आतंकी हमले की शिकार के लिए मलाला जैसे इलाज की मांग

कराची : कराची के एक स्कूल में आतंकी हमले में पक्षाघात की शिकार हो गयी एक लड़की के परिवार वालों ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया है कि पीड़ित को वैसा ही इलाज और महत्व दिया जाए जैसा मलाला युसूफजई को दिया गया. कराची में बलदिया शहर के नेशन स्कूल में अज्ञात आतंकवादियों द्वारा फेंके […]

कराची : कराची के एक स्कूल में आतंकी हमले में पक्षाघात की शिकार हो गयी एक लड़की के परिवार वालों ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया है कि पीड़ित को वैसा ही इलाज और महत्व दिया जाए जैसा मलाला युसूफजई को दिया गया.

कराची में बलदिया शहर के नेशन स्कूल में अज्ञात आतंकवादियों द्वारा फेंके गये हथगोले में 11 वर्षीय आतिया अरशद खान सहित कई स्कूली बच्चे घायल हो गये थे. आतिया की मां अमना बीबी ने बताया मेरी बेटी मलाला से प्रेरित है. किस्मत की बात है. मार्च में उसके स्कूल पर हुये आतंकवादी हमले में वह घायल हो गयी थी और अब वह व्हीलचेयर पर है.

पक्षाघात के कारण आतिया चल नहीं पाती लेकिन व्हीलचेयर पर होने के बावजूद वह पढ़ने जाती है. अमना बीबी ने बताया कि वह मलाला का अनुसरण करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं.आतिया ने बताया मलाला एक बहादुर लड़की है और वह मुझे अच्छी लगती है. वह शिक्षा का महत्व समझती है. यही वजह है कि हमले और बीमारी के बावजूद मैंने स्कूल जाना शुरु कर दिया है.

अक्तूबर 2012 में मलाला युसूफजई को मारने के लिए तालिबानी बंदूकधारियों ने उस पर गोलियां चलाई थीं. तब वह स्कूल बस से अपने घर लौट रही थी. 16 वर्षीय मलाला ने लड़कियों की पढ़ाई के लिए अभियान चलाया था. हमले में वह गंभीर रुप से घायल हो गई थी.

आतिया का बड़ा भाई आमिर उसे स्कूल ले जाता है और वहां सहपाठी उसकी मदद करते हैं. उसकी मां ने बताया कि आतिया फिर से चल सकेगी लेकिन इसके लिए महंगा इलाज कराना उनके बस के बाहर की बात है.

अमना बीबी ने कहा मेरी बेटी उन लोगों की शिकार बनी जो नहीं चाहते कि लड़कियां पढ़ाई करें. मैं सरकार से कहना चाहती हूं कि मलाला को जिस तरह महत्व दिया गया और उसके इलाज का खर्च उठाया गया वैसा ही आतिया के साथ भी हो. आतंकी हमले में घायल होने के बाद भी आतिया के हौसले कम नहीं हुए. वह आतंकी हमले से बेपरवाह हो कर स्कूल जाती है.

लेकिन वह यह भी कहती है कि कुछ छात्र-छात्राएं अब स्कूल नहीं आते क्योंकि उनके अभिभावक डर के कारण उन्हें स्कूल नहीं भेजते. उसने कहा लेकिन मैं अपने दोस्तों से कहती हूं कि अगर हम देश की प्रगति चाहते हैं तो हमें पढ़ना होगा.

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