बांग्लादेश चुनाव 2026: शेख हसीना के जाने के बाद पहली बार वोटिंग; क्या चुनाव से बदलेगी देश की किस्मत?

Bangladesh Elections 2026: शेख हसीना के जाने के बाद क्या फिर बदलेगी किस्मत? जानें कौन बनेगा नया प्रधानमंत्री और किन मुद्दों पर टिका है वोटर्स का भरोसा. करप्शन, महंगाई और बेरोजगारी के बीच क्या 'जुलाई नेशनल चार्टर' लाएगा असली बदलाव? वोटिंग से लेकर नतीजों तक सब कुछ जानें.

Bangladesh Elections 2026: बांग्लादेश में एक बड़े बदलाव की तैयारी पूरी हो चुकी है. करीब 15 साल तक सत्ता में रहीं शेख हसीना के देश छोड़कर जाने के बाद, कल यानी 12 फरवरी को पहली बार नेशनल इलेक्शन होने जा रहे हैं. पिछले 18 महीनों से नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार देश चला रही थी, लेकिन अब जनता तय करेगी कि कमान किसके हाथ में होगी.

क्यों हो रहा है यह चुनाव? 

बांग्लादेश में ये सब तब शुरू हुआ जब 2024 में स्टूडेंट्स ने सड़कों पर उतरकर हसीना सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. चुनाव में धांधली और तानाशाही के आरोपों के बीच हिंसा भड़की, जिसमें कई लोगों की जान गई. आखिरकार शेख हसीना को इस्तीफा देकर भारत आना पड़ा. अब यह चुनाव केवल नई सरकार चुनने के लिए नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र को फिर से पटरी पर लाने का एक बड़ा टेस्ट है.

मैदान में कौन-कौन है?

रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि इस बार मुकाबला मुख्य रूप से दो बड़े गठबंधनों के बीच है:

पार्टी/गठबंधनमुख्य चेहरासीटेंखास वादा
BNP गठबंधनतारिक रहमानकरीब 300अर्थव्यवस्था और करप्शन फ्री देश
NCP (छात्र नेता)युवा एक्टिविस्टकरीब 298यूथ रिफॉर्म्स और नए नियम
इस्लामिक ग्रुपशफीकुर रहमानकई सीटों परधार्मिक और नैतिक मूल्य

1. BNP गठबंधन (तारिक रहमान): बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के पास इस समय बढ़त मानी जा रही है. इसके नेता तारिक रहमान हैं, जो पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे हैं. उनका वादा है कि कोई भी व्यक्ति 10 साल से ज्यादा पीएम नहीं रहेगा. साथ ही वे गरीबों को ‘फैमिली कार्ड’ के जरिए नकद मदद देने की बात कर रहे हैं.

2. जमात-ए-इस्लामी (शफीकुर रहमान): हसीना सरकार के वक्त बैन रही इस पार्टी की अब वापसी हुई है. इसके चीफ शफीकुर रहमान एक डॉक्टर हैं और खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक साफ-सुथरे विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं. हालांकि, महिलाओं को टिकट न देने और उनके काम को लेकर दिए गए बयानों से कई लोग डरे हुए भी हैं.

वोटर्स के लिए 5 सबसे बड़े मुद्दे

रॉयटर्स की रिपोर्ट कहती है कि लोग इन बातों को ध्यान में रखकर वोट देंगे:

करप्शन: यह सबसे बड़ा मुद्दा है. लोग करप्शन से तंग आ चुके हैं.

महंगाई: जनवरी में महंगाई दर 8.58% थी. आम आदमी के लिए घर चलाना मुश्किल हो रहा है.

इकोनॉमी: कोविड और दंगों के बाद गारमेंट इंडस्ट्री (जो बांग्लादेश की जान है) संकट में है.

रोजगार: देश की 40% आबादी 30 साल से कम उम्र की है, जिन्हें नौकरियां चाहिए.

आवामी लीग पर बैन: शेख हसीना की पार्टी इस चुनाव से बाहर है. सर्वे बताते हैं कि उनके आधे पुराने वोटर्स अब BNP की तरफ जा सकते हैं.

क्या है ‘जुलाई नेशनल चार्टर 2025’?

इस चुनाव के साथ-साथ एक ‘रेफरेंडम’ (जनमत संग्रह) भी हो रहा है. जनता से पूछा जाएगा कि क्या वे ‘जुलाई नेशनल चार्टर’ के सुधारों को मानते हैं? इसमें पीएम के कार्यकाल की सीमा तय करना, जजों को ज्यादा पावर देना और चुनाव कराने वाली संस्थाओं को मजबूत करने जैसे बड़े बदलाव शामिल हैं.

महिलाएं क्यों हैं टेंशन में?

बांग्लादेश में लंबे समय तक महिला प्रधानमंत्री (खालिदा जिया और शेख हसीना) रही हैं. लेकिन इस बार चुनाव में महिलाओं की भागीदारी कम दिख रही है. 22 साल की स्टूडेंट सायमा सुहा ने एपी को बताया कि देश में बढ़ती कट्टरपंथ की सोच उन्हें डरा रही है. जमात-ए-इस्लामी के बढ़ते प्रभाव से महिलाएं अपनी आजादी को लेकर फिक्रमंद हैं.

सुरक्षा के तगड़े इंतजाम

चुनाव आयुक्त अनवारुल इस्लाम सरकार के अनुसार, 12 फरवरी को होने वाली वोटिंग के लिए करीब 11 से 12 लाख सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे. हर बूथ पर पैनी नजर रखने के लिए CCTV कैमरे लगाए गए हैं.

नतीजे कब आएंगे? 

वोटिंग 12 फरवरी को होगी और वोटों की गिनती तुरंत शुरू हो जाएगी. चुनाव आयोग को उम्मीद है कि 13 फरवरी (शुक्रवार) की दोपहर तक फाइनल रिजल्ट आ जाएंगे. डिजिटल सिस्टम और ऑटोमेशन की वजह से इस बार नतीजे जल्दी आने की उम्मीद है.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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