US-Iran Talks Fail: जेडी वेंस ने बातचीत टूटने के बाद कहा कि ईरान को जो शर्तें दी गई थीं, उन्हें उसने स्वीकार नहीं किया है. वेंस के अनुसार, अमेरिका ने अपनी ‘रेड लाइन्स’ (सीमाएं) पहले ही साफ कर दी थीं. उन्होंने बताया कि वॉशिंगटन ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि वे किन मुद्दों पर लचीला रुख अपना सकते हैं और किन बातों पर कोई समझौता नहीं करेंगे.
21 घंटे चली बातचीत
इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में करीब 21 घंटे से ज्यादा समय तक चर्चा हुई, लेकिन डेडलॉक (गतिरोध) खत्म नहीं हुआ. जेडी वेंस के अनुसार, बातचीत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को दोबारा खोलने जैसे कई बड़े मुद्दों पर गतिरोध पैदा हो गया. वेंस ने कहा कि ऐसी स्थिति बन ही नहीं पाई जहां ईरानी पक्ष अमेरिका की शर्तों को मानने के लिए तैयार हो. अमेरिका ने अपना पक्ष पूरी तरह साफ रखा था, लेकिन ईरान ने उन शर्तों को स्वीकार नहीं किया.
न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अमेरिका सख्त
विवाद के केंद्र में ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम (परमाणु कार्यक्रम) है. अमेरिका और इजरायल इस युद्ध के दौरान ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना भी बना चुके हैं. जेडी वेंस ने जोर देकर कहा कि अमेरिका को ईरान से एक ठोस और स्थायी वादा चाहिए कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ईरान लंबी अवधि के लिए परमाणु हथियार न बनाने की इच्छाशक्ति दिखाएगा? फिलहाल अमेरिका को ऐसा कोई भरोसा नहीं मिला है.
ईरान को दिया गया आखिरी मौका
जेडी वेंस ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि अमेरिका ने अपना “सबसे बेहतर और आखिरी प्रस्ताव” ईरान के सामने रख दिया है. अब सब कुछ ईरान के फैसले पर निर्भर करता है. वेंस ने कहा कि बातचीत का टूटना अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है. हालांकि, अमेरिका ने अभी भी ईरान को इस आखिरी प्रस्ताव पर जवाब देने के लिए समय दिया है. वॉशिंगटन ने पहले ही इजरायल के साथ मिलकर हमलों पर दो हफ्ते की रोक लगाई थी ताकि कूटनीति को मौका मिल सके. जेडी वेंस ने कहा कि भले ही अभी कोई डील नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच कई गंभीर चर्चाएं हुई हैं जो एक सकारात्मक संकेत है.
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