जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में मतभेद कायम

ले बोरजे: जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन में समझौते को अंतिम रुप देने के लिए चल रही वार्ता में उभरे मतभेद दूर होने का नाम नहीं ले रहे. भारत और चीन जैसे देशों ने उत्सर्जन एवं वित्तपोषण जैसे मुद्दों पर अपने रख में नरमी बरतने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे आज संपन्न होने वाला […]

ले बोरजे: जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन में समझौते को अंतिम रुप देने के लिए चल रही वार्ता में उभरे मतभेद दूर होने का नाम नहीं ले रहे. भारत और चीन जैसे देशों ने उत्सर्जन एवं वित्तपोषण जैसे मुद्दों पर अपने रख में नरमी बरतने से साफ इनकार कर दिया है, जिससे आज संपन्न होने वाला यह सम्मेलन अब कल तक चलेगा ताकि गहन वार्ता के जरिए समझौते को अंतिम रुप दिया जा सके.

आखिरी पलों की कोशिशों के तहत अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर से मुलाकात की. केरी और जावडेकर पिछले तीन दिन में तीन बार मिल चुके हैं. जावडेकर ने कहा कि पेरिस समझौते की सफलता विकसित देशों की ओर से दिखाई जाने वाली सामंजस्य की भावना और लचीलेपन पर निर्भर करेगी.
भारत अपनी इस मांग पर कायम है कि अमेरिका जैसे विकसित देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में आने वाली लागत का ज्यादा हिस्सा वहन करना चाहिए.इस बीच, चीन ने अमेरिका और यूरोपीय संघ की ओर से किए जा रहे इस आह्वान का विरोध किया कि सभी देश हर पांच साल पर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती को लेकर बनाई गई अपनी राष्ट्रीय योजना की समीक्षा करेंगे. चीन ने इन मांगों को भी दोहराया कि विकसित देश ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के लिए ज्यादा प्रयास करें.
दुनिया के 195 देशों के राजनयिक निर्णायक विकासशील देशों से सीधे तौर पर जुडे मुद्दों पर मतभेद सुलझाने की कोशिशों में जुटे थे, लेकिन वह आज रात तक की समयसीमा में किसी समझौते तक नहीं पहुंच सके. साल 2009 के कोपेनहेगन सम्मेलन की तरह पेरिस सम्मेलन के भी नाकाम हो जाने की आशंका के बावजूद मेजबान फ्रांस ने आशा व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘हम लगभग वहां पहुंच गए हैं.’
फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरेंट फेबियस ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान-की-मून के साथ पत्रकारों को बताया, ‘‘हम लगभग वहां पर हैं. मैं आशावादी हूं.’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं कल सभी पक्षों को नौ बजे एक विषय-वस्तु प्रस्तुत करुंगा और मुझे यकीन है कि उसे स्वीकार कर लिया जाएगा.’ सम्मेलन के मेजबान फेबियस से मुलाकात के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री केरी ने कहा, ‘‘हमारी मुलाकात रचनात्मक रही. हमने काफी प्रगति की.
कल रात, देर रात प्रगति हुई. लेकिन अब भी कुछ जटिल मुद्दे हैं जिन पर हम काम कर रहे हैं.’ बान-की-मून ने दूतों से अपील की कि वे ‘‘इंसानियत की खातिर अंतिम फैसला करें.’ उन्होंने कहा, ‘‘यह वार्ता जटिल है. बहुत मुश्किल है. लेकिन इंसानियत के लिए अहम है. हमारे पास कुछ ही घंटे बचे हैं.’ उन्होंने कुछ अहम सवालों की पहचान की जिसमें यह भी शामिल है कि अमीर और गरीब देशों के बीच ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती का बोझ कैसे साझा किया जाए और विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने की लागत का वित्तपोषण कैसे किया जाए.

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