पेंटागन ने US संसद से मांगे 18,61,690 करोड़ रुपये, ईरान युद्ध में अब क्या करना चाहते हैं ट्रंप?

Iran War Pentagon 200 Billion Dollar: अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने ईरान युद्ध में अतिरिक्त फंड की मांग की है. उसने 200 बिलियन डॉलर यानी 18 लाख 61 हजार 690 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि की मांग की है. यह राशि ईरान की 2025 की जीडीपी की आधी रकम से भी ज्यादा है.

Iran War Pentagon: ईरान के खिलाफ अमेरिका पानी की तरह पैसे बहा रहा है.  पहले ही हफ्ते में अमेरिका इस सैन्य अभियान पर 11 अरब डॉलर से अधिक खर्च कर चुका था. अब पेंटागन यानी ट्रंप प्रशासन के रक्षा विभाग ने अमेरिकी संसद (कांग्रेस) से अतिरिक्त 200 अरब डॉलर की मंजूरी मांगी है, ईरान में चल रहे युद्ध अभियान को फंड किया जा सके. लेकिन यह मंजूरी मिलना आसान नहीं होगा, क्योंकि यह एक बहुत बड़ी राशि है. इसके साथ ही यह राजनीतिक चुनौती भी जरूर बनेगा, क्योंकि बिना कांग्रेस की मंजूरी के यह पैसे नहीं मिलेंगे.

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (गोपनीयता की शर्त पर) पर बताया कि, यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस को भेज दिया गया है. हालांकि गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से इस आंकड़े के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सीधे इसकी पुष्टि नहीं की और कहा कि यह राशि बदल भी सकती है. उन्होंने कहा, ‘बुरे लोगों को खत्म करने के लिए पैसे लगते हैं.’ हम कांग्रेस के पास जा रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हमें सही तरीके से फंड मिल रहा है.’

आसान नहीं इतने बड़े बजट को पास कराना

सीनेट एप्रोप्रिएशंस कमेटी के अनुसार, पहले ही कांग्रेस 2026 वित्तीय वर्ष के लिए 838.5 अरब डॉलर के रक्षा बजट को मंजूरी दे चुकी है. यह पूरा मामला कांग्रेस में बड़ी राजनीतिक लड़ाई का रूप ले सकता है. इस तरह के बड़े फंड को पास कराने के लिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों का समर्थन जरूरी होगा. जहां कुछ नेता इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं कई सांसद स्वास्थ्य सेवाओं और घरेलू जरूरतों को ज्यादा प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं. ऐसे में सीनेट में 60 वोट की अनिवार्यता को पार करना आसान नहीं दिख रहा है.

प्रस्ताव पर किसने क्या कहा?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप: ‘दुनिया बहुत अस्थिर है.यह आपातकालीन खर्च बहुत छोटी कीमत है, ताकि हमारी सेना मजबूत बनी रहे.’

केन कैल्वर्ट (रिपब्लिकन चेयरमैन, डिफेंस स्पेंडिंग सब-कमेटी): ‘हम पहले से ही अतिरिक्त बजट की बात कर रहे थे, अब इस संघर्ष से लागत और बढ़ गई है. यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है और इसे पूरा करना जरूरी है.’

बेट्टी मैक्कलम (शीर्ष डेमोक्रेट, सब-कमेटी): ‘राष्ट्रपति ने कांग्रेस को बताए बिना अमेरिका को युद्ध में झोंक दिया है. यह राष्ट्रपति के लिए ‘रबर स्टैम्प’ नहीं बनने वाला.’ ‘मैं रक्षा विभाग को बिना शर्त चेक (Blank Check) नहीं दूंगी.’

माइक जॉनसन (हाउस स्पीकर): ‘यह खतरनाक समय है, हमें रक्षा को पर्याप्त फंड देना होगा. मैं अभी पूरी डिटेल नहीं देख पाया हूं, लेकिन जो जरूरी होगा उसका समर्थन करूंगा.’

रोजा डेलॉरो (शीर्ष डेमोक्रेट, हाउस एप्रोप्रिएशन्स कमेटी): ‘200 अरब डॉलर की यह राशि बेहद चौंकाने वाली है.’

स्टीव स्कैलिस (हाउस मेजॉरिटी लीडर): ‘आखिरकार हमें व्हाइट हाउस के साथ सटीक राशि पर बातचीत करनी होगी. हम अभी उस चरण तक नहीं पहुंचे हैं.’

पेंटागन क्या करेगा इन पैसों से?

वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो इससे 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिकी सैन्य अभियान को और तेज किया जाएगा और युद्ध में इस्तेमाल हो रहे हथियारों के उत्पादन को बढ़ाया जाएगा. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हवाई हमले शुरू किए हुए लगभग तीन हफ्ते हो चुके हैं. अमेरिकी सेना के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ‘ईरानी शासन की सुरक्षा संरचना’ को खत्म करना है. 

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अब तक अमेरिकी बल 7,800 से अधिक ठिकानों पर हमला कर चुके हैं, 8,000 से ज्यादा कॉम्बैट फ्लाइट्स उड़ान भर चुकी हैं और 120 से अधिक ईरानी नौसैनिक जहाजों को नुकसान पहुंचाया या नष्ट किया गया है. वहीं अमेरिका को भी काफी नुकसान झेलना पड़ा है. उसके 16 जहाज और कई ड्रोन अब तक नष्ट हो चुके हैं. 

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अमेरिका का युद्ध में भारी-भरकम खर्च

अमेरिकी कांग्रेस ने दिसंबर 2025 तक यूक्रेन युद्ध के लिए ऑपरेशन अटलांटिक रिजॉल्व के तहत करीब 188 अरब डॉलर की मंजूरी दी है. वहीं, अगर ईरान युद्ध के लिए नया प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो यह खर्च यूक्रेन युद्ध से कहीं अधिक हो जाएगा. वहीं 200 बिलियन डॉलर की अतिरिक्त मदद मिलती है, तो युद्ध पर कुल अमेरिकी खर्च ईरान की वार्षिक जीडीपी के आधे से भी अधिक हो सकता है. वर्ल्ड मीटर्स के अनुसार, 2025 में ईरान की जीडीपी 356.51 अरब डॉलर आंकी गई थी.

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लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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