Iran US Tension: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की संभावनाएं दिन प्रति दिन तेज होती जा रही हैं. अमेरिका ने हिंद महासागर में अपने जहाजी बेड़ों की बंपर तैनाती शुरू कर दी है. यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बयानों से ईरान के ऊपर और भी दबाव बना रहे हैं. हालांकि, ईरान भी झुकने से इनकार कर रहा है. उसने भी कहा है कि अगर हमला होता है, तो करारा जवाब दिया जाएगा. लेकिन उसकी धमकियां कोरी या केवल जुबानी नहीं है. भारत के डिप्टी एनएसए से मुलाकात करने के बाद ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (Supreme National Security Council) के सचिव अली लारिजानी रूस पहुंचे हैं.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मॉस्को में ईरान की शीर्ष सुरक्षा संस्था के प्रमुख सचिव अली लारिजानी से मुलाकात की. रूस की उनकी यह यात्रा अचानक हुई. मॉस्को स्थित ईरान दूतावास ने सोशल मीडिया पर कहा कि पुतिन और लारिजानी ने आर्थिक सहयोग के साथ-साथ महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की, हालांकि विस्तृत जानकारी नहीं दी गई. रूस की सरकारी समाचार एजेंसी RIA नोवोस्ती के अनुसार, इस यात्रा की पहले से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी.
यह बैठक ऐसे समय हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तेहरान पर परमाणु समझौता करने के लिए दबाव बढ़ा रहे हैं. वह संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दे चुके हैं. उनका मानना है कि ईरान द्वारा हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों पर की गई कार्रवाई में हजारों लोग मारे गए. वहीं, इसी दौरान लगभग 800 लोगों को फांसी भी दी जाने वाली थी, हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत के बाद इसे रोक दिया गया. इसके बाद लगा कि दोनों देश किसी एक बात पर सहमत हो सकेंगे, लेकिन एक बार फिर से यह संघर्ष बढ़ रहा है.
वहीं, मॉस्को पहले भी वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश कर चुका है. रूस ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते तनाव के बीच खुद को एक कूटनीतिक मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है. यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से ईरान रूस के सबसे करीबी साझेदारों में से एक बन गया है. अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ बढ़ते टकराव के बीच मॉस्को ने तेहरान को महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समर्थन दिया है.
ईरानी ठिकानों पर हमलों की आशंका
अगर ट्रंप सैन्य कार्रवाई का फैसला करते हैं, तो प्रमुख निशाने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उसकी युवा मिलिशिया बासिज (Basij) के ठिकाने हो सकते हैं. मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि इन बलों ने हालिया प्रदर्शनों पर हुए घातक दमन में अग्रिम पंक्ति की भूमिका निभाई, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई. अमेरिका ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को निशाना बनाना चाहता है.
हाल ही में सैटेलाइट इमेज सामने आए हैं. इनमें जून 2025 में अमेरिका द्वारा दो न्यूक्लियर साइटों पर किए गए हमले में तबाह हुए ठिकानों को फिर से रिपेयर किया जा रहा है. अमेरिका ईरान के इस फैसेलिटी को तो तबाह करना ही चाहता है. उसके निशाने पर बसीज और आईआरजीसी ठिकाने भी होंगे. स्वतंत्र सैन्य शोधकर्ता ईवा जे. कौलूरियोटिस के अनुसार, अमेरिका टॉमहॉक मिसाइलों और लड़ाकू विमानों का उपयोग कर बसीज और आईआरजीसी ठिकानों पर हमला कर सकता है. कौलूरियोटिस के अनुसार, अमेरिका अपने हमले में ईरानी शासन द्वारा किए गए सामूहिक हत्याकांडों में शामिल ऑपरेशंस कमांड और वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बना सकता है.
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