न्यूयार्क : अफगान उग्रवादियों से जुड़े प्रतिबद्ध पाकिस्तानी जिहादियों ने देश के अशांत कबायली इलाके में अमेरिकी ड्रोन हमलों में मारे गए अलकायदा के शीर्ष नेताओं की जगह दूसरों को बागडोर सौंप दी है. इसे देखते हुए, विश्लेषकों ने वर्ष 2014 में अफगानिस्तान से अमेरिकी सेनाओं की वापसी के बाद ‘गहरा संकट’ उत्पन्न होने की आशंका जताई है. न्यूयार्क टाइम्स की आज की खबर में कहा गया है ‘अरबों डालर की सैन्य सहायता से लेकर गोपनीय ड्रोन हमलों तक शायद पाकिस्तान अब आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका के युद्ध में वाशिंगटन का ध्यान अफगानिस्तान की तुलना में कहीं ज्यादा केंद्रित किए हुए है.’
अखबार ने कहा है ‘हालांकि अलकायदा के कई वरिष्ठ नेता वहां शरण लिए हुए थे जिनको सीआईए के प्रक्षेपास्त्रों ने मार गिराया. अब इन नेताओं की जगह अफगानिस्तान की सीमा से रिश्ते रखने वाले पाकिस्तानी जिहादियों ने दूसरों को बागडोर सौंप दी है.’ पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर हिस्से में फैली कबायली पट्टी में बीते दशक में करीब 360 ड्रोन हमले हुए हैं जिनमें वहां छिपे अलकायदा के कई बड़े कमांडर मारे गए हैं. न्यूयार्क टाइम्स में कहा गया है ‘वाशिंगटन के दबाव में पाकिस्तान ने कुछ जिहादियों को गिरफ्तार करने में सीआईए की मदद की. लेकिन अफगान तालिबान और लश्कर ए तैयबा जैसे कुछ सशस्त्र उग्रवादी समूहों को वह चुपचाप पनाह दिए हुए है. इन उग्रवादी गुटों को अफगानिस्तान और भारत में पाकिस्तान के हितों को आगे बढ़ाने वाले के तौर पर देखा जा रहा है.’
अखबार में कहा गया है ‘अमेरिकी लड़ाकू सैनिक वर्ष 2014 में अफगानिस्तान से चले जाएंगे और पाकिस्तान में ड्रोन अभियान पहले ही नहीं के बराबर रह गया है. ऐसे में विश्लेषकों को आशंका है कि अगर पाकिस्तानी सेना खुद को निष्कर्षात्मक रुप से दृढ़ नहीं करती, तो कबायली क्षेत्र गहरे संकट में फंस सकता है.’एक पाकिस्तानी शिक्षाविद और रक्षा विश्लेष्शक हसन अस्करी रिजवी को अखबार ने यह कहते हुए उद्धृत किया है ‘बहुत बड़ी परेशानी आने वाली है.’ उन्होंने कहा ‘अगर अफगानिस्तान में उग्रवाद बढ़ता है तो वह पाकिस्तान के कबायली हिस्सों तक फैलेगा जहां तालिबान के हौसले और बढ़ेंगे.’ अखबार ने लिखा है कि 12 साल से अमेरिकी की सुरक्षा आधारित नीति ने पाकिस्तान की सत्ता, राजनीति और उग्रवाद पर असर डाला है. पाकिस्तान ऐसा देश है जहां न केवल जिहादी समूह सक्रिय हं बल्कि जिसके पास 100 से अधिक परमाणु आयुध हैं. हालिया वर्षों में पाकिस्तान में हुई हिंसा ने देश भर में सैकड़ों लोगों की जान ली है.
