Bangladesh Trade Problem with India-EU Trade Deal: 27 जनवरी 2026 को भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने एक बड़ा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किया. इस समझौते का मकसद ज्यादातर सामान पर लगने वाले टैक्स (कस्टम ड्यूटी) कम करना और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाना है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ तक कहा. लेकिन बांग्लादेश के लिए यह अच्छी खबर नहीं है. ऐसे समय में जब बांग्लादेश एक गरीब देशों की सूची (LDC) से बाहर निकलने की तैयारी कर रहा है, उसका सबसे बड़ा निर्यात बाजार और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनने जा रहा है. भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता बांग्लादेश पर गहरा प्रभाव डालने वाला है.
अभी इस समझौते को पूरी तरह लागू होने से पहले कानूनी जांच और दोनों पक्षों की मंजूरी जैसी औपचारिकताएं पूरी करनी हैं. यूरोपीय संसद तथा भारतीय संसद की मंजूरी मिलने के बाद 2027 में लागू होने की उम्मीद है. समझौते के लागू होते ही यूरोपीय बाजार में भारतीय परिधानों पर लगने वाला 12 प्रतिशत शुल्क समाप्त हो जाएगा, जिससे बांग्लादेश को वर्तमान में प्राप्त बढ़त खत्म हो सकती है. डिप्लोमैट की रिपोर्ट के मुताबिक, फिर भी दिशा साफ है कि EU अब दक्षिण एशिया में भारत को अपना मुख्य आर्थिक साझेदार बनाना चाहता है. इस डील के तहत EU लगभग 90 प्रतिशत भारतीय सामान पर तुरंत टैक्स हटा देगा और सात साल में यह दायरा 93 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा. यानी, ज्यादातर सामान बिना टैक्स के व्यापार में आएंगे.
बांग्लादेश के लिए सबसे बड़ा असर कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट सेक्टर पर पड़ेगा. अभी तक भारतीय कपड़ों पर EU में 9 से 12 प्रतिशत तक टैक्स लगता था, जो अब खत्म हो जाएगा. इसी तरह चमड़े के सामान और जूतों पर लगने वाला ऊंचा टैक्स भी घटेगा. इसका मतलब है कि बांग्लादेश को जो फायदा एक गरीब देश (LDC) होने के कारण मिलता था, वह धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा. भारत पहले से ही कपास से लेकर तैयार कपड़े तक पूरी उत्पादन श्रृंखला वाला बड़ा देश है, इसलिए अब वह सीधे टक्कर दे सकेगा.
बांग्लादेश की कंपटीशन करने की क्षमता कम हो जाएगी
बांग्लादेश के सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग (CPD) के सीनियर फेलो मुस्तफिजुर रहमान ने द डेली स्टार से कहा, “जैसे ही भारत को ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी, EU बाजार में बांग्लादेश की कंपटीशन करने की क्षमता कम हो जाएगी.” बांग्लादेश दोहरे झटके का सामना कर रहा है, क्योंकि वह फिलहाल यूरोपीय संघ को बिना किसी शुल्क के कपड़े निर्यात कर रहा है, लेकिन यह व्यवस्था अब से केवल तीन और वर्षों (2029) तक मान्य रहेगी. यह इसी साल नवंबर से शुरू होगी. इसके बाद बांग्लादेश अल्प विकसित देश (LDC) श्रेणी से बाहर हो जाएगा.
ईयू, बांग्लादेश का सबसे बड़ा खरीददार
बांग्लादेश को 1975 में LDC सुविधा के तहत यूरोपीय संघ को बिना किसी शुल्क के सामान बेचने की सुविधा मिली थी. इसके तहत बांग्लादेश EU को परिधान निर्यात करने वाला चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया. लेकिन, अब बांग्लादेश को उस बाजार में झटका लग सकता है, जिस पर उसकी सबसे ज्यादा निर्भरता है. EU बांग्लादेश का सबसे बड़ा खरीदार है, और वहां जाने वाले ज्यादातर सामान कपड़े ही होते हैं. 2024 में EU ने बांग्लादेश से जो भी सामान खरीदा, उसमें करीब 94 प्रतिशत हिस्सा कपड़ा और गारमेंट का था. पिछले साल बांग्लादेश के कुल निर्यात का लगभग 44 प्रतिशत सिर्फ EU गया.
