इमरान खान ने जेल से किया खेल, मुनीर के खिलाफ खोला मोर्चा, गाजा पीस बोर्ड के खिलाफ केपीके विस में प्रस्ताव पास

Pakistan Gaza Board of Peace: पाकिस्तान में ट्रंप के गाजा बोर्ड ऑफ पीस का विरोध हो रहा है. अब इसके खिलाफ कानूनी रुख भी अख्तियार किया जा रहा है. सोमवार को इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने केपीके विधान सभा में इस बोर्ड में पाकिस्तान को शामिल किए जाने के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया.

Pakistan Gaza Board of Peace: पाकिस्तान में अब गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने के फैसले के खिलाफ सीधा कार्रवाई हो रही है. इसके खिलाफ इमरान खान ने मोर्चा खोला है. सोमवार को खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय विधानसभा ने इसके खिलाफ प्रस्ताव पास किया. इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) 2013 से इस प्रांत में सत्ता में है. 26 जनवरी को हुई बैठक में, स्पीकर बाबर सलीम स्वाती की अध्यक्षता में, खैबर पख्तूनख्वा विधानसभा ने यह प्रस्ताव पास किया. यह प्रस्ताव कानून मंत्री आफताब आलम (पीटीआई) ने पेश किया था और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल) ने इसका समर्थन किया. 

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से बनाए गए ‘बोर्ड ऑफ पीस फॉर गाजा’ में पाकिस्तान के शामिल होने के फैसले के खिलाफ यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 22 जनवरी 2026 को दुनिया के कई नेताओं के साथ इस बोर्ड के चार्टर पर हस्ताक्षर किए थे. इस दौराम आसिम मुनीर भी मौजूद थे. उस समय विपक्षी दल इस फैसले की आलोचना कर रहे थे. यह कार्यक्रम स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान हुआ था. पाकिस्तान को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता ट्रंप की ओर से मिला था, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया.

प्रस्ताव में क्या-क्या कहा गया?

केपीके के विधान सभा में पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया कि इस बोर्ड में शामिल होना पाकिस्तान के पुराने और साफ रुख के खिलाफ है. साथ ही यह फिलिस्तीनी लोगों की इच्छा के भी खिलाफ है. सदन का कहना है कि इससे फिलिस्तीनियों के अपने भविष्य का फैसला खुद करने के अधिकार को नुकसान पहुँच सकता है.

विधानसभा ने यह भी कहा कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के मुताबिक नहीं है, बल्कि इससे इजरायल की कार्रवाइयों को मजबूती मिल सकती है. प्रस्ताव में बोर्ड को एक ऐसा राजनीतिक मंच बताया गया, जो अमेरिका और इजरायल के प्रभाव में काम करता है. सदन ने चेतावनी दी कि इस बोर्ड के तहत बनने वाली छोटी समितियाँ पाकिस्तान के हितों के खिलाफ भी काम कर सकती हैं.

विधानसभा ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह फिलिस्तीन और गाजा के लोगों की आजादी, हक और खुद फैसले लेने के समर्थन में साफ और मजबूत रुख अपनाए. प्रस्ताव में कहा गया कि फिलिस्तीनी जनता के अधिकारों के खिलाफ जाने वाली किसी भी कार्रवाई से परहेज किया जाए. प्रस्ताव में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के रुख की याद दिलाई. इसमें कहा गया कि पाकिस्तान कभी भी इजरायल को मान्यता नहीं देगा और फिलिस्तीन पर इजरायली कब्जे का विरोध जारी रखेगा.

हालांकि, प्रांतीय विधानसभा में विपक्ष के नेता और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के विधायक इबादुल्लाह ने कहा कि उनकी पार्टी, पीपीपीपी और एएनपी ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट नहीं दिया.

अक्टूबर में सहमति के बनने के बाद बनी थी योजना

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बोर्ड का ऐलान गाजा में इजरायल और हमास के बीच हुए युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत किया था. अक्टूबर 2025 में दोनों पक्ष ट्रंप की शांति योजना पर सहमत हुए थे. अमेरिका इस बोर्ड को गाजा और आसपास के इलाकों में शांति लाने वाली नई अंतरराष्ट्रीय पहल के रूप में पेश कर रहा है. साथ ही यह भी चर्चा है कि आगे चलकर यह बोर्ड दुनिया के दूसरे संघर्षों में भी भूमिका निभा सकता है.

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By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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