US Preparing Iran Ground Attack: मिडिल ईस्ट में तनाव अब चरम पर पहुंच गया है. रॉयटर्स और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ईरान के अंदर जमीनी कार्रवाई (ग्राउंड ऑपरेशन) करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. इस रणनीति में होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के तट को सुरक्षित करना, खार्क द्वीप पर कब्जा करना और तेहरान के संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार को वापस लाना शामिल हो सकता है.
छुट्टियां रद्द कर मिशन पर निकले 8000 अमेरिकी जवान
न्यूजमैक्स ने चार अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिका ने करीब 8,000 सैनिकों की तैनाती को तेज कर दिया है. इसके लिए वेस्ट कोस्ट से ‘यूएसएस बॉक्सर (युद्धपोत) एम्फीबियस रेडी ग्रुप’ और ’11वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट’ को तय समय से पहले रवाना किया गया है. हालत यह है कि मिशन की गंभीरता को देखते हुए सैनिकों और नौसैनिकों की छुट्टियां बीच में ही रद्द कर दी गईं ताकि वे जल्द से जल्द युद्ध क्षेत्र में पहुंच सकें.
समुद्र में अमेरिका की अब तक की सबसे बड़ी घेराबंदी
इस नई तैनाती के बाद मिडिल ईस्ट में अमेरिका की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी. यूएसएस बॉक्सर, यूएसएस पोर्टलैंड और यूएसएस कॉमस्टॉक जैसे जहाजों पर करीब 4,000 सैनिक सवार हैं. जब ये जहाज पहले से ही रास्ते में मौजूद ‘यूएसएस त्रिपोली’ ग्रुप से मिलेंगे, तो कुल 6 एम्फीबियस जहाजों के साथ करीब 8,000 जवान तैनात हो जाएंगे. एक्सपर्ट्स का मानना है कि खाड़ी युद्ध के बाद यह क्षेत्र में अमेरिका की सबसे बड़ी नौसैनिक तैनाती है.
3 जंगी जहाज पहले से ही वहां मौजूद हैं
एनबीसी न्यूज के अनुसार, यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड (लाल सागर), यूएसएस अब्राहम लिंकन (अरब सागर) और यूएसएस हैरी एस. ट्रुमन (पूर्वी भूमध्य सागर) पहले से ही वहां मौजूद हैं. इनके साथ 200 से ज्यादा लड़ाकू विमान और करीब 20,000 नौसैनिक तैनात हैं. इसके अलावा अगले कुछ दिनों में यूएसएस न्यू ऑरलियन्स क्रूजर और जापान स्थित यूएसएस रशमोर भी इस ग्रुप में शामिल हो जाएंगे. ये जहाज जमीन पर हमला करने और दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही तबाह करने में माहिर हैं.
जंग को लेकर ट्रंप प्रशासन का नया रुख
शुरुआत में ट्रंप प्रशासन का मानना था कि ईरान को बहुत आसानी से हरा दिया जाएगा, लेकिन अब भारी संख्या में जहाजों और जवानों की तैनाती बताती है कि अमेरिका लंबी लड़ाई के लिए खुद को तैयार कर रहा है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम ईरान के साथ संभावित युद्ध की स्थिति में अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए उठाया गया है. अमेरिका अब हवा, समुद्र और जमीन तीनों मोर्चों पर पूरी तरह तैयार रहने का संकेत दे रहा है.
ये भी पढ़ें: स्मार्टवॉच से लीक हुई फ्रांस के जंगी जहाज की लोकेशन, रडार पर आया ‘चार्ल्स डी गॉल’, टेंशन में नेवी!
ईरान-इजरायल युद्ध में अब तक 1300 की मौत
यह पूरा बवाल 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया था. इस हमले में अब तक करीब 1,300 लोगों की जान जा चुकी है, जिसमें तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल थे. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल, जॉर्डन, इराक और उन खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं. इस जंग से न केवल जान-माल का नुकसान हुआ है, बल्कि ग्लोबल मार्केट और फ्लाइट्स पर भी बुरा असर पड़ा है.
ये भी पढ़ें: ट्रंप की ‘धमकी’ के बाद होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने आगे आए 6 बड़े देश, ईरान को दी चेतावनी, क्या करेंगे?
