Thailand Seizes US Illegal e-Waste: कस्टम डिपार्टमेंट के महानिदेशक फंतोंग लोयसाकुनानोन ने बताया कि डिपार्टमेंट ऑफ स्पेशल इन्वेस्टिगेशन (DSI) ने एक लंबी जांच के बाद इस तस्करी का पर्दाफाश किया. तस्करों ने खतरनाक इलेक्ट्रॉनिक कचरे को हैती से आने वाला ‘स्क्रैप मेटल’ (धातु का कबाड़) बताकर अधिकारियों को चकमा देने की कोशिश की थी.
बेसल एक्शन नेटवर्क (BAN) से मिली खुफिया जानकारी के बाद जब अधिकारियों ने जांच की, तो पता चला कि इसमें प्रोसेस किए गए प्रिंटेड सर्किट बोर्ड का कचरा था, जो बेसल कन्वेंशन के नियमों का सीधा उल्लंघन है. थाई अधिकारी अब भविष्य में ऐसी डंपिंग रोकने के लिए ट्रांजिट में चल रहे 714 अन्य कंटेनरों पर भी कड़ी नजर रख रहे हैं.
अवैध ई-वेस्ट के तीन ग्रुप का रहस्य का हुआ पर्दाफाश
जांच में कुल 18 कंटेनरों को तीन अलग-अलग समूहों में बांटा गया था:
- पहला ग्रुप: इसमें अमेरिका से आए वे 12 कंटेनर शामिल थे जिन्हें हैती का स्क्रैप मेटल बताया गया था, लेकिन इनमें 284 टन खतरनाक सर्किट बोर्ड का कचरा निकला.
- दूसरा ग्रुप: इसमें अमेरिका से आए 4 कंटेनर थे, जिन्हें ‘मिक्स्ड मेटल स्क्रैप’ बताकर जापान और हांगकांग भेजा जा रहा था.
- तीसरा ग्रुप: इसमें अमेरिका और नीदरलैंड से आए 2 कंटेनर शामिल थे.
थाईलैंड में ई-वेस्ट तस्करी का पुराना इतिहास
यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम (UNODC) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 के बाद से थाईलैंड में अवैध ई-वेस्ट का व्यापार तेजी से बढ़ा है. पश्चिमी देशों के डिजिटल कचरे के लिए थाईलैंड एक डंपिंग ग्राउंड बनता जा रहा है.
- मई 2025: ‘ऑपरेशन कैन ओपनर’ के तहत बैंकॉक पोर्ट पर अमेरिका से आए 238 मीट्रिक टन ई-वेस्ट और 10 कंटेनर सर्किट बोर्ड स्क्रैप पकड़े गए थे.
- जनवरी 2025: लाएम चाबांग पोर्ट पर जापान और हांगकांग से आए 256 टन ई-वेस्ट को जब्त किया गया था.
- जुलाई 2018: ‘चाइना इफेक्ट’ के बाद थाईलैंड में प्लास्टिक और ई-वेस्ट के आयात में 80% का उछाल आया था, जिसके बाद सरकार ने कई अवैध रिसाइकिलिंग फैक्ट्रियों पर छापेमारी की थी.
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