Strait Of Hormuz: ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, बोरुजेर्दी ने कहा कि चूंकि युद्ध में बहुत खर्चा होता है, इसलिए अब हम यहां से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट फीस लेंगे. उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि यह नियम लागू हो चुका है और यह दशकों बाद इस इलाके में ईरान के नए ‘सॉवरेन शासन’ को दिखाता है.
बोरुजेर्दी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस ’48 घंटे’ वाली चेतावनी पर भी पलटवार किया है, जिसमें ट्रंप ने रास्ता खोलने को कहा था. ईरानी नेता ने कहा कि इजरायल का एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर ईरान की पहुंच में है और उसे महज एक दिन के अंदर तबाह किया जा सकता है. इससे पहले रविवार को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया था कि अगर ईरान ने 48 घंटों के भीतर बिना किसी खतरे के होर्मुज का रास्ता नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स को उखाड़ फेंकेगा और शुरुआत सबसे बड़े पावर प्लांट से होगी.
ईरान की जवाबी धमकी: अमेरिका और इजरायल को घेरा
ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने भी ईंट का जवाब पत्थर से दिया है. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उनके देश के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला हुआ, तो वे इस पूरे क्षेत्र में मौजूद अमेरिका और इजरायल के एनर्जी, आईटी और पानी साफ करने वाले (desalination) प्लांट्स को निशाना बनाएंगे. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि धमकियों और डर से देश की एकता और मजबूत होती है. उन्होंने X (पुराना ट्विटर) पर लिखा कि ईरान को नक्शे से मिटाने का ख्याल सिर्फ एक हताशा है. पेजेशकियन ने साफ किया कि स्ट्रैट ऑफ होर्मुज उन सभी के लिए खुला है जो हमारी जमीन का सम्मान करते हैं, लेकिन मिट्टी से छेड़छाड़ करने वालों को युद्ध के मैदान में करारा जवाब मिलेगा.
तेल की कीमतों और ग्लोबल मार्केट पर असर
इस पूरी खींचतान के बीच सोमवार को तेल की कीमतों में थोड़ी हलचल देखी गई. ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1% गिरकर 112.18 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो शुक्रवार को जुलाई 2022 के बाद के सबसे ऊंचे लेवल पर था. वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 98.7 डॉलर प्रति बैरल पर दिखा. मूमू ऑस्ट्रेलिया के सीईओ माइकल मैकार्थी ने रॉयटर्स को बताया कि मार्केट में अभी और तेजी आने के चांस हैं और कीमतें इस हफ्ते 120 डॉलर तक भी जा सकती हैं.
दूसरी ओर, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के चीफ फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि दुनिया दशकों के सबसे खराब एनर्जी संकट का सामना कर सकती है. बिरोल के मुताबिक, हमने अब तक रोजाना 1.1 करोड़ बैरल तेल का नुकसान झेला है, जो 1970 के दो बड़े तेल संकटों से भी कहीं ज्यादा है.
कौन से जहाज निकल पा रहे हैं और कौन से फंसे?
भले ही ईरान ने सख्त रुख अपनाया है, लेकिन वह सबको नहीं रोक रहा. रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान की ओर से कुछ जहाजों को चुनिंदा तरीके से छूट दी जा रही है. उदाहरण के लिए, गैस लेकर जा रहे भारत के दो जहाजों को वहां से निकलने की परमिशन दी गई. इसके अलावा, बातचीत के बाद एक पाकिस्तानी तेल टैंकर भी वहां से सुरक्षित निकल गया. शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, ज्यादातर जहाज अभी भी अपनी जगह रुके हुए हैं. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जो देश उनके दुश्मनों का साथ दे रहे हैं, उनके लिए रास्ता बंद है, लेकिन जो सुरक्षा नियमों का पालन कर रहे हैं, वे तालमेल बिठाकर निकल सकते हैं.
होर्मुज का रास्ता बंद हुआ तो क्या होगा?
स्ट्रैट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे जरूरी समुद्री रास्ता है क्योंकि दुनिया का करीब 20% तेल और गैस यहीं से होकर गुजरता है. अगर यह रास्ता पूरी तरह बंद होता है, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी. इसका असर अभी से दिखना शुरू हो गया है.
यूरोप के गैस मार्केट में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. इसके अलावा, बहरीन, कतर, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों के लिए यह मामला पानी से भी जुड़ा है. ये देश अपनी प्यास बुझाने के लिए पूरी तरह से डिसैलिनेशन प्लांट्स पर निर्भर हैं, जो बिजली से चलते हैं. अगर ईरान और अमेरिका के बीच पावर प्लांट्स को लेकर युद्ध छिड़ता है, तो इन देशों में पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाएगा.
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2,000 से ज्यादा मौतें
इस युद्ध में अब तक 2,000 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के सैन्य ठिकानों और हथियारों के गोदामों को भारी नुकसान पहुंचा है. जवाब में ईरान ने इजरायल के तेल अवीव जैसे इलाकों में बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिससे कई लोग घायल हुए हैं.
इजरायली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफरीन ने कहा है कि ईरान और हिजबुल्लाह के खिलाफ यह लड़ाई अभी कई हफ्तों तक चल सकती है. यह जंग अब लेबनान तक फैल चुकी है, जहां इजरायल हिजबुल्लाह के ठिकानों पर लगातार बमबारी कर रहा है और पुलों-इमारतों को तबाह कर रहा है.
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