Pope Election: कौन होगा अगला पोप, दावेदारों में इनका नाम सबसे आगे

Pope Election: पोप फ्रांसिस के निधन के बाद नये पोप की तलाश शुरू हो गई है. इस पद के लिए कई कार्डिनल के नाम सामने आ रहे हैं. पोप के चुनाव के लिए कई प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है. बपतिस्मा प्रक्रिया से गुजरा कोई भी कैथोलिक पुरुष पोप बनने के लिए पात्र होता है. पोप उस व्यक्ति को चुना जाता है जिसे कार्डिनल के कम से कम दो-तिहाई वोट प्राप्त होते हैं.

Pope Election: पोप के चयन की प्रक्रिया बहुत पवित्र और गोपनीय होती है और यह कोई लोकप्रियता की प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह चर्च द्वारा ईश्वरीय प्रेरणा से किया गया चयन होता है. फिर भी, हमेशा अग्रणी उम्मीदवार होते हैं, जिन्हें पापाबिले के नाम से जाना जाता है, जिनमें कुछ ऐसे गुण होते हैं जो पोप बनने के लिए आवश्यक माने जाते हैं. बहुत कुछ वैसे ही जैसे पिछले वर्ष की ऑस्कर-नामांकित फिल्म कॉन्क्लेव में दर्शाये गए थे.

पोप के लिए कुछ संभावित उम्मीदवार

कार्डिनल पीटर एर्दो

बुडापेस्ट के आर्कबिशप और हंगरी के प्राइमेट 72 वर्षीय पीटर एर्दो अगले पोप की रेस में आगे चल रहे हैं. एर्दो को 2005 और 2011 में दो बार काउंसिल ऑफ यूरोपीयन एपिस्कोपल कॉन्फ्रेंस का प्रमुख चुना गया था. उन्हें यूरोपीय कार्डिनल की मान्यता प्राप्त है. इस पद पर रहते हुए एर्दो का कई अफ्रीकी कार्डिनल से परिचय हुआ है. क्योंकि काउंसिल अफ्रीकी बिशप कान्फ्रेंस के साथ नियमित सत्र आयोजित करती है.

कार्डिनल रेनहार्ड मार्क्स

कार्डिनल रेनहार्ड मार्क्स (71) भी पोप की रेस में आगे चल रहे हैं. मार्क्स म्यूनिख और फ्रीजिग के आर्कबिशप हैं. उन्हें फ्रांसिस ने 2013 में एक प्रमुख सलाहकार चुना था. बाद में मार्क्स को सुधारों के दौरान वेटिकन के वित्त की देखरेख करने वाली परिषद का प्रमुख नियुक्त किया गया.

कार्डिनल मार्क ओउलेट

कनाडा के 80 वर्षीय मार्क ओउलेट भी पोप पद की रेस में आगे चल रहे हैं. ओउलेट ने एक दशक से अधिक समय तक वेटिकन के प्रभावशाली बिशप कार्यालय का नेतृत्व किया. ओउलेट को फ्रांसिस की तुलना में अधिक रूढ़िवादी माना जाता है. लातिन अमेरिकी चर्च के साथ उनके अच्छे संपर्क हैं.

कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन

इटली के 70 वर्षीय पिएत्रो पारोलिन को कैथोलिक पदानुक्रम में उनकी प्रमुखता को देखते हुए पोप बनने के प्रमुख दावेदारों में से एक माना जाता है. पारोलिन लातिन अमेरिकी चर्च को अच्छी तरह से जानते हैं. हालांकि उनके पास कोई वास्तविक पादरी अनुभव नहीं है.

कार्डिनल रॉबर्ट प्रीवोस्ट

शिकागो में जन्मे 69 वर्षीय प्रीवोस्ट ऐसे पहले पोप हो सकते हैं. उनके पास पेरू का व्यापक अनुभव है, पहले एक मिशनरी के रूप में और बाद में एक आर्कबिशप के रूप में. फ्रांसिस की उन पर वर्षों से नजर थी और उन्होंने 2014 में उन्हें पेरू के चिकलायो डायोसिस का कार्यभार संभालने के लिए भेजा था. वह 2023 तक उस पद पर रहे, फिर फ्रांसिस ने उन्हें रोम बुला लिया.

कार्डिनल रॉबर्ट सारा

गिनी के 79 वर्षीय सारा, वेटिकन के लिटर्जी कार्यालय के सेवानिवृत्त प्रमुख हैं. उन्हें लंबे समय से एक अफ्रीकी पोप के लिए सबसे अच्छी उम्मीद माना जाता था. वह रूढ़िवादियों के प्रिय हैं.

कार्डिनल लुइस टैगले

फिलीपीन के 67 वर्षीय टैगले पहले एशियाई पोप हो सकते हैं. फ्रांसिस मनीला के लोकप्रिय आर्कबिशप को वेटिकन के ईसाई धर्म प्रचार कार्यालय का नेतृत्व करने के लिए रोम लाए थे, जो एशिया और अफ्रीका के अधिकांश हिस्सों में कैथोलिक चर्च की जरूरतों का ध्यान रखता है.

कार्डिनल माटेओ जुप्पी

माटेओ जुप्पी (69), बोलोग्ना के आर्कबिशप और इतालवी बिशप कान्फ्रेंस के अध्यक्ष हैं. उन्हें 2022 में चुना गया था.

नोट – भाषा इनपुट के साथ

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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