पुतिन के करीब जाना चाहता था जेफ्री एपस्टीन? सरकारी फाइलों से सामने आई रिश्तों की हकीकत

Jeffrey Epstein Vladimir Putin: जेफरी एपस्टीन और पुतिन के बीच क्या था कनेक्शन? अमेरिकी सरकार की फाइलों से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि एपस्टीन रूस के बड़े अधिकारियों और राष्ट्रपति पुतिन के करीब जाने के लिए छटपटा रहा था. जानिए कैसे उसने जासूसी और इन्वेस्टमेंट के नाम पर रूस में सेंध लगाने की कोशिश की.

Jeffrey Epstein Vladimir Putin: अमेरिकी न्याय विभाग (US Justice Department) द्वारा हाल ही में जारी किए गए दस्तावेजों ने एक बार फिर सनसनी मचा दी है. इन कागजात से पता चला है कि बदनाम अपराधी जेफ्री एपस्टीन सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि रूस के बड़े नेताओं और अधिकारियों के साथ भी अपने कनेक्शन बनाने की पूरी कोशिश कर रहा था.

पुतिन से मिलना चाहता था एपस्टीन

द वाशिंगटन पोस्ट और सीएनएन के अनुसार, एपस्टीन कई सालों तक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने की कोशिश करता रहा. जारी फाइलों में पुतिन का नाम 1,000 से ज्यादा बार आया है. हालांकि, इनमें से ज्यादातर नाम उन न्यूज रिपोर्ट्स में थे जो एपस्टीन को भेजी जाती थीं. साल 2013 में एपस्टीन ने इजराइल के पूर्व प्रधानमंत्री एहुद बराक को एक ईमेल लिखा था, जिसमें उसने पुतिन का जिक्र करते हुए कहा था कि अगर पुतिन मिलना चाहते हैं, तो उन्हें इसके लिए प्राइवेट और अच्छा खासा समय निकालना होगा.

रूसी राजदूत से थी गहरी दोस्ती

दस्तावेज बताते हैं कि एपस्टीन न्यूयॉर्क में रूस के पूर्व राजदूत विटाली चर्किन से अक्सर मिलता रहता था. एपस्टीन ने चर्किन के बेटे, मैक्सिम को न्यूयॉर्क की एक बड़ी वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी में नौकरी दिलाने का ऑफर भी दिया था. साल 2017 में चर्किन की अचानक मौत के बाद, एपस्टीन ने रूस के साथ अपना संपर्क बनाए रखने के लिए नए रास्ते तलाशना शुरू कर दिया.

नार्वे के नेता के जरिए मैसेज भेजने की कोशिश

जून 2018 में एपस्टीन ने नॉर्वे के राजनेता थोरबजर्न जागलैंड (जो उस समय काउंसिल ऑफ यूरोप के सेक्रेटरी जनरल थे) को ईमेल किया. इस ईमेल में उसने लिखा कि जागलैंड को पुतिन को यह सुझाव देना चाहिए कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव मुझसे बात करके जानकारी ले सकते हैं. एपस्टीन ने लिखा था कि चर्किन बहुत अच्छे थे, उन्होंने मेरी बातों के बाद ट्रंप को समझ लिया था. जागलैंड ने इसके जवाब में कहा था कि वह लावरोव के असिस्टेंट से मिलकर यह बात पहुंचा देंगे.

रूसी जासूसी और इन्वेस्टमेंट का कनेक्शन

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, एपस्टीन के संबंध सर्गेई बेल्याकोव जैसे अधिकारियों से भी थे, जिनके लिंक रूस की खुफिया एजेंसी (FSB) से बताए जाते हैं. वह सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में भी शामिल हुआ था और रूसी अधिकारियों को पश्चिमी निवेश (Western Investment) लाने की सलाह देता था.

इन खुलासों के बाद यूरोप में खलबली मची है. पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा है कि उनका देश इस बात की जांच करेगा कि क्या एपस्टीन के संबंध रूसी इंटेलिजेंस से थे. हालांकि, रूस की सरकार (क्रेमलिन) ने इन बातों को खारिज करते हुए कहा है कि एपस्टीन और रूसी जासूसी के दावों को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए.

क्या वाकई में पुतिन से मिला था एपस्टीन?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एपस्टीन ने 2019 तक रूस के वीजा के लिए भी कोशिशें की थीं. हालांकि, इन सरकारी कागजों में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि एपस्टीन की पुतिन से कभी मुलाकात हुई थी. जानकारों का कहना है कि एपस्टीन खुद को बहुत प्रभावशाली दिखाना चाहता था और बड़े लोगों के करीब रहने का शौकीन था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उसने रूस में वाकई कोई बड़ी पहुंच बना ली थी.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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