कौन हैं तारिक रहमान? 17 साल का वनवास खत्म कर बन सकते हैं बांग्लादेश के PM

Tarique Rahman: बांग्लादेश चुनाव के नतीजों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है. जिस नेता को कभी व्हीलचेयर पर देश छोड़ना पड़ा था, वही तारिक रहमान अब देश की कमान संभालने के लिए तैयार हैं. शेख हसीना की विदाई और मां खालिदा जिया के निधन के बाद, क्या तारिक बदल देंगे बांग्लादेश की किस्मत? भारत के साथ रिश्तों पर क्या होगा असर?

Tarique Rahman: बांग्लादेश के संसदीय चुनाव के जो शुरुआती नतीजे आ रहे हैं, उन्होंने पूरे देश का सियासी माहौल बदल दिया है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की अगुवाई वाला गठबंधन जीत की दहलीज पर खड़ा है. अब तक की अनौपचारिक गिनती के अनुसार, बीएनपी गठबंधन ने 208 सीटों पर बढ़त बना ली है, जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 69 सीटें मिली हैं. वहीं, निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में अभी तक सिर्फ 6 सीटें रही हैं.

मां के निधन के चलते नहीं मनेगा जीत का जश्न

भले ही बीएनपी बहुमत के आंकड़े को पार करती दिख रही है, लेकिन पार्टी के चेयरमैन तारिक रहमान ने फिलहाल जश्न मनाने से मना कर दिया है. डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव से ठीक पहले उनकी मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का इंतकाल हो गया था. तारिक रहमान ने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे जीत के जश्न के बजाय शुक्रवार की नमाज के बाद अपनी दिवंगत मां की रूह की शांति के लिए दुआ करें.

खुद की सीट पर मिली शानदार जीत

तारिक रहमान ने राजनीति में धमाकेदार वापसी की है. जिला रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, उन्होंने बोगुरा-6 (सदर) सीट से अपने करीबी प्रतिद्वंद्वी को बड़े अंतर से हरा दिया है. हालांकि, बांग्लादेश चुनाव आयोग आज (शुक्रवार) शाम तक आधिकारिक घोषणा कर सकता है.

कौन हैं तारिक रहमान?  

तारिक रहमान का जन्म बांग्लादेश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार में हुआ. उनके पिता जियाउर रहमान देश के राष्ट्रपति रहे और मां खालिदा जिया प्रधानमंत्री रहीं. उन्होंने देश-विदेश में पढ़ाई की और धीरे-धीरे अपनी पार्टी में एक बड़े रणनीतिकार के रूप में उभरे. जब उनकी मां सक्रिय राजनीति में थीं, तब भी तारिक को ही पार्टी का असली चेहरा माना जाता था.

17 साल लंदन में बिताए 

तारिक रहमान के लिए सत्ता तक पहुंचने का यह सफर आसान नहीं रहा. भ्रष्टाचार के आरोपों और कानूनी पचड़ों की वजह से वे 17 साल तक लंदन में रहे. साल 2007 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था. खबरों के अनुसार, हिरासत में उन पर काफी सख्ती की गई थी, जिससे उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गई कि 2008 में जब उन्हें इलाज के लिए लंदन जाने की इजाजत मिली, तो उन्हें व्हीलचेयर पर बैठकर विमान तक ले जाना पड़ा था.

दिसंबर 2025 में हुई घर वापसी

साल 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद स्थितियां बदलीं. अदालतों ने उनके खिलाफ पुराने फैसलों को पलट दिया, जिसके बाद दिसंबर 2025 में वे वापस ढाका लौटे. एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने के लिए लाखों की भीड़ उमड़ी थी. वतन लौटने के बाद उन्होंने अपना वोटर रजिस्ट्रेशन कराया और फिर 2026 के इस ऐतिहासिक चुनाव में उतरे.

क्या हैं तारिक के चुनावी वादे?

चुनाव प्रचार के दौरान तारिक रहमान ने देश में बदलाव की बात कही. उन्होंने जनता से कुछ मुख्य वादे किए हैं:

  • भ्रष्टाचार मुक्त शासन: सरकारी संस्थाओं से भ्रष्टाचार खत्म करना और पारदर्शिता लाना.
  • रोजगार और अर्थव्यवस्था: युवाओं के लिए नौकरियां पैदा करना, खेती को बढ़ावा देना और विदेशी निवेश लाना.
  • सुरक्षा और भरोसा: देश में कानून व्यवस्था सुधारना और आम जनता के मन में सुरक्षा का भाव पैदा करना.

भारत के साथ कैसे होंगे रिश्ते?

विशेषज्ञों का मानना है कि तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों की असली परीक्षा होगी. शेख हसीना के दौर में भारत के साथ करीबी रिश्ते थे, लेकिन अब बीएनपी अपने घोषणापत्र में ‘बराबरी और निष्पक्षता’ की बात कह रही है. जानकारों के अनुसार, रहमान भारत के साथ व्यापार और सीमा मुद्दों पर नए सिरे से बातचीत कर सकते हैं. साथ ही, वे चीन और अन्य देशों के साथ भी संतुलन बिठाने की कोशिश करेंगे.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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