नेपाल बाढ़ त्रासदी: मृतकों की संख्या बढ़कर 1403 पहुंची, 6150 अब भी लापता

नेपाल 26 अगस्त की विनाशकारी भोटे कोसी बाढ़ और भूस्खलन से उबरा भी नहीं था कि भूकंपीय गतिविधियों ने चिंता बढ़ा दी है. इस आपदा में अब तक 1403 लोगों की जान गई है और 6150 लोग अभी भी लापता हैं.

नेपाल अभी 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी भोटे कोसी बाढ़ और भूस्खलन के जख्मों से उबर भी नहीं पाया था कि भूकंपीय गतिविधियों ने चिंता बढ़ा दी है. इस प्राकृतिक आपदा ने हिमालयी देश में बड़े पैमाने पर जनजीवन, सड़क संपर्क और बुनियादी ढांचे को प्रभावित किया है.

बाढ़ और भूस्खलन की दोहरी मार से तबाह हुआ नेपाल

26 अगस्त को भोटे कोसी नदी क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने नेपाल के रासुवा, नुवाकोट, धादिंग समेत कई इलाकों में भारी तबाही मचाई. बाढ़ के साथ बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ, जिससे घरों, सड़कों, पुलों और दूसरी जरूरी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा. नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भी इस आपदा में बुनियादी ढांचे को हुए व्यापक नुकसान की पुष्टि की है.

पुल और सड़कें बर्बाद, कई इलाकों का संपर्क टूटा

बाढ़ और पहाड़ों से मलबा गिरने के कारण कई प्रमुख सड़क मार्ग बाधित हुए. पुलों और सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. कई स्थानों पर प्रशासन को वैकल्पिक रास्ते तैयार करने पड़े हैं. धादिंग के कृष्णभीर इलाके में भी बाढ़ से सड़क को भारी नुकसान हुआ था और बाद में नया ट्रैक तैयार कर यातायात बहाल किया गया.

हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर भी पड़ा असर

भोटे कोसी बाढ़ से नेपाल की कई पनबिजली परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है. कुछ परियोजनाओं के भूमिगत हिस्सों और सुरंगों में मजदूरों के फंसे होने की खबरों के बाद बचाव अभियान चलाया गया. 17 सितंबर को चिलिमे हाइड्रोपावर परियोजना के भूमिगत पावरहाउस से चार शव और मानव अवशेष बरामद किए गए.

रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी

नेपाल की सेना, पुलिस और आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार खोज एवं बचाव अभियान चला रही हैं. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है और हेलीकॉप्टरों के जरिए भी बड़े पैमाने पर रेस्क्यू अभियान चलाया गया है. हालांकि, दुर्गम पहाड़ी इलाकों, मलबे और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण अभियान में लगातार मुश्किलें आ रही हैं.

वैज्ञानिकों ने ग्लेशियर और जलवायु परिवर्तन को लेकर जताई चिंता

हालिया वैज्ञानिक विश्लेषणों में कहा गया है कि 26 अगस्त की आपदा में ग्लेशियर और चट्टानों के खिसकने की भूमिका रही. शोधकर्ताओं ने यह भी बताया है कि बढ़ते तापमान और ग्लेशियरों के कमजोर होने से हिमालयी क्षेत्रों में ऐसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि, वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन को इस आपदा का अकेला कारण नहीं बताया है.

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By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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