करप्शन केस में इजरायली पीएम नेतन्याहू की गवाही फिर टली, कोर्ट में सुरक्षा कारणों का हवाला

Israel PM Benjamin Netanyahu Trial: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आपराधिक मामले में होने वाली गवाही एक बार फिर टाल दी गई. अदालत में सुरक्षा और कूटनीतिक बैठकों का हवाला दिया गया. कोर्ट में पेशी टलने के पीछे सुरक्षा और कूटनीतिक बैठकों का जिक्र किया गया है.

Benjamin Netanyahu Trial: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अदालत में चल रही आपराधिक सुनवाई में गवाही एक बार फिर स्थगित कर दी गई है. इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके वकील ने यरुशलम डिस्ट्रिक कोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री पूरे दिन सुरक्षा और कूटनीतिक बैठकों में व्यस्त रहेंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू के वकील ने अदालत को एक गोपनीय शेड्यूल भी सौंपा, जिसमें सोमवार को देर रात तक तय बैठकों की जानकारी दी गई थी.

यह पहली बार नहीं है जब नेतन्याहू की अदालत में पेशी आगे बढ़ाई गई हो. इससे पहले 27 अप्रैल को भी उनकी गवाही सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अनिश्चित समय के लिए टाल दी गई थी. इसी साल अदालत ने एक अन्य फैसले में नेतन्याहू की निर्धारित पेशियों को भी रद्द कर दिया था. बचाव पक्ष ने उस समय भी सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़ी जिम्मेदारियों का हवाला दिया था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था. 

सरकारी वकीलों ने जताई थी आपत्ति

हालांकि, इजरायल के सरकारी वकील इस फैसले से सहमत नहीं थे. उनका कहना था कि प्रधानमंत्री को अपने कार्यक्रम अदालत की कार्यवाही के हिसाब से तय करने चाहिए, ताकि जिरह की प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके. इसके बावजूद अदालत ने नेतन्याहू की अनुपस्थिति की अनुमति दे दी और उनकी जगह दूसरे गवाह की गवाही सुनने का फैसला किया.

टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, यह निर्णय 26 अप्रैल को यरुशलम जिला न्यायालय के न्यायाधीशों, रिवका फ्रीडमैन-फेल्डमैन, मोशे बार-आम और ओडेड शाहम के एक पैनल ने जारी किया था. उन्होंने एक अन्य बचाव पक्ष के गवाह की सुनवाई करने पर सहमति जताई. लिहाजा अब अदालत नेतन्याहू के पूर्व सहयोगी और राज्य गवाह श्लोमो फिलबर की पत्नी इलानिट फिलबर की गवाही सुनेगी.

केस 4000 में फंसे हैं नेतन्याहू

यह मामला चर्चित ‘केस 4000’ से जुड़ा है, जिसे बेजेक-वाला (Bezeq-Walla) प्रकरण के नाम से भी जाना जाता है. यह नेतन्याहू के खिलाफ चल रहे मामलों में सबसे गंभीर माना जाता है. इस मामले में आरोप है कि नेतन्याहू ने कारोबारी शॉल इलोविच की टेलीकॉम कंपनी Bezeq को फायदा पहुंचाने वाले सरकारी फैसलों को आगे बढ़ाया. बदले में उनसे जुड़े समाचार प्लेटफॉर्म Walla पर प्रधानमंत्री के पक्ष में सकारात्मक कवरेज दी गई.

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नेतन्याहू ने आरोपों को बताया गलत

नेतन्याहू लगातार इन सभी आरोपों से इनकार करते रहे हैं. उन्होंने उस कथित ‘डायरेक्टिव मीटिंग’ के आरोपों को भी खारिज किया है, जिसमें उनके करीबी सहयोगी और पूर्व संचार मंत्रालय महानिदेशक श्लोमो फिल्बर का नाम सामने आया था. रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2022 में श्लोमो फिलबर की गवाही में कई विरोधाभास सामने आए थे. इसके बाद सरकारी वकीलों ने उनके साथ हुए स्टेट विटनेस समझौते को रद्द करने की मांग भी की थी.

दिसंबर 2024 से जारी है ट्रायल

नेतन्याहू ने पहली बार दिसंबर 2024 में अदालत में गवाही दी थी. इसके बाद जून 2025 से मामले में जिरह का चरण शुरू हुआ, जो अब भी जारी है. फिलहाल अदालत में इस हाई-प्रोफाइल केस की सुनवाई चल रही है.

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By Anant narayan shukla

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