Iran-US Nuclear Talks: ईरान की संसद में नेशनल सिक्योरिटी कमेटी के मेंबर महमूद नबवियन ने एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अमेरिका के साथ परमाणु मुद्दे पर बातचीत करना ईरान की एक ‘रणनीतिक चूक’ थी. SNN TV को दिए इंटरव्यू के एक हिस्से को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर करते हुए नबवियन ने साफ कहा कि इस मुद्दे को बातचीत की मेज पर लाने से दुश्मन के हौसले और बढ़ गए हैं. उनके अनुसार, ईरान को न्यूक्लियर डील पर चर्चा ही नहीं करनी चाहिए थी.
अमेरिका की सख्त शर्तें
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, महमूद नबवियन ने खुलासा किया कि पाकिस्तान में हुई इस बातचीत के दौरान अमेरिका ने बहुत कड़ी शर्तें रखी थीं. अमेरिका चाहता था कि ईरान अपने 60% तक संवर्धित (enriched) यूरेनियम को हटा दे और अगले 20 साल के लिए इस पर रोक लगा दे. हालांकि, नबवियन ने बताया कि तेहरान ने अमेरिका की इन मांगों को मानने से साफ इनकार कर दिया है.
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि उन पर डील करने का कोई दबाव नहीं है. ट्रंप ने कहा, “मेरे पास दुनिया का पूरा समय है, लेकिन ईरान के पास समय खत्म हो रहा है.” उन्होंने आगे लिखा कि ईरान की नेवी और एयरफोर्स को भारी नुकसान पहुंचा है और उनकी घेराबंदी बहुत मजबूत है. ट्रंप के अनुसार, कोई भी समझौता तभी होगा जब वह अमेरिका और उसके साथियों के हक में होगा.
ये भी पढ़ें: ट्रंप का दावा- ‘टूट रहा ईरान’, भड़के ईरानी नेताओं ने दिया जवाब; बोले- हम सब एक हैं
60 दिन का टर्निंग पॉइंट
पॉलिटिको की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस विवाद का असर अब अमेरिकी राजनीति पर भी दिख रहा है. कैपिटल हिल में हुई सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने तेल की कीमतों में कमी आने की कोई तय तारीख नहीं बताई. वहीं, कुछ रिपब्लिकन नेताओं का मानना है कि इस संघर्ष के 60 दिन पूरे होने पर बड़ा मोड़ आ सकता है, जिससे इस लड़ाई को मिलने वाले समर्थन पर भी असर पड़ सकता है.
ये भी पढ़ें: ईरान का ट्रंप को करारा जवाब; कहा- घेराबंदी खत्म करो, दबाव में नहीं झुकेंगे
