France New Aircraft Carrier: दुनिया की राजनीति और जंग के हालात तेजी से बदल रहे हैं. ऐसे में हर देश अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क है. फ्रांस भी पीछे नहीं रहना चाहता. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने साफ कर दिया है कि उनका देश समुद्र में अपनी ताकत कम नहीं होने देगा. इसी सोच के तहत फ्रांस अब एक नया और ज्यादा ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने जा रहा है, जो उसके मौजूदा युद्धपोत चार्ल्स डी गॉल की जगह लेगा.
France New Aircraft Carrier in Hindi: यूएई में सैनिकों के बीच किया बड़ा ऐलान
रॉयटर्स के अनुसार, राष्ट्रपति मैक्रों ने यह बड़ा फैसला उस वक्त बताया जब वे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दौरे पर थे. उन्होंने अबू धाबी के एक फ्रांसीसी सैन्य अड्डे पर तैनात सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि नए एयरक्राफ्ट कैरियर को बनाने और विकसित करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है. यह सैन्य अड्डा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास है, जिसे दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में गिना जाता है. मैक्रों के मुताबिक, नया एयरक्राफ्ट कैरियर साल 2038 में फ्रांसीसी नौसेना में शामिल होगा. उसी समय फ्रांस का मौजूदा और इकलौता परमाणु ऊर्जा से चलने वाला एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गॉल रिटायर हो जाएगा. यह नया जहाज उसकी जगह लेगा और आने वाले कई दशकों तक फ्रांस की समुद्री ताकत की रीढ़ बनेगा.
France New Aircraft Carrier Macron Announcement in Hindi: कितना खास होगा नया युद्धपोत?
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नया एयरक्राफ्ट कैरियर Porte-Avions Nouvelle Génération (PANG) प्रोग्राम के तहत बनाया जाएगा. यह मौजूदा चार्ल्स डी गॉल से आकार में बड़ा और तकनीक में ज्यादा आधुनिक होगा. इसका मकसद फ्रांस को दुनिया के किसी भी हिस्से में अपनी सैन्य ताकत दिखाने में सक्षम बनाना है. सैनिकों से बात करते हुए मैक्रों ने कहा कि हमें मजबूत होना जरूरी है, ताकि हमसे डर बना रहे, खासकर समुद्र में. मैक्रों के मुताबिक, यह फैसला पूरी तरह जांच और समीक्षा के बाद लिया गया है और इसी हफ्ते इसे मंजूरी दी गई. उन्होंने कहा कि यह कदम फ्रांस की पुरानी रणनीति और जरूरतों के हिसाब से बिल्कुल सही है.
रक्षा कानून के तहत लिया गया बड़ा फैसला
यह पूरा फैसला फ्रांस के Military Programming Law (LPM) 2024-2030 का हिस्सा है. इस कानून को फ्रांसीसी संसद ने मंजूरी दी है. इसका मकसद अगले 7 साल में सेना की ताकत बढ़ाना और रक्षा खर्च में इजाफा करना है. इस योजना के तहत फ्रांस 2024 से 2030 के बीच करीब 460 अरब डॉलर रक्षा क्षेत्र में खर्च करेगा, जो पिछले बजट से करीब 40 फीसदी ज्यादा है.
रूस-यूक्रेन युद्ध से बदली सुरक्षा सोच
मैक्रों के मुताबिक, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया का माहौल बदला है. मॉस्को के साथ बढ़ते तनाव और बदलती वैश्विक राजनीति ने फ्रांस को अपनी सुरक्षा नीति पर दोबारा सोचने को मजबूर किया है. इसी वजह से फ्रांस अपनी सेना और नौसेना को ज्यादा मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है. 27 नवंबर को राष्ट्रपति मैक्रों ने एक और अहम ऐलान किया था.
उन्होंने कहा था कि फ्रांस में स्वैच्छिक सैन्य सेवा को दोबारा शुरू किया जाएगा. करीब 30 साल पहले फ्रांस ने अनिवार्य भर्ती खत्म कर दी थी, लेकिन अब 18 से 19 साल के युवा 10 महीने की सेवा के लिए स्वेच्छा से सेना में शामिल हो सकेंगे. मैक्रों ने साफ किया था कि इन युवाओं को देश के बाहर नहीं भेजा जाएगा, वे सिर्फ फ्रांस में ही तैनात रहेंगे. (France New Aircraft Carrier Macron Announcement Charles De Gaulle Replacement in Hindi)
कितने युवा जुड़ेंगे सेना से?
योजना के मुताबिक, अगले साल से 3,000 युवा इस योजना के तहत सेना में शामिल होंगे. इसके बाद संख्या धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी. लक्ष्य है कि 2030 तक 10,000 और 2035 तक 50,000 युवा सेना का हिस्सा बनें. फिलहाल फ्रांस के पास करीब 2 लाख सक्रिय सैनिक और 47,000 रिजर्व सैनिक हैं. सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक यह संख्या बढ़कर 2.10 लाख सक्रिय सैनिक और 80,000 रिजर्व सैनिक तक पहुंच जाए.
रक्षा उद्योग को भी मिलेगा बड़ा फायदा
मैक्रों के अनुसार, नया एयरक्राफ्ट कैरियर सिर्फ सेना को मजबूत नहीं करेगा, बल्कि फ्रांस की रक्षा उद्योग को भी नया जीवन देगा. इस परियोजना से सैकड़ों कंपनियां, खासकर छोटी और मझोली कंपनियां, जुड़ेंगी. उन्होंने कहा कि वे खुद इन कंपनियों के समर्थन में खड़े रहेंगे और अगले साल शिपयार्ड का दौरा भी करेंगे.
ये भी पढ़ें:
400 साल बाद बंद हो रही पोस्टल सर्विस, 30 दिसंबर होगा आखिरी दिन, केवल यादों में रह जाएगा लाल बक्सा
