US Military Sales Middle East: अमेरिका ने ईरान युद्ध के साथ साथ अपना व्यापार भी बढ़ा लिया है. उसने इस संघर्ष के दौरान ही पश्चिम एशिया के अपने प्रमुख सहयोगियों को 8.6 अरब डॉलर से अधिक के सैन्य उपकरणों की बिक्री को मंजूरी दे दी है. हथियार खरीदने वाले देशों में इजरायल, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) शामिल हैं.
अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार को इन हथियारों की बिक्री की घोषणा की. यह सहमति ऐसे समय में आई है, जब ईरान से जुड़े लंबे संघर्ष के कारण मिडिल ईस्टा का क्षेत्रीय तनाव हाई लेवल पर बना हुआ है. अमेरिका के इन सहयोगियों के ऊपर ईरान ने काफी हमले किए थे. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ युद्ध-जैसा हमला किया, जिसके बाद से हालात बिगड़े हुए हैं.
अस्थायी शांति काल में जंग की तैयारी कर रहा मिडिल ईस्ट
अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ युद्ध नौवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. हालांकि, 8 अप्रैल के बाद से एक नाजुक युद्धविराम लागू हुआ, जिसे तीन हफ्तों से अधिक समय बीत चुका है. लेकिन, यह संघर्ष कब फिर से शुरू हो जाए, कहा नहीं जा सकता. ऐसे में अस्थायी शांति काल में अमेरिका के सहयोगी देश खुद को तैयार कर रहे हैं. चूंकि ईरान और अमेरिका के बीच अब भी स्थायी शांति वाला समझौता नहीं हो पाया है, ऐसे में ये देश खुद को फिर से तैयार करना चाहते हैं.
इससे अमेरिका को भी फायदा हो रहा है और इजरायल, कतर, कुवैत और यूएई को भी राहत मिल रहा है. हालांकि, अमेरिका को एक तरह का दोहरा फायदा हो रहा है, जहां अपने हमलों से उसने दुश्मन ईरान को कमजोर किया, वहीं दूसरी ओर असुरक्षित महसूस करने सहयोगी देशों को हथियार भी बेच दिए. क्योंकि हथियारों का बाजार डर के बाद ही शुरू होता है.
कैसै फैला इन देशों में डर?
ईरान के हमलों में इन सभी देशों की रक्षा प्रणाली की कमजोरी साफ तौर पर उजागर हुई. डिफेंस सिस्टम ईरान के कुछ मिसाइल और ड्रोन हमलों को इंटरसेप्ट करने में नाकाम रहे. इसकी वजह से सैन्य ठिकाने, प्रमुख ऊर्जा प्रतिष्ठान और यहां तक कि सिविल एरिया में भी हमला हुआ. इन सभी के पास अमेरिका के थाड या पैट्रियट मिसाइल डिफेंस प्रणालियों का उपयोग किया, लेकिन यह सिस्टम सभी हमले को रोकने में नाकाम रहे. इसके साथ ही ईरान के स्वार्म अटैक (कीड़ों के झुंड की तरह होने वाले हमले) की वजह से इन देशों का स्टॉक भी खाली हुआ.
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ईरान में अमेरिकी कार्रवाई से खुश ट्रंप
इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अमेरिका का विरोध करने वालों को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि जो लोग यह दावा करते हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध नहीं जीत रहा है, वह ‘देशद्रोह’ के समान है. हालांकि, ट्रंप प्रशासन पहले ही कांग्रेस को बता चुका था कि शत्रुता समाप्त हो चुकी है. ट्रंप ने जनवरी में वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का भी जिक्र किया और इसे ‘इतिहास की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाइयों में से एक’ बताया, साथ ही इसकी तुलना ईरान के साथ मौजूदा संघर्ष से की.
ट्रंप ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए यह सैन्य कार्रवाई की गई थी, ताकि इजरायल और खाड़ी क्षेत्र को संभावित खतरे से बचाया जा सके. उन्होंने कहा कि बी-2 बॉम्बर्स के जरिए उन्हें रोक दिया गया. अगर हमने ऐसा नहीं किया होता, तो उनके पास परमाणु हथियार होता और इजरायल, मिडिल ईस्ट और यूरोप तबाह हो जाते.’
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ट्रंप का दावा- ईरान में सब बर्बाद हो चुका है
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता काफी हद तक कमजोर हो चुकी है और उसके नेतृत्व को भी नुकसान पहुंचा है. उनके पास नौसेना नहीं है, वायुसेना नहीं है, एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम नहीं है, रडार नहीं है और उनके नेता भी नहीं बचे हैं.
