Trump Claims Iran War Over: ट्रंप ने इस अभियान को बेहद तेज और निर्णायक बताते हुए कहा कि उनके हिसाब से यह पूरा मामला महज दो-तीन दिनों का खेल था. उन्होंने दावा किया कि ईरान की नेवी (नौसेना) को तुरंत खत्म कर दिया गया, जिसके बाद उसकी एयरफोर्स और एयर डिफेंस सिस्टम की धज्जियां उड़ गईं. अब ईरान पूरी तरह से असुरक्षित है. ट्रंप ने जानकारी दी कि अमेरिकी सेना अब बिना किसी डर के ईरान के हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) में ऑपरेट कर रही है.
उन्होंने कहा कि उनके पास अब न रडार है, न एंटी-एयरक्राफ्ट गन, उनके पास अब कुछ नहीं बचा है. ट्रंप के मुताबिक, ईरान अब किसी भी हमले का जवाब देने की स्थिति में नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका चाहे तो ईरान के बिजली सिस्टम जैसे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को सिर्फ एक घंटे में ठप कर सकता है. हालांकि, उन्होंने बताया कि तेल और पाइपलाइनों को इसलिए निशाना नहीं बनाया गया क्योंकि उन्हें दोबारा बनाने में सालों लग जाते.
परमाणु हमले का खतरा टला: ट्रंप
मंगलवार को ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर किए जा रहे इस ऑपरेशन को सफल बताया. उन्होंने कहा कि अगर ईरान को परमाणु हथियार मिल जाते, तो वह 24 घंटे के अंदर उसका इस्तेमाल कर लेता. ट्रंप के अनुसार, B-2 स्पिरिट बॉम्बर्स से किए गए हमले इतने सटीक थे कि मिडिल ईस्ट और यूरोप पर मंडरा रहा न्यूक्लियर वॉर का खतरा अब टल गया है. उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में कहीं भी आतंकी हमले में किसी की जान जाती है या कोई घायल होता है, तो 95% चांस होता है कि उसके पीछे ईरान का ही हाथ है.
ईरान को संभलने में लगेंगे 10 साल
ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान में जो तबाही हुई है, उसे ठीक करने में कम से कम 10 साल का समय लगेगा. वह इस स्थिति को और ज्यादा स्थायी बनाना चाहते हैं ताकि भविष्य में किसी और अमेरिकी राष्ट्रपति को इस समस्या का सामना न करना पड़े. दूसरी ओर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ट्रंप का समर्थन किया. वेंस ने कहा कि ईरान में मौजूद आतंकी समूहों और मिलिशिया ने हमारे बेस और दूतावास पर कई हमले किए हैं. उन्होंने साफ किया कि जहां भी आतंकी मिलेंगे, उन्हें खत्म किया जाएगा.
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5000 पाउंड के बमों से हिलाया ईरान
यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के पास ईरान के जमीनी मिसाइल ठिकानों पर 5,000 पाउंड (लगभग 2,267 किलो) के ‘डीप पेनिट्रेटर’ बमों से हमला किया है. ये बम जमीन के अंदर धंसे हुए मजबूत ठिकानों को तबाह करने के लिए इस्तेमाल किए गए. सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान की ये एंटी-शिप मिसाइलें अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए बड़ा खतरा बनी हुई थीं.
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