पॉल ने ब्रिटेन में छात्र वीजा पर प्रतिबंध की नीति की आलोचना की

लंदन : दिग्गज एनआरआई उद्योगपति लॉर्ड स्वराज पॉल ने ब्रिटेन में छात्र वीजा पर प्रतिबंध की नीति की आलोचना की है. पाल ने यह आलोचना ऐसे समय की है जबकि अभी कल ही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने अपनी भारत यात्र में कहा था कि ब्रिटेन आने वाले भारतीय विद्यार्थियों की संख्या की कोई […]

लंदन : दिग्गज एनआरआई उद्योगपति लॉर्ड स्वराज पॉल ने ब्रिटेन में छात्र वीजा पर प्रतिबंध की नीति की आलोचना की है. पाल ने यह आलोचना ऐसे समय की है जबकि अभी कल ही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने अपनी भारत यात्र में कहा था कि ब्रिटेन आने वाले भारतीय विद्यार्थियों की संख्या की कोई सीमा नहीं है.

यहां ‘भारत-ब्रिटेन संबंध आगे की राह’ विषय पर आयोजित व्याख्यान के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पॉल ने कहा, ‘‘ यहां आने वाले विद्यार्थियों की दृष्टि से जो देश महत्वपूर्ण हैं, वहां के मेधावी विद्यार्थी विद्यार्थी अब दाखिले के लिए कनाडा, आस्ट्रेलिया और अमेरिका के विश्वविद्यालयों को चुनने लगे हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी ब्रिटेन को अब एक प्रतिकूल जगह के तौर पर देख रहे हैं और हम अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह खो रहे हैं. यदि ब्रिटेन को एक अग्रणी अंतरराष्ट्रीय शक्ति बने रहना है तो हमें दुनियाभर से विद्यार्थियों का स्वागत करना होगा. यदि हम यह नहीं करते हैं तो अपना प्रभाव व प्रतिस्पर्धी स्थिति गंवा देंगे.’’ पॉल ने कल रात्रि में इस व्याख्यान कार्यक्रम में कहा, ‘‘ विद्यार्थी वीजा नीति में बदलाव करने का एक बड़ा उद्येश्य मेधावी विद्यार्थियों को ब्रिटेन में अध्ययन के लिए आकर्षित किया जा सके पर यह नहीं हो सका.’’

पॉल ने कहा, ‘‘ हम अपनी आव्रजन नीति बदल कर यदि शुद्ध आव्रजन की संख्या में विद्यार्थियों की संख्या को न शामिल करें तो हम दुनिया को दिखा सकते हैं कि सभी देशों के सही व मेहनती विद्यार्थियों के लिए हमारे दरवाजे खुले हैं. हमें उन्हें अध्ययन पूरा करने के दो साल तक ब्रिटेन में काम करने का अवसर भी उपलब्ध कराना होगा.’

कैमरन ने कल नई दिल्ली में कहा था, ‘ब्रिटेन में आने वाले भारतीय विद्यार्थियों के मामले में संख्या की कोई सीमा नहीं है.बस शर्त है कि विद्यार्थी सच्चे हों और उन्होंने ब्रिटेन के असली विश्वविद्यालयों में दाखिला ले रखा हो.’ लॉर्ड पॉल ने कहा कि वह दुनियाभर में ब्रिटेन की वीजा प्रणाली के नकारात्मक प्रचार को लेकर निराश हैं और इसका असर मौजूदा एवं भावी अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा, ‘‘ पिछले साल मई में, मैं और ब्रिटेन के उच्च शिक्षा क्षेत्र में विश्वविद्यालय के 67 साथियों ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर वीजा नीति में बदलाव के बारे में अपनी चिंताओं से उन्हें अवगत कराया था.’’ ‘‘ हमने सरकार से विद्यार्थियों को शुद्ध आव्रजन आंकड़ों में शामिल नहीं करने का अनुरोध किया था. हालांकि, सरकार ने अपनी नीतियां लागू की जिसका दुष्परिणाम अब देखने में आ रहा है.’’

लॉर्ड पॉल ने विद्यार्थियों की बजाय कारोबारी लोगों के लिए ब्रिटेन के वीसा में विशेष छूट के सरकार के निर्णय पर आश्चर्य भी जताया. ब्रिटेन की सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि करीब 100 धनाढ्य विदेशियों को शुरआत में नई ‘बेस्पोक’ वीजा सेवा में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा. गृह मंत्रलय ने कहा है कि वह इस बेस्पोक प्रणाली के तहत यह सुनिश्चित करेगा कि ऐसे लोगों को ब्रिटेन की सीमा में प्रवेश में किसी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े. पॉल ने कहा, ‘‘ मेरे विचार से, यह दूसरे तरीके से होना चाहिए. दूसरे देशों के लोगों को शिक्षित करने से वे ब्रिटेन के आजीवन प्रवक्ता बन सकते हैं.’’

‘‘ उदाहरण के तौर पर, नई आव्रजन नीतियों से युनिवर्सिटी आफ वॉल्वरहैंपटन में विदेश से आकर स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है.’’उन्होंने कहा कि भारत और ब्रिटेन को केवल व्यापार के बारे में ही नहीं सोचना चाहिए. ‘‘ कई अन्य चीजें भी हैं जिनमें भारत और ब्रिटेन एक दूसरे से लाभ ले सकते हैं. मेरे विचार से शिक्षा उनमें से सबसे महत्वपूर्ण है.’’ लॉर्ड पॉल ने कहा कि ब्रिटेन और भारत को शिक्षा के क्षेत्र विशेषकर उच्च शिक्षा पर अधिक जोर देना चाहिए क्योंकि इस क्षेत्र में दोनों देश एक-दूसरे से बहुत अधिक लाभ ले सकते हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि भारत और ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करना के लिए एक साथ मिलकर काम करने के वास्ते गठजोड़ करना चाहिए.

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