वाशिंगटन : अमेरिका ने आतंकवाद से मुकाबले के लिए भारत से तालमेल करने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आह्वान किया है कि उन शरण स्थलियों और ढांचों को खत्म करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं जिनसे आतंकवाद को मदद मिलती है.
भारत के गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और अमेरिकी गृह सुरक्षा मंत्री जेनेट नैपोलितानो के बीच बातचीत के बाद जारी साझा बयान में कहा गया कि दोनों देशों ने आतंकवाद को मिल रही वित्तीय मदद और जाली नोटों के कारोबार का मुकाबला करने के लिए द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया.
भारत-अमेरिका द्वितीय गृह सुरक्षा वार्ता के समापन के बाद नैपोलितानो ने कल एक बयान में कहा, ‘‘आज, आतंक राष्ट्र की सीमा पार कर गया है जो समूचे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि पर असर डाल रहा है. हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं उसके लिए वैश्विक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए हम भारत के साथ तालमेल जारी रखेंगे.’’ शिंदे इस वार्ता में एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे हैं ,जो 2011 में शुरु हुयी थी.
बैठक के दौरान नैपोलितानो और शिंदे ने नवीन प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल और विकास के जरिए द्विपक्षीय सहयोग मजबूत बनाने और समान चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों के कानून प्रवर्तन मुद्दे पर सहयोग बढाने के प्रति प्रतिबद्धता जाहिर की.
गृह सुरक्षा विभाग ने एक बयान में कहा कि दोनों देश अवैध वित्तपोषण और जाली मुद्रा प्रवाह को रोकने के साथ ही आतंकवाद से मुकाबले और साइबर सुरक्षा को बढावा देने के लिए निकट सहयोग करने के लिए भी सहमत हुए.
अमेरिका और भारत दोनों उन क्षेत्रों की भी पहचान करने को राजी हुए जिसमें दोनों देश विज्ञान और तकनीक विकास पर सहयोग करें और इसका इस्तेमाल गृह सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य में कर सकें.
बयान में कहा गया है कि दोनों देश इस संबंध में भी अपने अनुभवों को साझा करेंगे कि हिंसक चरमपंथ की घटनाओं को बेहतर तरीके से चिन्हित करने, रोकने और इससे निपटने के लिए संघ, राज्य और स्थानीय पुलिस की क्षमता किस तरह बढायी जाए.
