Jamaat-e-Islami Bangladesh Election: बांग्लादेश के आम चुनाव के नतीजों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव हारने से पहले जमात-ए-इस्लामी पार्टी ने वोटर्स को लुभाने के लिए पैसों और धर्म का सहारा लिया था. तारिक रहमान की बीएनपी (BNP) से पिछड़ने के बाद जमात ने आखिरी वक्त तक वोटर्स को अपनी तरफ करने की कोशिश की.
पर्चे बांटकर दिया 15,000 रुपये का लालच
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी के गठबंधन ने चुनाव से पहले कुछ पर्चे (पैम्फलेट्स) बांटे थे. इन पर्चों में वादा किया गया था कि हर वोटर को 15,000 रुपये दिए जाएंगे. इसे ‘वोटर भत्ता’ और ‘यात्रा खर्च’ का नाम दिया गया था. पार्टी ने लोगों से कहा कि अगर उनके परिवार के सभी सदस्य जमात को वोट देते हैं, तो उनका परलोक सुधर जाएगा, वे पापों से मुक्त हो जाएंगे और उन्हें कब्र की सजा से भी मुक्ति मिलेगी.
वोट का सबूत देने के लिए रखी ये शर्त
एनडीटीवी की रिपोर्ट बताती है कि जमात ने वोटर्स के सामने एक अजीब शर्त रखी थी. पार्टी चाहती थी कि लोग ढाका-15 सीट से उनके चीफ शफीकुर रहमान को वोट दें. इसके सबूत के तौर पर वोटर्स को पोलिंग बूथ के अंदर कैमरा वाला फोन ले जाने और बैलेट पेपर पर मुहर लगाते हुए फोटो खींचने को कहा गया था. पार्टी ने यह भी दावा किया कि उनके पास वोटर्स के आईडी नंबर और बकाश (bKash) से जुड़े मोबाइल नंबर पहले से मौजूद हैं.
पर्ची दिखाओ और पैसे ले जाओ
बांटे गए पर्चों में निर्देश दिया गया था कि वोट डालने के बाद वोटर्स को बाहर आकर जमात के प्रतिनिधि को अपना वोटर आईडी दिखाना होगा और फोन में खींची गई फोटो को सबूत के तौर पर पेश करना होगा. महिला वोटर्स के लिए महिला प्रतिनिधि तैनात की गई थीं. साथ ही, लोगों से यह भी कहा गया था कि वे वोट देने के बाद केंद्र के पास ही रुकें, क्योंकि उन्हें किसी ‘खास काम’ के लिए दोबारा बुलाया जा सकता है. इस पूरे प्लान को ‘अल्लाह को गवाह मानकर’ गुप्त रखने की हिदायत दी गई थी.
इतनी कोशिशों के बाद भी मिली करारी हार
भले ही जमात-ए-इस्लामी ने पैसों और धार्मिक वादों का जाल बुना, लेकिन बांग्लादेश की जनता ने उन्हें नकार दिया. स्थानीय मीडिया ‘द डेली स्टार’ के मुताबिक, खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी (BNP) ने शानदार जीत हासिल की है. 299 सीटों में से बीएनपी गठबंधन ने 213 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि जमात और उसके सहयोगियों के हाथ सिर्फ 76 सीटें ही आई हैं. शेख हसीना के जाने के बाद फिर से उभरी जमात के लिए यह बड़ा झटका है.
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