Cluster Bombs: 5 मार्च को मध्य इजरायल के आसमान में कई जलते हुए प्रोजेक्टाइल दिखाई दिए. यह कोई आम हमला नहीं था. इजरायल का दावा है कि यह बॉम्बलेट थे. इनमें से एक मध्य इजरायल के अजोर शहर में एक घर पर गिरा, जिससे संपत्ति को नुकसान पहुंचा. इजरायली विश्लेषकों का कहना है कि यह दृश्य क्लस्टर हथियारों के इस्तेमाल से मेल खाता है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है. इसके बावजूद इजरायल का कहना है कि ईरानी मिसाइल हमलों के दौरान क्लस्टर हथियारों का ही उपयोग किया गया. घटना के बाद इजरायल के होम फ्रंट कमांड ने नागरिकों को चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों के बाद जमीन पर पड़े किसी भी संदिग्ध या बिना फटे उपकरण के पास न जाएं और तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को इसकी जानकारी दें.
इजरायली सेना का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने इन हथियारों का कई बार उपयोग किया गया है. उनके अनुसार, अगर इन्हें आबादी वाले इलाकों की ओर दागा गया है तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का संभावित उल्लंघन हो सकता है. न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, सेना के प्रवक्ता नादेव शोशानी ने कहा कि अगर ऐसे हथियार नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाते हैं तो इसे युद्ध अपराध माना जा सकता है.
क्लस्टर बम क्या होते हैं?
क्लस्टर बम ऐसे हथियार होते हैं, जो एक बड़े विस्फोट की जगह हवा में फटकर कई छोटे-छोटे विस्फोटक उपकरण फैला देते हैं. इन्हें सबम्यूनिशन या बॉम्बलेट कहा जाता है. क्लस्टर हथियार का वारहेड हवा में खुल जाता है और दर्जनों छोटे विस्फोटक उपकरण बड़े इलाके में फैल जाते हैं, जो जमीन से टकराते ही फट सकते हैं. सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक इनका उद्देश्य युद्ध के मैदान में फैले वाहनों, सैन्य उपकरणों या सैनिकों को एक साथ बड़े क्षेत्र को निशाना बनाना होता है. कई बार ये सैन्य और नागरिक लक्ष्यों के बीच अंतर नहीं कर पाते.
हवा में फटकर फैलते और युद्ध के तरीके को बदल देते हैं
इजरायली डिफेंस फोर्स के अनुसार ऐसी मिसाइलों का वारहेड नीचे आते समय हवा में खुल जाता है और लगभग आठ किलोमीटर के दायरे में करीब 20 छोटे विस्फोटक उपकरण फैला देता है. इनमें से प्रत्येक में लगभग 2.5 किलोग्राम विस्फोटक हो सकता है, जो जमीन से टकराने पर विस्फोट करता है. इस वजह से एक ही मिसाइल कई छोटे धमाकों में बदलकर बड़े इलाके को प्रभावित कर सकती है.
सामान्य मिसाइलों के विपरीत, जो एक ही स्थान पर बड़े विस्फोट के साथ फटती हैं, क्लस्टर हथियार हवा में खुलकर दर्जनों छोटे बॉम्बलेट अलग-अलग दिशाओं में बिखेर देते हैं. सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इससे युद्ध की प्रकृति बदल जाती है, क्योंकि एक स्थान पर विस्फोट होने की बजाय कई जगहों पर छोटे-छोटे धमाके होते हैं. इसके कारण नागरिकों के हताहत होने का खतरा बढ़ जाता है और बुनियादी ढांचे को भी ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है.
इजरायली अधिकारियों के अनुसार ईरान द्वारा दागी गई एक मिसाइल में सामान्य विस्फोटक की जगह क्लस्टर वारहेड लगाया गया था. सेना के मुताबिक वारहेड जमीन से लगभग सात किलोमीटर की ऊंचाई पर फटा, जिसके बाद करीब आठ किलोमीटर के क्षेत्र में लगभग 20 छोटे बॉम्बलेट गिर गए.
