श्रीलंकाई राष्ट्रपति चोगम में खुर्शीद की मौजूदगी से संतुष्ट

कोलंबो : श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक ( चोगम ) में विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के भाग लेने पर आज संतोष व्यक्त किया. यह पूछे जाने पर कि कि क्या वह कल से यहां शुरु हो रहे चोगम में भारतीय भागीदारी के स्तर से संतुष्ट हैं, राजपक्षे ने एक संवाददाता […]

कोलंबो : श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक ( चोगम ) में विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के भाग लेने पर आज संतोष व्यक्त किया.

यह पूछे जाने पर कि कि क्या वह कल से यहां शुरु हो रहे चोगम में भारतीय भागीदारी के स्तर से संतुष्ट हैं, राजपक्षे ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मैं संतुष्ट हूं.’’जब एक भारतीय पत्रकार ने पूछा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तमिलनाडु के लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए बैठक में शामिल होने नहीं आए तो राजपक्षे ने जवाब में कहा, ‘‘लेकिन यह उन्होंने मुझसे नहीं कहा.’’राजपक्षे ने उल्लेख किया कि भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दो साल पहले पर्थ में आयोजित पूर्व बैठक में शामिल नहीं हुए थे.

उन्होंने कहा, ‘‘विदेश मंत्री यहां हैं. मैं संतुष्ट हूं.’’ चोगम के पूर्ण बहिष्कार की तमिलनाडु के राजनीतिक दलों की मांग को दरकिनार करते हुए खुर्शीद बैठक में शामिल होने कल यहां पहुंॅचे थे और स्पष्ट किया था कि भारत की भागीदारी का किसी भी रुप में यह मतलब नहीं है कि श्रीलंका में तमिलों के मुद्दे पर उसके रुख में कोई हल्कापन आया है.

खुर्शीद ने कहा था कि श्रीलंका के तमिलों के हितों के लिए भारत कटिबद्ध है और वह ‘‘व्यापक राष्ट्रीय हित’’ में श्रीलंका के संपर्क में रहेगा.उन्होंने कहा था कि श्रीलंका के साथ भारत द्वारा कोई संबंध नहीं रखे जाने जैसी शर्तों से चीजें कठिन होंगी.

विदेश मंत्री ने कहा कि यद्यपि वह बहुपक्षीय बैठक में भाग लेने के लिए, न कि द्विपक्षीय बातचीत के लिए कोलंबो में हैं, लेकिन उन्हें बैठक से इतर श्रीलंका सरकार के साथ तमिलों को अधिक शक्तियां दिए जाने और श्रीलंकाई जलक्षेत्र में भारतीय मछुआरों पर हमलों जैसे मुद्दों पर भारत की चिंता से अवगत कराने का अवसर मिलेगा.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तीन दिन तक चलने वाली इस बैठक में शामिल होने की योजना बना रहे थे, लेकिन तमिलनाडु में प्रतिस्पर्धात्मक राजनीति और अगले साल होने वाले चुनावों के मद्देनजर राज्य में कांग्रेस के अलग थलग पड़ जाने की आशंका से पिछले हफ्ते उन्हें अपनी योजना त्यागनी पड़ी.

तमिलनाडु विधानसभा में भारत द्वारा चोगम के पूर्ण बहिष्कार की मांग करने वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित होने को लेकर खुर्शीद ने कहा था कि वह मांग से ‘‘हैरान’’ हैं.उन्होंने कहा, ‘‘हम श्रीलंका में उत्तरी क्षेत्रों के तमिलों के लिए काफी कुछ कर रहे हैं. हम 50 हजार मकानों :युद्ध से तबाह क्षेत्रों में: के निर्माण, सड़कें बिछाने और आधारभूत ढांचा खड़ा किए जाने की बड़ी परियोजना में शामिल हैं. कोई नहीं कह रहा कि आपको यह नहीं करना चाहिए.’’ कांग्रेस कोर ग्रुप के इस फैसले के बाद कि प्रधानमंत्री चोगम बैठक में शामिल नहीं होंगे, मनमोहन ने राजपक्षे को पत्र लिखकर बैठक में शामिल होने में अपनी असमर्थता जताई थी.

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