क्या सऊदी अरब के इशारे पर ईरान से जंग लड़ रहे ट्रंप? क्राउन प्रिंस की प्लानिंग ने चौंकाया

Saudi Arabia: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के बीच बढ़ती नजदीकियों ने दुनिया को हैरान कर दिया है. द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रिंस सलमान लगातार ट्रंप के संपर्क में हैं और वह चाहते हैं कि अमेरिका, ईरान पर तब तक सैन्य दबाव बनाए रखे जब तक वहां की सत्ता पलट न जाए.

Saudi Arabia: यह खबर ऐसे समय में आई है जब ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले रोकने का संकेत दिया है और एक खास 15 पॉइंट्स वाला शांति योजना का मसौदा तैयार किया है.

शांति की कोशिशों के बीच हमले की तैयारी

हाल ही में ट्रंप ने संकेत दिए थे कि वह ईरान के न्यूक्लियर और एनर्जी ठिकानों पर हमले रोक सकते हैं और पांच दिनों के ब्रेक का भी एलान किया था. वहीं इजरायल के ‘चैनल 12’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने ईरान के सामने युद्ध खत्म करने के लिए 15 शर्तें रखी हैं. वाशिंगटन ने इस बारे में यरूशलेम (इजरायल) को भी बता दिया है. हालांकि, इजरायल को डर है कि ट्रंप इन शर्तों को सख्ती से लागू करने के बजाय सिर्फ एक समझौता करके युद्ध रोकना चाहते हैं. 

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर और खास दूत स्टीव विटकॉफ ने एक महीने के सीजफायर का प्लान बनाया है, जिसमें 15 मुद्दों पर समझौता होना है. इससे लगा था कि शायद बातचीत से रास्ता निकलेगा, लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स की मानें तो सऊदी अरब अंदर ही अंदर अमेरिका को और ज्यादा आक्रामक होने के लिए उकसा रहा है. सऊदी चाहता है कि अमेरिका सिर्फ हवाई हमले न करे, बल्कि ईरान के अंदर घुसकर जमीनी कार्रवाई भी शुरू कर दे.

ईरान के खार्ग आइलैंड पर सऊदी की नजर

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चर्चा के दौरान ईरान के ‘खार्ग आइलैंड’ को निशाना बनाने की बात उठी है, जो ईरान के तेल एक्सपोर्ट का सबसे बड़ा सेंटर है. अगर ऐसा होता है, तो यह जंग बहुत बड़े लेवल पर पहुंच जाएगी. हालांकि, सऊदी अरब ने इन बातों को पूरी तरह गलत बताया है. सऊदी अधिकारियों का कहना है कि वे शांति चाहते हैं और उनका मकसद सिर्फ अपने देश को ईरानी हमलों से बचाना है.

सऊदी अरब आखिर जंग क्यों बढ़ाना चाहता है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि सऊदी अरब को डर है कि अगर जंग अभी रुक गई, तो ईरान फिर से मजबूत होकर उभरेगा. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, MBS इस जंग को एक बड़े मौके की तरह देख रहे हैं जिससे मिडिल ईस्ट का पूरा नक्शा बदला जा सके. उनका मानना है कि ईरान के कमजोर होने से इस इलाके में सऊदी अरब का दबदबा बढ़ जाएगा और ईरान की मदद से चल रहे विद्रोही गुटों का खात्मा हो जाएगा.

ये भी पढ़ें: ईरान के विदेश मंत्री की दो टूक: जब तक दुश्मन को पछतावा नहीं होगा, तब तक जारी रहेगी जंग

क्या ट्रंप पर भारी पड़ रहा है सऊदी का प्रभाव?

मिंट की एक रिपोर्ट कहती है कि सऊदी अरब और इजरायल जंग शुरू होने से पहले ही वाशिंगटन में लॉबिंग कर रहे थे. भले ही ट्रंप सार्वजनिक रूप से रुकने की बात कर रहे हों, लेकिन वह MBS को ‘वॉरियर’ और एक खास पार्टनर मानते हैं. न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, हाल ही में खाड़ी देशों पर हुए ईरानी हमलों ने सऊदी अरब के रुख को और कड़ा कर दिया है, जिससे वह अब अमेरिकी सैन्य ऑपरेशनों का खुलकर साथ दे रहा है.

जंग लंबी खिंचने से बढ़ेगा बड़ा खतरा

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि अगर ट्रंप सऊदी की बातों में आकर और कड़ा रुख अपनाते हैं, तो यह जंग और लंबी खिंच सकती है. इसका सीधा असर दुनिया भर के तेल बाजार पर पड़ेगा, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रंप अपनी मर्जी से फैसले ले रहे हैं या फिर सऊदी अरब और इजरायल जैसे देशों के दबाव में आकर इस जंग को खतरनाक मोड़ पर ले जा रहे हैं.

ये भी पढ़ें: US रक्षा मंत्री का दावा: इतिहास में पहली बार ईरान की मॉडर्न मिलिट्री का हुआ पूरी तरह सफाया

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >