ढाका : बांग्लादेश की एक अदालत ने अर्धसैन्य बलों के 152 पूर्व सैनिकों को वर्ष 2009 की बगावत के दौरान 57 सैन्य अधिकारियों समेत कुल 74 लोगों की हत्या का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है. तीसरी अतिरिक्त मेट्रोपोलिटन सत्रीय अदालत के न्यायाधीश मोहम्मद अख्तरुजमां ने फैसला सुनाया, ‘‘इन्हें फांसी पर लटकाया जाएगा.’’
इस मामले को दुनिया का सबसे बड़ा आपराधिक मुकदमा माना जा रहा है.न्यायाधीश ने राजधानी ढाका में खचाखच भरी अदालत को बताया, ‘‘अत्याचार इतने जघन्य थे कि मृत लोगों के शवों को भी उनके अधिकार नहीं दिए गए.’’ 846 आरोपियों में से 26 आम नागरिक थे. अदालत ने 158 विद्रोही सैनिकों को उम्रकैद और 251 अन्य आरोपियों को 3 से 10 साल तक की कैद की सजा सुनाई. अदालत ने 242 आरोपियों की नरसंहार में कोई संलिप्तता न मिलने पर उन्हें बरी कर दिया. मुख्य विपक्ष बीएनपी के पूर्व सांसद नसीरुद्दीन अहमद पिंटू और आवामी लीग के नेता व पूर्व बीडीआर सैनिक तोराब अली को उम्रकैद की सजा सुनाई गई.
