ताइवान पर हमला करेगा चीन? ड्रैगन बोला- 'झूठ फैला रहा है अमेरिका', जानें पूरा मामला

China Taiwan Conflict: अमेरिकी इंटेलिजेंस की एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि चीन अगले साल यानी 2027 तक ताइवान पर हमला करने के मूड में नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग बिना ताकत का इस्तेमाल किए इस द्वीप पर कंट्रोल करना चाहता है.

China Taiwan Conflict: चीन ने इस रिपोर्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने गुरुवार, 19 मार्च को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वॉशिंगटन को ‘चीन के खतरे’ वाली थ्योरी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना बंद करना चाहिए. चीन ने अमेरिका को सलाह दी है कि वह ताइवान के मुद्दे पर सोच-समझकर बोले और अपनी समझ सुधारे.

ताइवान ने कहा- खतरा अभी टला नहीं है

भले ही अमेरिकी रिपोर्ट में हमले की बात न कही गई हो, लेकिन ताइवान इसे हल्के में नहीं ले रहा है. शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को ताइवान के रक्षा मंत्री वेलिंगटन कू ने संसद में कहा कि चीन लगातार अपनी मिलिट्री ताकत बढ़ा रहा है, जो हमारे लिए एक बड़ा खतरा है.

उन्होंने साफ किया कि चीन ने अभी तक हमले का रास्ता नहीं छोड़ा है और न ही उसने अपने सैन्य खर्च में कमी की है. कू के अनुसार, ताइवान को अपनी सुरक्षा इतनी मजबूत करनी होगी कि चीन अगर हमले का सोचे भी, तो उसे इसमें बहुत बड़ा रिस्क नजर आए.

डिफेंस बजट पर ताइवान में मची रार

ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने देश की सुरक्षा के लिए 40 अरब डॉलर के एक्स्ट्रा बजट का प्रस्ताव रखा है. हालांकि, यह मामला अभी संसद में अटका हुआ है. विपक्ष का कहना है कि यह प्लान काफी धुंधला है और वे बिना पूरी जानकारी के ‘ब्लैंक चेक’ पर साइन नहीं करेंगे.

इस बीच, राष्ट्रपति लाई गुरुवार, 19 मार्च को ताइवान की नई स्वदेशी पनडुब्बी (सबमरीन) देखने पहुंचे, जिसका अभी सी-ट्रायल चल रहा है. रक्षा मंत्री ने बताया कि नीदरलैंड से ली गई पुरानी पनडुब्बियों को भी अपडेट किया जा रहा है, जिससे ताइवान की ताकत बढ़ेगी.

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मिडल ईस्ट के मुद्दे पर भी चीन का कड़ा स्टैंड

ताइवान के अलावा चीन ने ईरान के सीनियर लीडर अली लारीजानी की हत्या की भी निंदा की है. इजरायली हवाई हमले में हुई इस मौत को चीन ने ‘अस्वीकार्य’ बताया है. ईरान का करीबी पार्टनर होने के नाते चीन ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में ताकत के इस्तेमाल के खिलाफ है.

हालांकि, चीन ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों की भी आलोचना की है, जहां अमेरिकी मिलिट्री बेस हैं. चीन खुद को एक मध्यस्थ (मिडिएटर) के रूप में दिखा रहा है और उसने ईरान, लेबनान, जॉर्डन और इराक जैसे देशों को मानवीय मदद देने का वादा भी किया है.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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