कनाडा को दो हिस्सों में तोड़ने की कोशिश में है अमेरिका, ट्रंप प्रशासन अलगाववादियों के साथ कर रहा मीटिंग

Is US trying to break Canada into two: अमेरिका और कनाडा के बीच हाल के दिनों में तल्खी काफी बढ़ गई है. अब ट्रंप का अमेरिकी प्रशासन कनाडा के अलगाववादी गुटों से मिल रहा है. क्या कनाडाई पीएम के बयानों और ग्रीनलैंड को हासिल न कर पाने का गुस्सा अब ट्रंप कनाडा को दो हिस्सों में तोड़कर लेंगे?

Is US trying to break Canada into two: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों दुनिया पर अमेरिकी टैरिफ से मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं. लेकिन बात इतनी नहीं है. उनका निशाना देशों की संप्रभुता भी बन रही है. अमेरिकी सैनिकों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके घर से ही गिरफ्तार कर लिया. ग्रीनलैंड को लेने के लिए तीखी बयानबाजी की. ईरान, तो उनके निशाने पर है ही. कनाडा को वह अपने देश का 51वां राज्य ही बता देते हैं. लेकिन, कनाडा का एक हिस्सा लेने के लिए उनका प्रशासन बैकडोर से काम कर रहा है.

व्हाइट हाउस के कुछ अधिकारियों ने कनाडा के तेल-समृद्ध प्रांत अल्बर्टा से जुड़े अलगाववादी नेताओं से मुलाकात की है. यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच पहले से ही व्यापार, वैश्विक राजनीति और सुरक्षा नीतियों को लेकर खटास चल रही है. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के अधिकारियों ने कनाडा के तेल-समृद्ध प्रांत अल्बर्टा के अलगाववादी समूह अल्बर्टा प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट (APP) से पिछले साल अप्रैल से अब तक कम से कम तीन बार गुप्त बैठकें की हैं. APP एक अतिदक्षिणपंथी समूह है, जो चाहता है कि अल्बर्टा स्वतंत्र राज्य बने और कनाडा से अलग हो जाए.

अल्बर्टा के अलगाववाद में अमेरिका डाल रहा घी

यह कनाडा की राजनैतिक स्थिरता और अमेरिका-कनाडा संबंधों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. इन बैठकों में APP के प्रतिनिधियों ने अमेरिकी विदेश विभाग से कहा कि अगर अल्बर्टा जनमत-संग्रह के जरिए स्वतंत्रता हासिल कर सकता है. इसके लिए उसे आर्थिक समर्थन की आवश्यकता है. समूह ने अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर की क्रेडिट सुविधा देने का अनुरोध करने की बात कही है. APP के कानूनी सलाहकार ने कहा कि उनका ट्रंप प्रशासन से ‘कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से कहीं अधिक मजबूत रिश्ता’ है. लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कोई समर्थन या वादा नहीं किया गया है और ऐसा कोई कमिटमेंट नहीं दिया गया है.

ट्रंप के साथ तनातनी के बीच बैठक की खबरें बाहर आईं

ये बैठकें ऐसे समय सामने आई हैं जब अमेरिका और कनाडा के बीच राजनयिक दरार और तनाव स्पष्ट रूप से बढ़ रहे हैं. पिछले साल के दौरान ट्रंप और कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी के बीच मतभेद सार्वजनिक मंच पर भी आ चुके हैं, जिसमें कार्नी ने WEF की बैठक के दौरान अपने भाषण में आरोप लगाया कि ट्रंप वैश्विक व्यवस्था में दरार पैदा कर रहे हैं. वहीं ट्रंप ने कनाडा की सुरक्षा पर कटु बयान दिया. उन्होंने कहा कि कनाडा अमेरिका से पूरा फायदा लेता है, लेकिन जिम्मेदारी नहीं उठाता. हालांकि, इसे कार्नी ने दृढ़ता से खारिज किया था.

पीएम कार्नी का अल्बर्टा से है खास नाता

कनाडा के वर्तमान प्रधानमंत्री माइक कार्नी का बचपन अल्बर्टा की राजधानी एडमॉन्टन में बीता है. लगभग 50 लाख की आबादी वाले इस प्रांत में दशकों से एक छोटा-सा स्वतंत्रता आंदोलन रहा है, जिसकी जड़ें 150 साल पहले कनाडा के गठन तक जाती हैं. हाल के सर्वे बताते हैं कि क्यूबेक और अल्बर्टा में अलगाव को लेकर समर्थन बढ़ा जरूर है, लेकिन अभी भी यह बहुमत की आवाज (केवल 30%) नहीं है. ऐसे में यह उनके लिए काफी नजदीकी मुद्दा हो सकता है.

