Hantavirus: नीदरलैंड के झंडे वाले एमवी हॉनडियस क्रूज जहाज में हंटावायरस के प्रकोप ने हड़कंप मचा दिया है. इस संक्रमण के चलते अब तक तीन यात्रियों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य बीमार बताए जा रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 24 अप्रैल को दर्जनों यात्री बिना संपर्क ट्रेसिंग पूरी हुए जहाज से उतरकर चले गए. इससे लगभग दो सप्ताह पहले ही जहाज पर संक्रमण से पहली मौत दर्ज की गई थी. जहाज संचालक कंपनी और नीदरलैंड के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है. पहला मामला 11 अप्रैल को सामने आया था, जब एक डच नागरिक की मौत के बाद उसका शव सेंट हेलेना के एक द्वीप पर उतारा गया. बाद में उसकी पत्नी भी जहाज से उतर गई और दक्षिण अफ्रीका चली गई, जहां उसकी भी मौत हो गई. इस घटना ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया.
29 यात्रियों की तलाश जारी
जहाज संचालक कंपनी ने बताया कि करीब 29 यात्री जहाज छोड़कर चले गए, जबकि नीदरलैंड के विदेश मंत्रालय के अनुसार यह संख्या करीब 40 तक हो सकती है. कंपनी ने पहले इस बात से इनकार किया था कि इतनी बड़ी संख्या में लोग जहाज छोड़ चुके हैं. नीदरलैंड स्थित कंपनी Oceanwide Expeditions ने यह भी बताया कि जहाज से उतरे यात्रियों में कम से कम 12 विभिन्न देशों के नागरिक शामिल थे. अब दक्षिण अफ्रीका और यूरोप के कई देश इन यात्रियों की ट्रेसिंग में जुटे हुए हैं.
तीन लोगों को इलाज के लिए भेजा गया यूरोप
स्वास्थ्य एजेंसियों के अनुसार, जहाज पर सवार कई लोगों में हंटावायरस की पुष्टि हुई है. बुधवार (6 मई) को यह भी सामने आया कि सेंट हेलेना द्वीप पर जहाज से उतरा एक यात्री स्विट्जरलैंड में संक्रमित पाया गया, जिसके बाद वह अपने घर लौट गया. इसके अलावा, जहाज पर सवार एक ब्रिटिश व्यक्ति को असेंशन द्वीप से निकालकर दक्षिण अफ्रीका ले जाया गया, जबकि केप वर्डे के पास जहाज से एक ब्रिटिश डॉक्टर सहित तीन लोगों को इलाज के लिए यूरोप भेजा गया.
WHO ने की पांच मामलों की पुष्टि
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, अब तक पांच मामलों में हंटावायरस संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जबकि आठ संदिग्ध मामलों पर जांच जारी है. संगठन ने बताया कि तीन लोगों की मौत हो चुकी है और जहाज पर अभी भी कई लोग निगरानी में हैं.
कैसे फैलता है हंटा वायरस?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया है कि हंटावायरस आमतौर पर चूहों के मल, मूत्र या लार से फैलता है और संक्रमित कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं. हालांकि, व्यक्ति से व्यक्ति में इसका फैलाव बहुत दुर्लभ माना जाता है. बता दें, इसके पहले साल 2019 में दुनिया में कोरोना का कहर फैला था. दुनिया के सभी देश इससे प्रभावित हुए थे. लाखों की संख्या में लोगों की कोरोना और उसके अलग-अलग वेरिएंट के कारण मौत हुई थी.
