अमेरिका शोधार्थी ने कहा, भारत-चीन के अच्छे संबंध अमेरिका के हित में

वाशिंगटन : अमेरिका की प्रसिद्ध शोधार्थी ने कहा है कि भारत और चीन के बीच मैत्रीपूर्ण तथा शांतिपूर्ण संबंध अमेरिका के हित में हैं. हैरिटेज फाउंडेशन की ओलीविया एनोस ने कहा, भारत और चीन के बीच अपेक्षाकृत मैत्रीपूर्ण यात्रा स्वागतयोग्य है. दो परमाणु शक्तियों का सीमा पर शांति बनाए रखना और तनाव बढ़ाने वाली संभावित […]

वाशिंगटन : अमेरिका की प्रसिद्ध शोधार्थी ने कहा है कि भारत और चीन के बीच मैत्रीपूर्ण तथा शांतिपूर्ण संबंध अमेरिका के हित में हैं. हैरिटेज फाउंडेशन की ओलीविया एनोस ने कहा, भारत और चीन के बीच अपेक्षाकृत मैत्रीपूर्ण यात्रा स्वागतयोग्य है. दो परमाणु शक्तियों का सीमा पर शांति बनाए रखना और तनाव बढ़ाने वाली संभावित झड़पों को टालना अमेरिका के हित में है.

ओलीविया ने कहा इस संदर्भ में भारत चीन के साथ जो भी प्रत्यक्ष कार्य कर सकेगा, वह करेगा. उन्होंने कहा, अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों का विकास जारी रखकर चीन की बढ़ती हुई ताकत से संतुलन बैठाने में मदद कर सकता है. फाउंडेशन की वरिष्ठ फेलो लीजा कुर्टीस ने कहा कि भारत और चीन के बीच अनसुलझी सीमा से जुड़े मुद्दे, हिंद महासागर में नौवहन स्पर्धा आने वाले सालों में बनी रहेगी और इसका नतीजा सशस्त्र विवाद के रुप में भी सामने आ सकता है. हालांकि इसकी संभावना बहुत कम है.

लीजा ने कहा, अमेरिका को भारत के साथ मजबूत रणनीतिक और रक्षा संबंध बनाने चाहिए ताकि क्षेत्र में दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण सामंजस्य बनाने में और चीन की किसी भी उग्र कार्रवाई को रोकने में मदद की जा सके. ओलीविया ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हालिया चीन यात्रा ने दर्शाया कि दोनों पक्ष साङो हितों के मुद्दों पर सहयोग करने और साझा सीमा से जुड़े मतभेदों का प्रबंधन सही ढंग से करने की इच्छा रखते हैं.

उन्होंने कहा, सीमा रक्षा सहयोग समझौता (बीडीसीए) इन दोनों के द्वारा किया गया सबसे महत्वपूर्ण काम था. भारत दावा करता है कि चीन ने इसकी उत्तरी सीमा पर अक्साई चिन (जम्मू व कश्मीर) में भारतीय क्षेत्र के 14 हजार वर्गमील जगह पर कब्जा जमा रखा है जबकि चीन भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में 34 हजार वर्ग मील पर अपने अधिकार जताता है.

दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए कि यदि चीनी और भारतीय सेनाएं विवादित क्षेत्रों में एक दूसरे के पास भी आ जाती हैं तो भी उन्हें संयम बरतना है. बीडीसीए में ऐसा कहा गया है.

उन्होंने कहा, हालांकि इस समझौते पर सहमति में चीन द्वारा ईमानदारी बरते जाने पर अभी भी संशय है. सिंह की यात्रा से ठीक पहले चीन ने अरुणाचल प्रदेश की दो महिलाओं को अमान्य वीजा जारी किए, जिसकी वजह से वे चीन जाने वाले विमान में सवार नहीं हो सकीं और विश्वस्तरीय खेल आयोजन में भाग नहीं ले सकीं. ओलीविया ने कहा सिंह की यात्रा से पहले चीनी कार्रवाई के कारण इस यात्रा के दौरान वीजा उदारीकरण समझौते को आगे बढ़ाने का भारत का रुख प्रतिकूल हो गया.

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