Bangladesh Elections: बांग्लादेश कल यानी 12 फरवरी को अपने 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव और एक बड़े ‘नेशनल रेफरेंडम’ (जनमत संग्रह) के लिए पूरी तरह तैयार है. शेख हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बाद हो रहे इन चुनावों को लेकर पूरे देश में जबरदस्त उत्साह है. दिलचस्प बात यह है कि चुनाव आयोग के कड़े नियमों की वजह से ढाका की सड़कें इस वक्त सिर्फ काले और सफेद रंग में रंगे पोस्टरों से पटी पड़ी हैं, जिससे शहर का लुक काफी विंटेज और अलग नजर आ रहा है.
स्कूल बने पोलिंग बूथ
चुनाव आयोग की गाइडलाइंस के मुताबिक, उम्मीदवारों को दीवारों पर पोस्टर चिपकाने की इजाजत नहीं थी. इसलिए नेताओं ने रस्सियों के सहारे काले और सफेद पोस्टर लटकाए हैं. ‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, ढाका के मीरपुर में स्थित आनंद निकेतन गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल जैसे हजारों स्कूलों को पोलिंग सेंटर में बदल दिया गया है. 20 दिनों का धुआंधार प्रचार कल खत्म हो चुका है और अब सबकी नजरें कल सुबह 7:30 बजे से शुरू होने वाली वोटिंग पर हैं.
12.77 करोड़ वोटर्स और 300 में से 299 सीटों पर जंग
इस बार कुल 12.77 करोड़ से ज्यादा लोग वोट डालने के हकदार हैं. इनमें 6.48 करोड़ पुरुष और 6.28 करोड़ महिलाएं शामिल हैं. देश की 300 संसदीय सीटों में से 299 पर वोट डाले जाएंगे (एक सीट पर उम्मीदवार की मौत की वजह से चुनाव टाल दिया गया है).
कैंडिडेट्स: 50 पार्टियों के 1,755 उम्मीदवार मैदान में हैं.
इंडिपेंडेंट: 273 निर्दलीय उम्मीदवार भी किस्मत आजमा रहे हैं.
महिला शक्ति: कुल 83 महिलाएं (63 पार्टी टिकट पर और 20 निर्दलीय) चुनाव लड़ रही हैं.
क्या है ‘जुलाई नेशनल चार्टर’ का रेफरेंडम?
वोटर्स सिर्फ अपनी सरकार ही नहीं चुनेंगे, बल्कि ‘जुलाई नेशनल चार्टर’ पर अपनी राय भी देंगे. यह चार्टर देश में बड़े संवैधानिक सुधारों का एक रोडमैप है. चीफ एडवाइजर प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि यह चुनाव नए बांग्लादेश का जन्मदिन साबित होगा.
सुरक्षा के भारी इंतजाम: 1.87 लाख पुलिसकर्मी तैनात
चुनाव शांतिपूर्ण रहे, इसके लिए सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है. आईजीपी बहारुल आलम के मुताबिक, सुरक्षा के तीन लेयर (स्टेटिक, मोबाइल और रैपिड रिस्पांस) बनाए गए हैं. कुल 1,87,603 पुलिस अधिकारी तैनात किए गए हैं. चुनाव आयुक्त ब्रिगेडियर जनरल (रिटायर्ड) अबुल फजल मोहम्मद सनाउल्लाह ने बताया कि कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर स्थिति कंट्रोल में है, हालांकि उन्होंने शरारती तत्वों से सावधान रहने की चेतावनी भी दी है.
इंटरनेशनल ऑब्जर्वर्स की भारी भीड़: पिछली बार से दोगुना सपोर्ट
इस बार चुनाव की निगरानी के लिए दुनिया भर से लोग आए हैं. चीफ एडवाइजर के प्रेस विंग के मुताबिक, 394 इंटरनेशनल ऑब्जर्वर्स और 197 विदेशी पत्रकार बांग्लादेश पहुंच चुके हैं.
यूरोपीय संघ (EU): 200 से ज्यादा ऑब्जर्वर्स भेजे हैं.
प्रमुख नाम: घाना के पूर्व राष्ट्रपति नाना अडो डंकवा अकुफो-अडो और भूटान की मुख्य चुनाव आयुक्त डेकी पेमा जैसे हाई-प्रोफाइल लोग यहां मौजूद हैं.
देश: पाकिस्तान (8), तुर्किये (13), श्रीलंका (11), चीन (3), और जापान (4) समेत कुल 21 देशों से एक्सपर्ट्स आए हैं.
यह संख्या 2024 के पिछले विवादास्पद चुनाव (158 ऑब्जर्वर्स) के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा है, जो इस चुनाव की ग्लोबल वैल्यू को दर्शाता है.
अल्पसंख्यकों के मन में डर- हर बार हम ही निशाना क्यों?
सकारात्मक माहौल के बीच, हिंदू अल्पसंख्यक समुदायों में डर का माहौल भी है. ‘द डेली स्टार’ से बातचीत में चटगांव के एक हिंदू युवक ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हार-जीत किसी की भी हो, अक्सर निशाना अल्पसंख्यकों को बनाया जाता है. वहीं रंगपुर के एक किसान मनोरंजन शील ने बताया कि वे जुलाई में हुए हमलों के सदमे से अब तक बाहर नहीं आ पाए हैं और डरे हुए हैं.
रिजल्ट कब आएगा?
वोटिंग कल शाम 4:30 बजे तक चलेगी. चुनाव आयोग ने उम्मीद जताई है कि नतीजों की घोषणा शुक्रवार, 13 फरवरी को कर दी जाएगी. यह चुनाव न केवल बांग्लादेश बल्कि भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.
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