Iran War Saudi Arabia: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने सोमवार को ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. सऊदी अरब ने कहा कि अगर ईरान ने अरब देशों पर हमले जारी रखे तो उसे अब तक का ‘सबसे बड़ा नुकसान’ उठाना पड़ सकता है. सऊदी अरब का यह बयान उस नए ड्रोन हमले के बाद आया है, जिसमें कथित तौर पर उसके प्रमुख शयाब ऑयल फील्ड को निशाना बनाया गया. सऊदी अरब ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के उस बयान को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान ने खाड़ी के अरब देशों पर अपने हमले रोक दिए हैं.
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरानी पक्ष ने अपने राष्ट्रपति के बयान पर अमल नहीं किया. सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘देश इस बात की पुष्टि करता है कि ईरानी पक्ष ने इस बयान पर अमल नहीं किया, न तो राष्ट्रपति के भाषण के दौरान और न ही उसके बाद. ईरान ने बिना किसी ठोस वजह के अपना आक्रमण जारी रखा है.’ बयान में कहा गया कि ईरानी हमले का मतलब है, ‘और अधिक तनाव की स्थिति, जिसका वर्तमान और भविष्य में संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा.’
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर वह सऊदी अरब के क्षेत्र या उसके ऊर्जा ढांचे पर हमले जारी रखता है, तो उसे जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, सऊदी अरब ने यह संदेश ईरान के नेतृत्व को उस समय भेजा जब ईरानी राष्ट्रपति मसूज पेजेश्कियान ने पड़ोसी देशों से अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहे संघर्ष के दौरान हुई ईरानी कार्रवाई के लिए माफी मांगी. 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमले के बाद उसने पिछले 10 दिनों में यूएई, कुवैत, कतर, और बहरीन समेत अन्य देशों में भारी ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं.
पेजेशकियन ने क्या कहा था?
अपने संबोधन में पेजेशकियन ने कहा, ‘अस्थायी नेतृत्व परिषद ने घोषणा की है कि पड़ोसी देशों पर अब और हमले नहीं किए जाएंगे और तब तक कोई मिसाइल नहीं दागी जाएगी, जब तक कि उन देशों से ईरान के खिलाफ हमला शुरू न हो.’ उन्होंने कहा, ‘मैं पड़ोसी देशों से माफी मांगता हूं. हमारा किसी भी देश पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है.’
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रिपोर्ट के अनुसार, दो दिन पहले सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के साथ बातचीत की थी और इस दौरान रियाद का रुख स्पष्ट किया था. बातचीत में सऊदी मंत्री ने कहा कि उनका देश तनाव कम करने और ईरान-अमेरिका के बीच विवाद का बातचीत के जरिए समाधान निकालने के प्रयासों का समर्थन करता है.
सऊदी अमेरिकी हमले की मंजूरी देगा!
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न तो सऊदी अरब और न ही अन्य खाड़ी देशों ने अमेरिकी सेना को ईरान के खिलाफ हवाई हमले करने के लिए अपने हवाई क्षेत्र या जमीन का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है. हालांकि, प्रिंस फैसल ने यह चेतावनी भी दी कि अगर ईरान के हमले सऊदी क्षेत्र या उसके ऊर्जा ढांचे पर जारी रहते हैं, तो रियाद अमेरिकी सेना को अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति देने के लिए मजबूर हो सकता है.
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रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल के सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से रियाद अपने राजदूत के माध्यम से तेहरान के साथ लगातार संपर्क में बना हुआ है. हालांकि, रॉयटर्स के अनुसार, इस मामले पर ईरान और सऊदी के मंत्रालयों ने जवाब नहीं दिया. ईरान ने सऊदी अरब में अरामको की रास तनुरा ऑयल फैसेलिटी, शयाब ऑयल फील्ड, अमेरिका के सैन्य बेस, अमेरिकी दूतावासों और अन्य रिहायशी इलाकों पर हमला किया है.
