Iran Israel Conflict: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच पिछले साल दिसंबर में फ्लोरिडा में एक सीक्रेट मीटिंग हुई थी. सीबीएस न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने नेतन्याहू को भरोसा दिलाया है कि अगर ईरान के साथ परमाणु समझौता (न्यूक्लियर डीलl) फेल होता है, तो वे ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर इजरायली हमलों का पूरा सपोर्ट करेंगे.
अमेरिका कैसे करेगा इजरायल की मदद?
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी के अधिकारी अब इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि जंग की स्थिति में इजरायल की मदद कैसे की जाए. दो अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि अब चर्चा इस पर नहीं हो रही कि इजरायल हमला करेगा या नहीं, बल्कि इस पर हो रही है कि अमेरिका उसे क्या सपोर्ट देगा. इसमें हवा में ही फाइटर जेट्स में ईंधन भरना (एरियल रिफ्यूलिंग) और दूसरे देशों से उनके रास्ते (एयरस्पेस) का इस्तेमाल करने की परमिशन दिलाना शामिल है.
पड़ोसी देशों का क्या है रुख?
रास्ते को लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है. जॉर्डन, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने साफ कह दिया है कि वे अपनी जमीन या आसमान का इस्तेमाल न तो ईरान पर हमले के लिए करने देंगे और न ही ईरान को हमला करने के लिए जगह देंगे.
बातचीत और तनाव एक साथ
एक तरफ हमले की तैयारी है, तो दूसरी तरफ बातचीत का रास्ता भी खुला है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची इस वक्त स्विट्जरलैंड में हैं, जहाँ उनकी मुलाकात अमेरिकी अधिकारियों और आईएईए (IAEA) के चीफ राफेल ग्रोसी से होनी है. इससे पहले 6 फरवरी को मस्कट में भी बातचीत हुई थी, जो पिछले साल जून में हुए इजरायली हमलों के बाद रुक गई थी.
नेतन्याहू की क्या है शर्त?
इजरायली पीएम नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी आधी-अधूरी डील को नहीं मानेंगे. उन्होंने कहा कि:
- ईरान के पास मौजूद सारा यूरेनियम (जो कि 400 किलो से ज्यादा है) वहां से हटाया जाए.
- ईरान की यूरेनियम बनाने की क्षमता को पूरी तरह खत्म किया जाए.
- उनके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर भी रोक लगे.
- परमाणु ठिकानों की जांच बिना किसी नोटिस के कभी भी की जा सके.
ट्रंप का ‘प्लान बी’
ट्रंप ने हाल ही में नॉर्थ कैरोलिना में सैनिकों से मुलाकात के दौरान कहा कि ईरान में लीडरशिप का बदलना सबसे अच्छी बात होगी. उन्होंने यह भी कन्फर्म किया कि वे मिडिल ईस्ट में अपना दूसरा बड़ा युद्धपोत (एयरक्राफ्ट कैरियर) USS जेराल्ड आर. फोर्ड भेज रहे हैं. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर डील नहीं हुई, तो हमें इसकी जरूरत पड़ेगी.
ईरान का पक्ष
ईरान ने संकेत दिया है कि वे समझौते के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी भी एक शर्त है. ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने बीबीसी को बताया कि अगर अमेरिका उन पर से पाबंदियां (सैंक्शन) हटा लेता है, तो वे अपने यूरेनियम स्टॉक पर लिमिट लगाने के बारे में सोच सकते हैं. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ईमानदारी दिखाएगा, तो समझौता जरूर होगा.
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