआई (UPI) सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा. यदि आप वॉलेट एक्टिव नहीं भी करते हैं, तो भी आप पहले की तरह बैंक-टू-बैंक यूपीआई ट्रांसफर (Scan & Pay) करते रह सकेंगे.

आखिर PhonePe ऐसा कर क्यों रहा है?

बाजार के जानकारों का मानना है कि कंपनी यह कदम अपनी बैलेंस शीट को मजबूत और दमदार दिखाने के लिए उठा रही है. दरअसल, PhonePe आने वाले समय में अपना आईपीओ (IPO) लाने यानी शेयर मार्केट में लिस्ट होने की तैयारी कर रहा है.

अगर कंपनी के पास 70 करोड़ रजिस्टर्ड यूजर्स हैं और उनमें से आधे यानी 35 करोड़ यूजर्स से भी हर तीन महीने में ₹100 की वसूली होती है, तो यह आंकड़ा अरबों रुपये में पहुंच जाता है. इसी वजह से सोशल मीडिया पर लोग कंपनी को खूब खरी-खोटी सुना रहे हैं. फिलहाल इस विवाद और यूजर्स के गुस्से पर कंपनी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.

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लेखक के बारे में

Published by: Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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