इजरायली विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान को इन मिसाइलों के विकास में बाहरी सहायता मिली होगी. कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि सैन्य तकनीक के हस्तांतरण में रूस या चीन की भूमिका हो सकती है. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता.
हमले की वजह से घर को पहुंचा नुकसान
बिना फटे बॉम्बलेट का खतरा
इन हथियारों को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि कई बार इनके सभी बॉम्बलेट तुरंत नहीं फटते और कुछ जमीन पर पड़े रह जाते हैं. ये छिपे हुए लैंडमाइन की तरह लंबे समय तक खतरनाक बने रह सकते हैं. ऐसे बिना फटे विस्फोटक लंबे समय तक खतरनाक बने रहते हैं और बाद में आम लोगों के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं, क्योंकि कोई व्यक्ति अनजाने में इन्हें छू सकता है और विस्फोट हो सकता है. युद्ध समाप्त होने के कई साल बाद भी ये नागरिकों और राहतकर्मियों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं. यही कारण है कि मानवाधिकार संगठन लंबे समय से इन हथियारों के इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताते रहे हैं.
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मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए चुनौती क्लस्टर वारहेड, कैसे बढ़ाते हैं मुश्किल?
क्लस्टर हथियार मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए भी जटिल स्थिति पैदा कर देते हैं. उदाहरण के तौर पर आयरन डोम जैसी प्रणाली आमतौर पर एक आने वाले रॉकेट या प्रोजेक्टाइल को ट्रैक करने के लिए बनाई गई है. अगर, उसी रॉकेट में क्लस्टर वारहेड लगा हो, तो उड़ान के अधिकांश समय तक वह एक ही लक्ष्य की तरह दिखाई देता है.
आयरन डोम का टामीर इंटरसेप्टर प्रॉक्सिमिटी फ्यूज का इस्तेमाल करता है, जो लक्ष्य के पास पहुंचते ही विस्फोट कर मिसाइल को छर्रों से नष्ट करने की कोशिश करता है. अगर मिसाइल को समय रहते रोक लिया जाए, तो उसके भीतर मौजूद क्लस्टर सबम्यूनिशन हवा में ही नष्ट हो सकते हैं. इससे उनके जमीन पर गिरने और फैलने की संभावना कम हो जाती है.
हालांकि क्लस्टर वारहेड मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए चुनौती बढ़ा देते हैं, क्योंकि एक बार छोटे बॉम्बलेट बड़े क्षेत्र में फैल जाएं तो उन्हें अलग-अलग ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में रक्षा प्रणालियों को एक साथ कई गिरते हुए विस्फोटकों को रोकने की कोशिश करनी पड़ती है. इससे कुछ बॉम्बलेट के बच निकलने की संभावना बढ़ जाती है.
क्लस्टर हथियारों पर अंतरराष्ट्रीय विवाद और समाधान
मानवाधिकार संगठनों और पिछली जांच रिपोर्टों के अनुसार क्षेत्रीय संघर्षों के दौरान पहले भी इजरायल और ईरान दोनों पर क्लस्टर हथियारों के इस्तेमाल के आरोप लग चुके हैं. क्लस्टर हथियारों को लेकर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद रहा है क्योंकि ये युद्ध के दौरान और उसके बाद भी नागरिकों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं.
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क्लस्टर हथियारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने नियम भी बनाए हैं. 2008 में हुई कन्वेंशन ऑन क्लस्टर म्यूनिशंस (Convention on Cluster Munitions) संधि 2010 में लागू हुई, जिसके तहत ऐसे हथियारों के इस्तेमाल, विकास, उत्पादन, भंडारण और हस्तांतरण पर प्रतिबंध लगाया गया है. अब तक 111 देशों और 12 अन्य इकाइयों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. हालांकि कई बड़े सैन्य देश, जैसे- ईरान, इजरायल, अमेरिका और रूस इस संधि का हिस्सा नहीं हैं.
