संयुक्त राष्ट्र : भारत ने जोर दिया है कि महत्वाकांक्षी 2030 विकास एजेंडे के क्रियान्वयन के मद्देनजर विकासशील देशों की प्राथमिकताओं एवं आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र में भारत के नये स्थायी प्रतिनिधि राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने दक्षिण अफ्रीका से थाईलैंड को जी77 की अध्यक्षता सौंपे जाने के लिए आयोजित समारोह में कल कहा, ‘अदिस अबाबा कार्रवाई एजेंडे में शामिल प्रतिबद्धताओं के साथ साथ सतत विकास लक्ष्यों समेत 2030 एजेंडे को शीघ्रता और सद्भावना के साथ लागू किया जाना चाहिए.’
अकबरुद्दीन ने कहा, ‘इस प्रक्रिया में विकासशील देशों के उद्देश्यों, प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए.’ अकबरुद्दीन ने भारत के स्थायी मिशन में यहां पिछले सप्ताह कार्यभार संभालने के बाद वैश्विक संस्था में पहली बार बयान देते हुए कहा कि वर्ष 2015 वार्ता और विचार विमर्श का साल था तो ‘2016 सुदृढीकरण और कार्यान्वयन का वर्ष होना चाहिए.’ उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 को मुख्य रूप से सतत विकास के 2030 एजेंडे, अदिस अबाबा कार्रवाई एजेंडे और पेरिस समझौते के लिए जाना जाएगा.
अकबरुद्दीन ने जी 77 समूहों के सभी सदस्यों के साथ निकटता के काम करने और सभी विकासशील देशों के हितों को निजी एवं सामूहिक, दोनों रूपों से आगे बढाने की भारत की उच्च राजनीतिक प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने कहा, ‘हम कार्यान्वयन के चरण में आगे बढ रहे हैं, ऐसे में सम्मानपूर्वक जीवन जीने में हमारे लोगों की मदद करने की हमारी सामूहिक महत्वाकांक्षा के तहत जी 77 के संस्थापक सिद्धांत – समता, एकजुटता और एकता और अधिक प्रासंगिक हो गये हैं.’ अकबरुद्दीन ने कहा, ‘हमें इस वर्ष की जाने वालीं आगे की कार्रवाइयों में इन महत्वाकांक्षाओं को पूर्ण अर्थ देना होगा.’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत विकासशील देशों की एकता के लिए काम करने की दिशा में कृतसंकल्प होगा और अल्प विकसित देशों, छोटे विकासशील द्वीप राष्ट्रों एवं गैरतटीय विकासशील देशों के हितों पर विशेष ध्यान देने में कोई कसर बाकी नहीं छोडेगा. इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने समारोह में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राष्ट्रों को संबोधित करते हुए कहा कि ग्रह को बचाने, वैश्विक शांति के निर्माण एवं सभी के लिए स्थायी समृद्धि के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में वर्ष 2015 एक ‘नया मोड़’ है.
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा, ‘इस वर्ष एजेंडा 2030 को समर्थन देने वाले संयुक्त राष्ट्र की विकास प्रणाली के कार्यों को लेकर बहुत अपेक्षाएं हैं. सफलता की परीक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीनी स्तर पर क्या कदम उठाये जाते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘हमें इसे सही तरीके से करने की आवश्यकता है ताकि हमारा परिचालन एवं निर्देशात्मक कार्य समेकित हो सके और हम जहां सबसे अधिक महत्व है यानी राष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका निभा सकें.’