वहीं, अल्बर्टा प्रांत की प्रीमियर डैनियल स्मिथ ने साफ किया है कि वे अलगाव का समर्थन नहीं करतीं, हालांकि उन्होंने जनमत-संग्रह की प्रक्रिया को आसान जरूर बनाया है. उन्होंने कहा कि प्रांत को राष्ट्रीय चर्चा का अधिकार है, जिससे बहस और तेज हो गई है. æअल्बर्टा फॉरएवर कनाडा’ जैसे समूहों ने अलगाव के विरोध में लाखों हस्ताक्षर जुटाए हैं. ऐसे में APP और अमेरिकी अधिकारियों के संपर्कों से विदेशी हस्तक्षेप के आरोप लग रहे हैं, जिनसे कनाडाई संघीय सरकार और जनता में चिंता बढ़ रही है.

अल्बर्टा की स्थिति और इतिहास और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

अल्बर्टा कनाडा का एक पश्चिमी प्रांत है. यह देश की अर्थव्यवस्था में तेल और गैस के कारण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. ऑयल डैशबोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक अल्बर्टा में अनुमानित तेल भंडार लगभग 165,168 बिलियन बैरल है. अल्बर्टा अकेले कनाडा की ऊर्जा आवश्यकताओं का लगभग 99% हिस्सा पूरा करता है. अगर यह प्रांत कनाडा से अलग हो जाता है, तो देश की ऊर्जा व्यवस्था में बड़ी उथल-पुथल हो सकती है.

2018 में पहली बार अल्बर्टा में यह मांग उभरी थी कि प्रांत खुद को कनाडा से अलग कर ले. उस समय यहाँ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन भी हुए थे. अल्बर्टा की भौगोलिक स्थिति अमेरिका के लिए रणनीतिक महत्व रखती है. यह प्रांत अलास्का के बहुत पास है और अमेरिका के मोंटाना के साथ लगभग 294 किलोमीटर की सीधा बॉर्डर भी साझा करता है.

अल्बर्टा के अलगाव को हवा देने से रिश्ते और बिगडे़ंगे

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन शायद वैधानिक रूप से अल्बर्टा के अलगाववादी आंदोलन को कोई ठोस समर्थन नहीं देगा. लेकिन इस तरह की बैठकें उस राजनीतिक अस्थिरता का प्रतीक हैं जो ओटावा-वॉशिंगटन संबंधों को और जटिल बना सकती हैं. कनाडाई विशेषज्ञ कहते हैं कि अमेरिका इस तरह के अलगाववादी समूहों से मिलकर ‘कनाडाइयों को आपस में भिड़ाने’ में खुशी महसूस होती है. लेकिन, इससे द्विपक्षीय विश्वास कमजोर हो सकता है.

कनाडा के दो क्षेत्र अल्बर्टा और क्यूबेक में अलगाववाद की चर्चा रहती है. फ्रेंच बोलने वाले क्यूबेक में कनाडा से अलग होने के लिए मतदान हो चुका है. जहां यह प्रस्ताव खारिज हो चुका है. वहीं क्यूबेक के विपरीत, अल्बर्टा का अलगाववादी आंदोलन कभी गंभीर नहीं हो पाया. APP हस्ताक्षर जुटाने की कोशिश कर रहा है, ताकि स्वतंत्रता याचिका को विधानसभा में लाया जा सके. इन वार्ताओं से कनाडा के घरेलू मामलों में ट्रंप प्रशासन और उसके समर्थकों के हस्तक्षेप को लेकर पहले से मौजूद चिंताएँ और बढ़ेंगी.

क्या तरीके अपना रहा अल्बर्टा का अलगाववादी ग्रुप

अलगाववादी पार्टी ने ब्रिटेन के ब्रेक्सिट आंदोलन जैसी ही कई थीम अपनाई हैं. वह ओटावा पर अरबों डॉलर के तेल राजस्व की बर्बादी का आरोप लगाती है. कनाडा सरकार पर चीन के प्रभाव, ईसाइयों पर अत्याचार और ‘ग्लोबलिस्ट’ एजेंडा जैसी साजिशों का प्रचार करती है. इस समूह ने क्यूबेक के अलगाववादी आंदोलन के अधिकारियों से भी मुलाकात की है, जिसने 1980 और 1995 में स्वतंत्रता जनमत-संग्रह गंवाए थे.

अगर अल्बर्टा का यह आंदोलन राजनीतिक जमीन पर और मजबूती पाता है, तो इससे न सिर्फ कनाडा के भीतर एक नया संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है, बल्कि अमेरिका-कनाडा व्यापार, ऊर्जा साझेदारी, और सुरक्षा सहयोग पर भी दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है. अल्बर्टा का बड़ा तेल बाजार और आर्थिक महत्व इसे अंतरराष्ट्रीय रणनीति का केंद्र बना देता है, जिससे स्थानीय से लेकर वैश्विक राजनीति तक के समीकरण बदल सकते हैं.

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By Anant narayan shukla

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अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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