ट्रंप की ‘धमकी’ के बाद होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने आगे आए 6 बड़े देश, ईरान को दी चेतावनी, क्या करेंगे?

Iran War Hormuz Strait Blockade: ईरान द्वारा पिछले 15 से भी ज्यादा दिनों से होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की वजह से पूरे विश्व में तेल और गैस संकट पैदा हो गया है. इसमें अभी तक अमेरिका और इजरायल ही प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उनका रवैया आक्रमण करने वाला ही है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने नाटो सहयोगियों से पहले भी मदद मांगी थी, लेकिन उस समय उन्होंने इनकार कर दिया था. हालांकि, गुरुवार को उन्होंने कहा कि ईरान को तबाह कर देंगे, इसके बाद यूरोप के देशों ने संयुक्त प्रयासों के बारे में बयान जारी किया है.

Iran War Hormuz Strait Blockade: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ‘ईरान को खत्म कर देने’ की धमकी दी, क्योंकि उसने कतर के रास लफान गैस रिफाइनरी पर अटैक कर दिया. इसकी वजह से पूरी दुनिया में गैस संकट आ सकता है. कतर एनर्जी के सीईओ का दावा है कि इससे कतर की 17 प्रतिशत गैस उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे उबरने में उसे 5 साल लगेंगे. इसके बाद दुनिया के छह देशों ने संकेत दिया है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) पर ईरान की नाकेबंदी से निपटने के लिए संयुक्त प्रयास पर विचार कर सकते हैं. 

यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान ने कहा कि वे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवाजाही बहाल करने के उद्देश्य से एक मिशन की योजना बनाने के लिए तैयार हैं. अपने बयानों में, इन देशों ने ईरान की नाकेबंदी की कड़ी निंदा की. हालाँकि, इस संयुक्त प्रयास के लिए अभी तक कोई समय-सीमा या स्वरूप घोषित नहीं किया गया है.

जर्मनी और नीदरलैंड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी भागीदारी युद्धविराम पर, या कम से कम, शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के रुकने पर निर्भर करेगी. इटली के साथ साझा बयान में नीदरलैंड ने कहा, ‘हम उन देशों की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं जो तैयारी संबंधी योजना में जुटे हैं.’ वहीं, यूके के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी तेल और गैस प्रतिष्ठानों सहित नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की.”

संयुक्त बयान में सहयोगी देशों ने कहा, ‘हम बढ़ते संघर्ष को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं.’ उन्होंने ईरान से अपील करते हुए कहा, ‘हम ईरान से आग्रह करते हैं कि वह तुरंत धमकियां देना, बारूदी सुरंगें बिछाना, ड्रोन और मिसाइल हमले करना और वाणिज्यिक जहाजों के रास्ते को अवरुद्ध करने के अन्य प्रयास बंद करे. समुद्री आवागमन की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय कानून का एक बुनियादी सिद्धांत है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन भी शामिल है.’ इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान की इन कार्रवाइयों का असर दुनिया के हर हिस्से के लोगों पर पड़ेगा, खासकर कमजोर तबकों पर.

सुरक्षित आवागमन पर जोर

यह कदम वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों को कम करने में मदद कर सकता है. होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का एक बेहद अहम ऊर्जा मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% गुजरता है. संयुक्त बयान में समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया गया. साथ ही यह भी कहा गया कि आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से समन्वित तरीके से तेल जारी करने और उत्पादन बढ़ाने जैसे कदम उठाने की जरूरत है. इन छह देशों ने युद्ध के दोनों पक्षों से तेल और गैस सुविधाओं पर हमले तुरंत रोकने की अपील की.

ट्रंप ने अपने सहयोगियों को लेकर क्या कहा था?

यह घोषणा उस समय सामने आई जब डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान को ‘पूरी तरह तबाह’ कर सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं सोच रहा हूं कि क्या होगा अगर हम ईरान के तथाकथित ‘आतंकी राज्य’ को पूरी तरह खत्म कर दें और जो देश इसका इस्तेमाल करते हैं, उन्हें ही इस ‘जलडमरूमध्य’ की जिम्मेदारी दे दें? इससे हमारे कुछ निष्क्रिय सहयोगी तेजी से सक्रिय हो जाएंगे.’ इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि उन्हें अमेरिका के कई नाटो सहयोगियों से जानकारी मिली है कि वे अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में ‘शामिल नहीं होना चाहते’.

ट्रंप के बयान के बाद, ब्रिटेन के एक रक्षा अधिकारी ने बुधवार (18 मार्च 2026) को कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट में खतरे का स्तर इतना ज्यादा है कि अभी कई देश अपने युद्धपोत वहां भेजने को तैयार नहीं हैं. उन्होंने आगे कहा कि वे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर यह देख रहे हैं कि स्थिति अनुकूल होने पर क्या किया जा सकता है. अधिकारी ने यह भी बताया कि लंदन ने  होर्मुज समस्या पर आगे की रणनीति बनाने के लिए यूएस सेंट्रल कमांड के पास कुछ अतिरिक्त सैन्य योजनाकार भेजे हैं.

यूरोपीय देश और जापान खाड़ी क्षेत्र से तेल आयात पर काफी निर्भर हैं. वे तेजी से बढ़ती तेल कीमतों और आपूर्ति में रुकावट के खतरे को लेकर चिंतित हैं. बुधवार रात ईरान और कतर में हुए हमलों की वजह से क्रूड ऑयल की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थी. हालांकि, आज 20 मार्च को यह 102 डॉलर तक पहुंच गया है. लेकिन ये कीमतें युद्ध शुरू होने के पहले- 73 डॉलर से कहीं ज्यादा है. इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भविष्य भी संकट में है. 

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बढ़ती वैश्विक चिंता

ईरान द्वारा जलडमरूमध्य पर प्रभावी नाकाबंदी के कारण इस अहम समुद्री मार्ग से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का कच्चा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से गुजरता है. यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बमबारी शुरू की थी. इसके जवाब में तेहरान ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में हमले किए. 

इस संघर्ष में अब तक 23 वाणिज्यिक जहाज हमलों या घटनाओं का शिकार हो चुके हैं, इनमें 10 टैंकर भी शामिल हैं. इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, इस स्थिति के कारण जलडमरूमध्य के पश्चिम में लगभग 3,200 जहाजों पर सवार करीब 20,000 नाविक फंसे हुए हैं. 

वहीं, भारत के भी 22 जहाज इसी स्ट्रेट में फंसे हैं, जिसमें 611 नाविक शामिल हैं. हालांकि, भारत अपने जहाजों और तेल-गैस की सप्लाई के लिए ईरान के साथ बातीचत कर रहा है. 4 मार्च के बाद से भारत में तीन-चार जहाज तेल और गैस लेकर आ चुके हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आने वाले समय में और जहाज भारत आ सकते हैं. 

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लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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