खाड़ी के 3 नेताओं ने की अपील, तो ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमले को टाला, अब बातचीत से समाधान

Donald Trump Iran Attack Delay: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को कुछ दिनों के लिए टाल दिया है. उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, कतर और यूएई के नेताओं ने उनसे अपील की थी. ट्रंप ने बताया कि इन देशों की ईरान के साथ गंभीर बातचीत चल रही है. इसके जरिए समाधान की उम्मीद है.

Donald Trump Iran Attack Delay: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल कुछ समय के लिए टाल दिया है. ट्रंप ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान के साथ बड़े स्तर पर बातचीत चल रही है. कई देशों ने अमेरिका से कुछ दिन इंतजार करने की अपील की थी. ट्रंप ने बताया कि सऊदी अरब, कतर, यूएई और कुछ अन्य देशों ने अमेरिका से अनुरोध किया था कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई को दो या तीन दिन के लिए रोक दिया जाए. इन देशों को लगता है कि बातचीत के जरिए समझौता होने की संभावना काफी बढ़ी है.

ट्रंप ने बताया कि खाड़ी के तमीम बिन हमाद अल थानी, मोहम्मद बिन सलमान और मोहम्मद बिन जाएद अल नाहयान, क्रमशः कतर, सऊदी अरब और यूएई के शीर्ष नेताओं ने उनसे सीधे संपर्क कर अमेरिका से कार्रवाई टालने की अपील की थी. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लंबा बयान जारी किया.

ट्रंप ने कहा कि इन नेताओं की ईरान के साथ ‘गंभीर बातचीत’ चल रही है और समझौते की संभावना बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि उनसे ईरान के खिलाफ तय सैन्य कार्रवाई को कुछ समय के लिए रोकने का अनुरोध किया गया है. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि संभावित समझौते का मकसद यह सुनिश्चित करना होगा कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके.

डोनाल्ड ट्रंप के ट्रुथ सोशल पोस्ट का स्क्रीनशॉट.

‘उम्मीद है हमला हमेशा के लिए टल जाए’

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने हमले को ‘कुछ समय के लिए’ रोका है. उम्मीद है कि यह फैसला हमेशा के लिए साबित हो सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम नतीजा बातचीत की सफलता पर निर्भर करेगा. उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि इसका सकारात्मक परिणाम निकलेगा. अगर बिना बमबारी के मामला सुलझ जाए तो मुझे बहुत खुशी होगी.’

हालांकि ट्रंप ने बातचीत को मौका देने की बात कही, लेकिन साथ ही उन्होंने ईरान को कड़ी चेतावनी भी दी. उन्होंने कहा कि यदि बातचीत विफल होती है तो अमेरिका बड़े स्तर पर हमला करने के लिए तैयार रहेगा. ट्रंप के अनुसार, उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, ज्वाइंट चीफ्स चेयरमैन डैनियल केन और अमेरिकी सेना को निर्देश दिया है कि वे किसी भी संभावित बड़े सैन्य अभियान के लिए पूरी तरह तैयार रहें.

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खाड़ी देशों में बढ़ी चिंता

पिछले कई महीनों से कतर, सऊदी अरब और यूएई पर ईरान समर्थित हमलों का दबाव बढ़ा है. ईरान पर 28 फरवरी से हुए हमलों के जवाब में उसने इन देशों पर जवाबी अटैक किए थे. तेहरान का कहना है कि उसका निशाना अमेरिकी सैन्य ठिकाने और अमेरिका के सहयोगी देश हैं. ऐसे में इन तीनों देशों का एक साथ ट्रंप से संपर्क करना काफी अहम माना जा रहा है. माना जा रहा है कि खाड़ी देश अब अमेरिका और ईरान के बीच किसी बड़े सैन्य टकराव को रोकना चाहते हैं.

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ट्रंप ने ईरान का शांति प्रस्ताव किया था खारिज

ईरान ने अमेरिका के साथ शांति की पहल पहले भी की थी. लेकिन ट्रंप प्रशासन ने ईरान की ओर से भेजे गए 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रस्ताव अमेरिका की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा और इससे किसी ठोस समझौते की दिशा में खास प्रगति नहीं दिखी. इस बीच पाकिस्तान एक बार फिर से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में सक्रिय हो गया है. 

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान का संशोधित प्रस्ताव रविवार रात पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया था. हालांकि अमेरिकी प्रशासन इस नए प्रस्ताव से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आ रहा. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया कि नए प्रस्ताव में पहले की तुलना में केवल मामूली बदलाव किए गए थे.

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परमाणु कार्यक्रम पर अड़ी है ईरान सरकार

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका सीमित स्तर पर ईरान को अंतरराष्ट्रीय परमाणु निगरानी एजेंसी की देखरेख में शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियां जारी रखने की छूट देने पर विचार कर रहा है. लेकिन दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद अब भी कायम हैं. इनमें प्रतिबंधों में राहत, ईरान की जब्त संपत्तियां और होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा शामिल हैं.

वहीं ईरान ने यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से पीछे हटने से इनकार कर दिया है. तेहरान युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा, भविष्य में सैन्य कार्रवाई न होने की गारंटी और ईरानी तेल निर्यात व बंदरगाहों पर लगे प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहा है. ट्रंप के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करे और इसके लिए कूटनीतिक रास्ते को अंतिम मौका दिया जा रहा है. 

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अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखी

इन वार्ताओं के बीच, यूएस सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने सोमवार को कहा कि अमेरिकी सेना ईरानी बंदरगाहों पर लागू प्रतिबंधों को सख्ती से लागू कर रही है. CENTCOM ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर बताया कि अमेरिकी बल अब तक 85 व्यावसायिक जहाजों का रास्ता बदल चुके हैं ताकि अमेरिकी नाकेबंदी का पूरी तरह पालन हो सके. 

परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ा तनाव

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. अमेरिका का मानना है कि ईरान के पास अब भी लगभग 460 किग्रा संवर्धित यूरेनियम है. वॉशिंगटन एक तरफ बातचीत के जरिए समाधान तलाश रहा है, वहीं दूसरी ओर सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप अब भी समझौते के पक्ष में हैं, लेकिन तेहरान की ओर से जरूरी शर्तें स्वीकार न किए जाने से उनकी नाराजगी बढ़ती जा रही है.

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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