अगर यूरोप के खरीदार भारत से ज्यादा खरीदने लगते हैं, तो इसका सीधा असर बांग्लादेश की कमाई, फैक्ट्रियों और नौकरियों पर पड़ेगा. EU और बांग्लादेश के बीच सामान का व्यापार 22 अरब यूरो से ज्यादा है और इसमें बांग्लादेश को बड़ा फायदा (ट्रेड सरप्लस) होता है. अगर EU के खरीदारों का रुख बदलता है, तो बांग्लादेश की विदेशी मुद्रा आय पर दबाव बढ़ेगा. साफ शब्दों में कहें तो यह समझौता बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की नींव यानी गारमेंट उद्योग के लिए खतरे की घंटी है.
अगर 3 साल में GSP+ जैसी सुविधा नहीं मिली, तो बांग्लादेश मुश्किल में होगा
बांग्लादेश को अब तक EU में बिना टैक्स के सामान बेचने की छूट ‘एवरीथिंग बट आर्म्स’ (EBA) योजना के तहत मिलती रही है. लेकिन 2026 में LDC दर्जा खत्म होने के बाद उसे कुछ साल की राहत मिलेगी, जो नवंबर 2029 तक चलेगी. उसके बाद अगर बांग्लादेश GSP+ जैसी नई सुविधा हासिल नहीं करता या EU के साथ अलग समझौता नहीं करता, तो कपड़ों पर लगभग 12 प्रतिशत टैक्स लग सकता है. अगर भारत बिना टैक्स के सामान बेचे और बांग्लादेश को 12 प्रतिशत देना पड़े, तो कई फैक्ट्रियों के लिए टिके रहना मुश्किल हो जाएगा. इसका बांग्लादेश के 50 प्रतिशत से अधिक परिधान व्यापार पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा.
भारत के पास संसाधन, यह एक बड़ा फायदा
असल असर 2029 से पहले ही दिख सकता है. कपड़े का कारोबार बहुत हद तक कीमत पर चलता है. जो सामान सस्ता और जल्दी मिल जाए, खरीदार वहीं से खरीदते हैं. अब यूरोपीय ब्रांड भारत से भी बिना टैक्स के खरीद सकेंगे. भारत के पास अपना कच्चा माल है, जिससे सामान जल्दी बन सकता है और सप्लाई में कम दिक्कत आती है. इसके अलावा, इस समझौते से जुड़ी आसान व्यापार प्रक्रियाएं यूरोपीय कंपनियों को अपनी फैक्ट्रियां भारत में लगाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं, खासकर वे कंपनियां जो चीन पर निर्भरता कम करना चाहती हैं. इसके अलावा, भारतीय सरकार की पीएलआई जैसी वित्तीय नीतियां भी भारतीय कंपनियों को काफी लाभ पहुंचाती हैं.
बांग्लादेश के लिए सबकुछ ऑल लॉस्ट नहीं है
डिप्लोमैट की रिपोर्ट के अनुसार, इसका मतलब यह नहीं कि बांग्लादेश का बाजार पूरी तरह खत्म हो जाएगा. लेकिन अब सिर्फ पुराने टैक्स फायदे के भरोसे काम नहीं चलेगा. बांग्लादेश को नई रणनीति अपनानी होगी. सबसे जरूरी है कि 2029 को एक तय डेडलाइन मानकर GSP+ का दर्जा पाने की तैयारी की जाए. इसके लिए श्रमिक अधिकार, मानवाधिकार और पर्यावरण से जुड़ी 32 अंतरराष्ट्रीय शर्तें पूरी करनी होंगी.
हालांकि, बांग्लादेश के लिए सबकुछ खत्म होने वाली स्थिति नहीं है. 8 जनवरी को बांग्लादेश और EU के बीच एक बड़े साझेदारी समझौते (PCA) पर बातचीत का पांचवां दौर पूरा हुआ. यह समझौता आगे चलकर व्यापार और निवेश के लिए मजबूत आधार बन सकता है. बांग्लादेश को इस मौके का फायदा उठाकर 2029 के बाद भी EU बाजार में टिका रह सकता है.
यूरोप और दक्षिण एशिया के बीच व्यापार का नया संतुलन बन रहा है, जिसमें भारत को खास जगह मिल रही है. बांग्लादेश ने अब तक टैक्स छूट और मेहनती उद्योग के दम पर निर्यात में बड़ी सफलता हासिल की. अब असली चुनौती यह है कि वह बिना खास छूट के भी भारत जैसे मजबूत पड़ोसी से कैसे मुकाबला करता है. तैयारी के लिए अभी थोड़ा समय है, लेकिन यह मौका हमेशा खुला नहीं रहेगा.
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