परमाणु हथियार पर नो-कॉम्प्रोमाइज, शांति के लिए अयातुल्ला से भी हाथ मिलाएंगे ट्रंप

Nuclear Weapon Iran: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईरान को सीधी चेतावनी दी है.रूबियो के अनुसार, परमाणु हथियार पर नो-कॉम्प्रोमाइज होगा, लेकिन शांति के लिए ट्रंप खुद अयातुल्ला खामेनेई से हाथ मिलाने को तैयार हैं.

Nuclear Weapon Iran: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने साफ कर दिया है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा. रूबियो के अनुसार, यह अमेरिका का पुराना स्टैंड है क्योंकि परमाणु शक्ति से लैस ईरान पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है. उन्होंने बताया कि मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना इसलिए तैनात है क्योंकि ईरान ने पहले भी अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है. अमेरिका ने वहां अपनी ताकत बढ़ाने के लिए दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर (युद्धपोत) भी भेज दिया है.

दुश्मन से भी मिलने को तैयार हैं राष्ट्रपति ट्रंप

इतनी सख्ती के बावजूद, रूबियो ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पहला ऑप्शन ‘डिप्लोमेसी’ यानी बातचीत ही है. ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में रूबियो ने बताया कि ट्रंप मानते हैं कि सीधे बात करना समस्याओं को सुलझाने का सबसे अच्छा तरीका है. रूबियो के अनुसार, अगर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मिलना चाहें, तो ट्रंप उनसे मिलने को भी तैयार हैं. उन्होंने साफ किया कि इस मीटिंग का मतलब झुकना नहीं, बल्कि युद्ध को टालने की एक कोशिश होगी. जल्द ही इस सिलसिले में स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ईरान से बातचीत शुरू कर सकते हैं.

चीन से नजदीकी पर सहयोगियों को दी क्लीन चिट

जब रूबियो से पूछा गया कि कनाडा के पीएम मार्क कार्नी, ब्रिटेन के कीर स्टार्मर और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज चीन जा रहे हैं, तो क्या इससे अमेरिका के साथ उनके रिश्ते कमजोर होंगे? इस पर रूबियो ने कहा कि बड़े देशों के बीच बातचीत होना नॉर्मल बात है. उनके अनुसार, खुद ट्रंप भी चीन जाने का प्लान बना रहे हैं और पहले भी शी जिनपिंग से मिल चुके हैं. रूबियो के मुताबिक, बातचीत के रास्ते खुले रखना जरूरी है ताकि फालतू के झगड़ों से बचा जा सके.

यूरोप को याद दिलाई अपनी पुरानी दोस्ती और संस्कृति

म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में रूबियो ने यूरोप के देशों से कहा कि वे अपनी पुरानी जड़ों को याद करें. उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप का इतिहास, ईसाई धर्म, कल्चर और भाषा एक जैसे हैं. उन्होंने माइकल एंजेलो से लेकर ‘रोलिंग स्टोन्स’ बैंड तक का जिक्र करते हुए कहा कि हम एक ही सभ्यता के वारिस हैं. रूबियो के अनुसार, अमेरिका बस यह चाहता है कि उसके साथी देश (यूरोप) मजबूत बनें और अपनी रक्षा के लिए खुद लड़ने को तैयार रहें.

मंदी और माइग्रेशन पर दी चेतावनी

रूबियो ने कड़े शब्दों में कहा कि अमेरिका को यूरोप की गिरावट देखने में कोई दिलचस्पी नहीं है. उन्होंने बढ़ते माइग्रेशन (प्रवास) को समाज की एकता के लिए खतरा बताया. रूबियो के मुताबिक, पिछले कुछ समय में टैरिफ विवाद और ग्रीनलैंड को लेकर ट्रम्प की बातों से रिश्तों में तनाव आया है, लेकिन अमेरिका जो भी आलोचना कर रहा है, वह इसलिए है क्योंकि उसे यूरोप की फिक्र है. उनके अनुसार, अब पुराने गठबंधन के तौर-तरीकों को बदलना होगा.

रूस-यूक्रेन जंग और दुनिया के नेताओं का रिएक्शन

रूस-यूक्रेन युद्ध पर रूबियो ने कहा कि शायद अब पुतिन का लक्ष्य छोटा हो गया है और वे डोनेट्स्क क्षेत्र के बाकी हिस्सों पर कब्जा करना चाहते हैं. रूबियो के भाषण के बाद जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने सुरक्षा के मामले में यूरोप को आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी. वहीं, यूरोपीय आयोग की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि वे रूबियो की बातों से आश्वस्त हैं, लेकिन कुछ पुरानी गलतियों को सुधारना मुश्किल होगा. हालांकि, कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन वोल्फगैंग इशिंगर के अनुसार, रूबियो की बातों से वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली है क्योंकि इसे दुश्मनी के बजाय साझेदारी का संदेश माना जा रहा है.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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