Iran Attacks Diego Garcia US-UK military base Indian Ocean: ईरान असंभव को संभव बना रहा है. एक दिन पहले ही उसने एफ-35 फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया, जो कि हुआ भी. हालांकि, अमेरिका की ओर से इसमें ईरानी हाथ होने से इनकार किया गया. अब ईरान ने अपनी सीमा से 4000 दूर हिंद महासागर में मिसाइल दागी है. अमेरिका का सैन्य बेस डिएगो गार्सिया में है, यहां पर ईरान ने मिसाइलें दागी हैं. द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने डिएगो गार्सिया को निशाना बनाते हुए दो इंटरमीडिएट-रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. हालांकि, हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया का अमेरिका-ब्रिटेन का यह सैन्य अड्डा प्रभावित नहीं हुआ.
रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि एक मिसाइल उड़ान के दौरान ही विफल हो गई, जबकि दूसरी को रोकने के लिए एक अमेरिकी युद्धपोत ने SM-3 इंटरसेप्टर दागा. हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि इंटरसेप्शन सफल रहा या नहीं. द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने यह नहीं बताया कि मिसाइलें कब दागी गई थीं. इस मामले पर वॉशिंगटन स्थित ब्रिटिश दूतावास और ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय की ओर से भी अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
हालांकि, इन हमलों की खबर सामने आना भी कई सवाल खड़े कर रहा है. क्योंकि, ईरान का यह हमला उस समय हुआ जब ब्रिटेन ने घोषणा की, ‘वह अमेरिका को इस बेस का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए करने देगा.’
SM-3 इंटरसेप्टर क्या है?
SM-3 इंटरसेप्टर का इस्तेमाल अमेरिकी नौसेना शॉर्ट से लेकर इंटरमीडिएट रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने के लिए करती है. यह पारंपरिक विस्फोटक वारहेड के बजाय सीधे टक्कर (kinetic force) के जरिए लक्ष्य को खत्म करता है. इसका ‘किल व्हीकल’ लगभग 600 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहे 10 टन के ट्रक जितनी ताकत से लक्ष्य से टकराता है. इस तकनीक को ‘हिट-टू-किल’ कहा जाता है. इसे बनाने वाली कंपनी रैथियॉन इसे ‘एक गोली को दूसरी गोली से मारने’ जैसा बताती है.
कितनी है ईरान से डिएगो गार्सिया की दूरी?
इस घटना में सबसे ज्यादा चर्चा डिएगो गार्सिया बेस की ईरान से दूरी को लेकर हो रही है, जिसने ईरानी मिसाइलों की मारक क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ईरान से डिएगो गार्सिया की दूरी 3,795 से 3,800 किलोमीटर (करीब 2,358 से 2,400 मील) है. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि यह 4000 किमी से थोड़ी ज्यादा ही है. पहले माना जाता था कि यह बेस ईरानी मिसाइलों की रेंज से बाहर है, लेकिन डिएगो गार्सिया को निशाना बनाना इस बात का संकेत है कि उसकी मिसाइलों की रेंज पहले बताए गए दावों से ज्यादा हो सकती है.
ईरान की मिसाइलों की रेंज कितनी है?
यह अब तक की जानकारी के मुताबिक किसी भी ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल रेंज से कहीं ज्यादा है. अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की मिड-रेंज मिसाइलों की मारक क्षमता 1,000 से 3,000 किलोमीटर के बीच है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने यह भी उल्लेख किया कि पिछले महीने ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने दावा किया था कि ईरान ने अपनी मिसाइलों की रेंज को 2,000 किलोमीटर तक सीमित रखा है. इनमें-
खोर्रमशहर (Khorramshahr): 2,000–3,000 किमी
इमाद (Emad): लगभग 1,800 किमी
गद्र (Ghadr): 1,600–2,000 किमी
शाहाब-3 (Shahab-3): लगभग 1,300 किमी
रेजवान (Rezvan): लगभग 1,400 किमी
डिएगो गार्सिया का महत्व
डिएगो गार्सिया हिंद महासागर के मध्य में स्थित एक रणनीतिक एटोल द्वीप है. Diego Garcia एक छोटा लेकिन बेहद रणनीतिक द्वीप है, जो प्राकृतिक रूप से खूबसूरत होने के बावजूद आम लोगों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित है. यहां अमेरिका-ब्रिटेन का एक अत्यंत गोपनीय और महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा मौजूद है.
यह चागोस आर्किपैलगो का हिस्सा है, जो ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी के तहत आता है और मुख्य रूप से अमेरिका द्वारा संचालित किया जाता है. हालांकि, इसे लेकर लंबे समय से विवाद और रहस्य जुड़े रहे हैं. यहां पर ब्रिटेन व मॉरीशस के बीच क्षेत्रीय विवाद भी है, हालांकि, पिछले साल इसे लेकर ब्रिटिश संसद में एक कानून पारित कर मॉरीशस के साथ समझौता किया गया है.
यह अड्डा अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और एशिया तक फैले बड़े क्षेत्र में हवाई और नौसैनिक अभियानों के लिए एक अहम केंद्र है. यहां से लंबी दूरी के बमवर्षक विमान उड़ान भरते हैं और नौसैनिक तैनाती, पनडुब्बियों व निगरानी मिशनों को समर्थन मिलता है. यह क्षेत्रीय संकट के समय तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए सबसे मुफीद जगह है.
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इसका आम जनता से दूर होना इसे सैन्य सामान, ईंधन और उपकरणों के भंडारण के लिए सुरक्षित बनाता है. यहां पहुंचना बेहद कठिन है, क्योंकि कोई कमर्शियल फ्लाइट नहीं आती है. यहां पर विशेष अनुमति के बाद ही समुद्री रास्ते से पहुंचा जा सकता है. यहां से सबसे नजदीक भूमि मालदीव है, जो 726 किमी दूर है.
इस बेस ने इराक युद्ध और अफगानिस्तान युद्ध जैसे अमेरिकी सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. यहां से अमेरिका- ईरान और चीन जैसी प्रतिद्वंद्वी ताकतों की गतिविधियों पर नजर रख सकता है. इसकी भौगोलिक अलगाव और मजबूत सुरक्षा इसे अमेरिका के सबसे सुरक्षित विदेशी सैन्य ठिकानों में से एक बनाती है.
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