वाशिंगटन : प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय का कहना है कि लोकतंत्र के प्रतिकूल प्रभावों से प्रभावित रहने वाला ग्रामीण भारत ही वह जगह है, जहां लोकतंत्र सबसे ज्यादा जीवंत है.कल लंदन में ‘मुक्त सरकार साङोदारी वार्षिक सम्मेलन’ में एक बैठक को संबोधित करते हुए रॉय ने कहा, ‘‘ग्रामीण भारत में रहने वाले लोग बुद्धिमान लोग हैं. वहां आम लोग बुद्धिमान हैं, वे होनहार हैं. पर हम उन्हें नहीं सुनते.’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास गांधी हैं. गांधी ने पूरे भारत की यात्र की थी, उन्होंने लोगों को सुना था और इसी तरह स्वतंत्रता के लिए राष्ट्रीय आंदोलन की रैली और सविनय अवज्ञा आंदोलन हुए थे. जिन लोगों को हम साधारण मानकर खारिज कर देते हैं, वे भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं.’’
रॉय ने कहा, ‘‘इसलिए जो ग्रामीण भारत लोकतंत्र के सबसे ज्यादा प्रतिकूल प्रभावों से प्रभावित रहता है, वहीं पर असल में लोकतंत्र सबसे ज्यादा जीवंत है. वे इसे ठीक करना चाहते हैं. वे विरोध करते हैं और संघर्ष करते हैं.’’ रॉय ने कहा, ‘‘कुछ तैयार करने के लिए, किसी चीज की शुरुआत करने के लिए वे विरोध प्रदर्शन करते हैं. वे हिंसा नहीं चाहते, वे किसी को पीटना नहीं चाहते. लेकिन वे अपनी रोटी चाहते हैं. वे स्वास्थ्य सेवाएं चाहते हैं. इस तरह के विरोध प्रदर्शनों से ही सूचना के अधिकार अभियान का जन्म हुआ.’’
अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने इस समारोह को टेलीकांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा, ‘‘अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन में और हमारे जैसे देशों में लोगों को इकट्ठे होने, बोलने, चीजें आयोजित करने, सरकार बदलने का आह्वान करने की आजादी है. हमारे देशों में, हम दोनों ही देशों में मीडिया को असाधारण शक्ति प्राप्त है और उन्हें असाधारण स्वतंत्रता और योग्यता भी प्राप्त है ताकि वे विचारो और लोगों को एक सही दिशा दे सकें.’’कैरी ने कहा, ‘‘लोग अपने व्यक्तिगत प्रयास करें या एनजीओ के माध्यम से, उन सभी को मीडिया के जरिए अपना प्रभाव छोड़ने की स्वतंत्रता है.’’
